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खेलकूद स्टेडियम के बिना ही अभ्यास करने को मजबूर युवा
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मोरना-भोकरहेडी मार्ग पर दौड़ते युवा खिलाड़ी।
- फोटो : KHATAULI
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मोरना। ग्रामीण आंचलों में खेलों के प्रति सरकार की उदासीनता पर साफ दिखाई देती है। ग्राउंड और व्यवस्थाओं के अभाव में मोरना ककरौली, भोपा भोकरहेड़ी क्षेत्र के युवा सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ का अभ्यास करते दिखाई पड़ते हैं। गांव ककराला में खेल मंत्रालय द्वारा मिनी स्टेडियम के लिए चयनित जगह गांव ककराला में कबड्डी का अभ्यास करने वाले युवाओं को चंदा एकत्र करना पड़ रहा है। प्रधान की उदासीनता का यह आलम है कि आज तक रोशनी के लिए खेल मैदान पर प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं हो सकी।
विकास खंड मोरना के गांव ककराला में जिला पंचायत सदस्य वंदना वर्मा के प्रयासों से खेल मंत्रालय ने मिनी स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा की थी लेकिन एक वर्ष बीत बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। चयनित जगह पर कबड्डी खेलने के लिए गांव ककरौली, टंहेडा, मीरापुर, गुनारसा, भोकरहेडी, मोरना, करहेडा, चौरावाला आदि के अनमोल, चंदन, आदित्य, शुभम, वैभव, अचल, अक्षय, पिकू, अनुज, वंश, सहित महक, प्रिया, अवंतिका, शिवानी सहित अनेक युवा खिलाड़ी कोच दिनेश मलिक के सान्निध्य में कबड्डी खेलने के गुर सीख रहे हैं। कोच दिनेश मलिक उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं और कई राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों, कालेजों और यूनिवर्सिटी के साथ बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में मेट पर कबड्डी खेली जाती है लेकिन देहात में खिलाड़ी को मिट्टी में अभ्यास करना पड़ता है। इससे मेट पर प्रतियोगिता के दौरान योग्यता के अनुकूल खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर पाता।
वहीं कस्बा भोकरहेडी इंटर कालेज ग्राउंड में दौड़ने का ट्रैक मात्र 320 मीटर का है, जिसके चलते युवा धावक जान जोखिम में डालकर सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ने को मजबूर हैं। सुबह व शाम दौड़ का अभ्यास करने वाले मोरना, फिरोजपुर, शुकतीर्थ, वजीराबाद, छछरौली आदि के युवा गौरव, चुुनमुन राठी, सोनू, विशू आदि ने बताया कि सरकार को खेेलों को बढ़ावा देने के लिए मोरना क्षेत्र मे खेल स्टेडियम बनाना चाहिए। कस्बा भोकरहेडी, अथाई छछरौली, वजीराबाद आदि गांवों से वॉलीबाल में कई अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके हैं। लेकिन सरकार ने आज तक कोई सुविधा प्रदान नहीं की।
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विकास खंड मोरना के गांव ककराला में जिला पंचायत सदस्य वंदना वर्मा के प्रयासों से खेल मंत्रालय ने मिनी स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा की थी लेकिन एक वर्ष बीत बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। चयनित जगह पर कबड्डी खेलने के लिए गांव ककरौली, टंहेडा, मीरापुर, गुनारसा, भोकरहेडी, मोरना, करहेडा, चौरावाला आदि के अनमोल, चंदन, आदित्य, शुभम, वैभव, अचल, अक्षय, पिकू, अनुज, वंश, सहित महक, प्रिया, अवंतिका, शिवानी सहित अनेक युवा खिलाड़ी कोच दिनेश मलिक के सान्निध्य में कबड्डी खेलने के गुर सीख रहे हैं। कोच दिनेश मलिक उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं और कई राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों, कालेजों और यूनिवर्सिटी के साथ बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में मेट पर कबड्डी खेली जाती है लेकिन देहात में खिलाड़ी को मिट्टी में अभ्यास करना पड़ता है। इससे मेट पर प्रतियोगिता के दौरान योग्यता के अनुकूल खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर पाता।
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वहीं कस्बा भोकरहेडी इंटर कालेज ग्राउंड में दौड़ने का ट्रैक मात्र 320 मीटर का है, जिसके चलते युवा धावक जान जोखिम में डालकर सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ने को मजबूर हैं। सुबह व शाम दौड़ का अभ्यास करने वाले मोरना, फिरोजपुर, शुकतीर्थ, वजीराबाद, छछरौली आदि के युवा गौरव, चुुनमुन राठी, सोनू, विशू आदि ने बताया कि सरकार को खेेलों को बढ़ावा देने के लिए मोरना क्षेत्र मे खेल स्टेडियम बनाना चाहिए। कस्बा भोकरहेडी, अथाई छछरौली, वजीराबाद आदि गांवों से वॉलीबाल में कई अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके हैं। लेकिन सरकार ने आज तक कोई सुविधा प्रदान नहीं की।
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