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लॉकडाउन में मोबाइल बन गया था विद्यार्थियों का मित्र

Thu, 25 Mar 2021 12:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 12:02 AM IST
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Mobile became a friend of students in lockdown
शिक्षक आसिफ - फोटो : MUZAFFARNAGAR
लॉकडाउन में मोबाइल बन गया था विद्यार्थियों का मित्र
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मुजफ्फरनगर। कोविड का दौर विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधक बना रहा। ग्रामीण अंचलों में ऑनलाइन शिक्षा पद्धति 25 से 30 फीसदी तक ही कारगर हो पाई। हालांकि पब्लिक स्कूल के बच्चों पर ऑनलाइन पढ़ाई हावी रही। अभिभावक पहले जहां बच्चों को मोबाइल फोन देने से परहेज करते थे, वहीं लॉकडाउन में उनका मित्र बन गया। दूसरी ओर, शासन द्वारा परिषदीय स्कूलों में चलाई गई कमजोर नेटवर्क और आर्थिक दिक्कतों से ई-पाठशाला तो कामयाब नहीं हो पाई, परंतु मोहल्ला पाठशाला से ज्ञान का स्तर बरकरार रहा। अमर उजाला ने ऑनलाइन कक्षाओं की कामयाबी पर विद्यार्थियों के मन को टटोला।
क्लास में ही मिलता है उलझनों का जवाब
रोनी हरजीपुर निवासी मनीषा पुंडीर बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। कहती हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई ने थोड़ी देर में ही सिर दर्द होने लगता था। लेकिन कोर्स के बोझ के कारण मोबाइल फोन से पढ़ाई करना मजबूरी थी। कोर्स की उलझनों का जवाब क्लास में शिक्षकों से प्राप्त होता है।
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गांवों में नेटवर्किंग समस्या रही हावी
- चंद्रशेखर आजाद पीजी कॉलेज की छात्रा आकांक्षा कहती हैं कि उन्होंने पूरे कोरोना काल में घर से पढ़ाई की। हालांकि पढ़ाई की गुणवत्ता का अभाव रहा। गांवों में नेटवर्किंग की समस्या भी बड़ा कारण रहता था। लंबे समय से मोबाइल स्क्रीन देखने से आंख में दिक्कत आने लगी थी।
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ऑनलाइन पढ़ाई में नहीं आई दिक्कत
छात्र अनंत त्यागी कहते हैं कि कोरोना काल में साल भर पढ़ाई बाधित रही। ऑनलाइन पढ़ाई में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। हालांकि कई बार पढ़ाई के साथ सोशल साइटस का प्रयोग उन्होंने सिर्फ आनंद लिया। मोबाइल का उपयोग अच्छे दोस्त की तरह किया।
नौनिहालों का ज्ञान रहा बरकरार
नंगला राई प्राइमरी स्कूल की कक्षा पांच की छात्रा अक्शा कहती हैं कि परिषदीय स्कूलों में शासन द्वारा संचालित मोहल्ला पाठशाला से नौनिहालों का ज्ञान बरकरार रहा। शिक्षकों द्वारा गांव में अलग-अलग दिन सूचीबद्ध बच्चों की कक्षाएं ली गई, तो स्कूल से ज्यादा कोर्स समझ में आया।
मोहल्ला पाठशाला से पूरा हो गया कोर्स
-जूनियर हाईस्कूल की कक्षा छह की छात्रा आयशा मौहल्ला पाठशाला से खुश हैं। कहती हैं कि इस प्रणाली से अधिकांश कोर्स पूरा हो गया था। ऑनलाइन पढा़ई की अपेक्षा घर आकर टीचर द्वारा पढ़ाने से सीखने का मौका मिला। शिक्षकों द्वारा मोहल्लों में एक घेर या घर में बैठकर नियम से पढ़ाना सराहनीय प्रयास रहा।
मोहल्ला पाठशाला सरकार का बेहतर कदम
कंपोजिट विद्यालय के शिक्षक आसिफ कहते हैं लॉकडाउन में सरकार ने बच्चों का ज्ञान को बरकरार रखने के लिए अनेक योजना चलाई। पहले ई-पाठशाला, फिर दूरदर्शन चैनल पर पढ़ाई और बाद में व्हाट्सएप पर सप्ताह भर का कार्यक्रम चलाया गया। नेटवर्क दिक्कत से गांव में यह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया।

क्या कहते हैं अभिभावक:
कोविड में एंड्रायड फोन से बच्चों की जिंदगी में बदलाव उनके भविष्य के लिए चिंताजनक है। पंकज त्यागी, कुक्कू त्यागी, महेश त्यागी, प्रदीप सैनी, सुशील कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई का बोझ बच्चों की आंखों पर प्रभाव डाल रहा था। मोबाइल फोन पर पढ़ाई से भटक कर अनेक एप और सोशल साइट्स देखने की लत चिंता बढ़ाती थी। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की समय बर्बादी के साथ सोचने समझने की शक्ति कम हो रही थी।

छात्रा आयशा

छात्रा आयशा- फोटो : MUZAFFARNAGAR

छात्रा अक्शा

छात्रा अक्शा- फोटो : MUZAFFARNAGAR

छात्र अनंत त्यागी

छात्र अनंत त्यागी- फोटो : MUZAFFARNAGAR

छात्रा आकांक्षा

छात्रा आकांक्षा- फोटो : MUZAFFARNAGAR

छात्रा मनीषा पुंडीर

छात्रा मनीषा पुंडीर- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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