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ट्रैक से पेंड्रोल क्लिप गायब, पेट्रोलिंग करने वाले कर्मियों की घोर लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:58 AM IST
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खतौली में गंगनहर का पुल।
- फोटो : अमर उजाला
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खतौली गंगनहर पर लोहे पुल के पास रेलवे ट्रैक के पेंड्रोल निकले हुए हैं। दो-तीन पेंड्रोल क्लिप गायब भी हैं। इससे पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हो रही है। इससे साफ जाहिर है कि ट्रेन हादसा होने के बावजूद रेलवे विभाग अभी तक रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि रेलवे कर्मचारी पूर्व में भी यह दावा करते रहे हैं कि एक या दो पेंड्रोल निकलने और गायब होने से ट्रेनों के संचालन को कोई खतरा नहीं है।
जगत कॉलोनी के सामने जिस जगह कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसा हुआ था। उससे मात्र डेढ़ किलोमीटर मुजफ्फरनगर की ओर गंगनहर का रेलवे लोहे का पुल है। इस पुल पर भी कई बार रेलवे ट्रैक के नट-बोल्ट ढीले हो चुके हैं। रेलवे पुल के पास बृहस्पतिवार को रेलवे ट्रैक के पेंड्रोल निकले मिले। दो-तीन पेंड्रोल गायब भी हैं।
पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों को भी इसका पता नहीं चल सका है। इसके बावजूद रेलवे ट्रैक से धड़ाधड़ ट्रेनें गुजर रही हैं। सवाल यह उठता है कि शनिवार को इतना जबरदस्त ट्रेन हादसा हुआ, इसके बावजूद रेलवे विभाग ट्रैक की सुरक्षा को लेकर सबक नहीं ले सका है, जबकि ट्रेन हादसा भी ट्रैक कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ था। हादसे में 23 यात्रियों की जान चली गई। पेंड्रोल निकलने और गायब होने के संबंध में स्टेशन मास्टर भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
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धीमी गति से अब भी गुजर रही हैं ट्रेनें
खतौली। कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक से पांचवें दिन इंजीनियरों समेत सभी कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया। हालांकि अभी भी सभी ट्रेनों को धीमी गति से ट्रैक से निकाला जा रहा है। वहीं, दुर्घटनास्थल पर पड़े क्षतिग्रस्त बोगियों और मलबे की सुरक्षा के लिए जीआरपी को तैनात किया गया है।
बुधवार को आरपीएफ इंस्पेक्टर सोनी शर्मा समेत इंजीनियर बता रहे थे कि नए ट्रैक के मजबूत होने पर अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रैक पूरी तरह से मजबूत नहीं होगा, ट्रैक कर्मचारी शिफ्टवार काम करते रहेंगे। बृहस्पतिवार को पांचवें दिन नए ट्रैक से इंजीनियरों समेत सभी ट्रैक कर्मचारियों को हटा लिया गया और नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को भी इस ट्रक से सभी ट्रेनें धीमी गति से निकाली गईं। उधर, क्षतिग्रस्त बोगियों से सामान चोरी न हो जाए, इसलिए जीआरपी के जवानों को सुरक्षा में लगाया गया है।
धीमी गति से अब भी गुजर रही हैं ट्रेनें
खतौली। कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक से पांचवें दिन इंजीनियरों समेत सभी कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया। हालांकि अभी भी सभी ट्रेनों को धीमी गति से ट्रैक से निकाला जा रहा है। वहीं, दुर्घटनास्थल पर पड़े क्षतिग्रस्त बोगियों और मलबे की सुरक्षा के लिए जीआरपी को तैनात किया गया है।
बुधवार को आरपीएफ इंस्पेक्टर सोनी शर्मा समेत इंजीनियर बता रहे थे कि नए ट्रैक के मजबूत होने पर अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रैक पूरी तरह से मजबूत नहीं होगा, ट्रैक कर्मचारी शिफ्टवार काम करते रहेंगे। बृहस्पतिवार को पांचवें दिन नए ट्रैक से इंजीनियरों समेत सभी ट्रैक कर्मचारियों को हटा लिया गया और नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को भी इस ट्रक से सभी ट्रेनें धीमी गति से निकाली गईं। उधर, क्षतिग्रस्त बोगियों से सामान चोरी न हो जाए, इसलिए जीआरपी के जवानों को सुरक्षा में लगाया गया है।
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जगत कॉलोनी के सामने जिस जगह कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसा हुआ था। उससे मात्र डेढ़ किलोमीटर मुजफ्फरनगर की ओर गंगनहर का रेलवे लोहे का पुल है। इस पुल पर भी कई बार रेलवे ट्रैक के नट-बोल्ट ढीले हो चुके हैं। रेलवे पुल के पास बृहस्पतिवार को रेलवे ट्रैक के पेंड्रोल निकले मिले। दो-तीन पेंड्रोल गायब भी हैं।
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पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों को भी इसका पता नहीं चल सका है। इसके बावजूद रेलवे ट्रैक से धड़ाधड़ ट्रेनें गुजर रही हैं। सवाल यह उठता है कि शनिवार को इतना जबरदस्त ट्रेन हादसा हुआ, इसके बावजूद रेलवे विभाग ट्रैक की सुरक्षा को लेकर सबक नहीं ले सका है, जबकि ट्रेन हादसा भी ट्रैक कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ था। हादसे में 23 यात्रियों की जान चली गई। पेंड्रोल निकलने और गायब होने के संबंध में स्टेशन मास्टर भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
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धीमी गति से अब भी गुजर रही हैं ट्रेनें
खतौली। कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक से पांचवें दिन इंजीनियरों समेत सभी कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया। हालांकि अभी भी सभी ट्रेनों को धीमी गति से ट्रैक से निकाला जा रहा है। वहीं, दुर्घटनास्थल पर पड़े क्षतिग्रस्त बोगियों और मलबे की सुरक्षा के लिए जीआरपी को तैनात किया गया है।
बुधवार को आरपीएफ इंस्पेक्टर सोनी शर्मा समेत इंजीनियर बता रहे थे कि नए ट्रैक के मजबूत होने पर अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रैक पूरी तरह से मजबूत नहीं होगा, ट्रैक कर्मचारी शिफ्टवार काम करते रहेंगे। बृहस्पतिवार को पांचवें दिन नए ट्रैक से इंजीनियरों समेत सभी ट्रैक कर्मचारियों को हटा लिया गया और नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को भी इस ट्रक से सभी ट्रेनें धीमी गति से निकाली गईं। उधर, क्षतिग्रस्त बोगियों से सामान चोरी न हो जाए, इसलिए जीआरपी के जवानों को सुरक्षा में लगाया गया है।
धीमी गति से अब भी गुजर रही हैं ट्रेनें
खतौली। कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनास्थल पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक से पांचवें दिन इंजीनियरों समेत सभी कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया। हालांकि अभी भी सभी ट्रेनों को धीमी गति से ट्रैक से निकाला जा रहा है। वहीं, दुर्घटनास्थल पर पड़े क्षतिग्रस्त बोगियों और मलबे की सुरक्षा के लिए जीआरपी को तैनात किया गया है।
बुधवार को आरपीएफ इंस्पेक्टर सोनी शर्मा समेत इंजीनियर बता रहे थे कि नए ट्रैक के मजबूत होने पर अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रैक पूरी तरह से मजबूत नहीं होगा, ट्रैक कर्मचारी शिफ्टवार काम करते रहेंगे। बृहस्पतिवार को पांचवें दिन नए ट्रैक से इंजीनियरों समेत सभी ट्रैक कर्मचारियों को हटा लिया गया और नए ट्रैक को फ्री कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को भी इस ट्रक से सभी ट्रेनें धीमी गति से निकाली गईं। उधर, क्षतिग्रस्त बोगियों से सामान चोरी न हो जाए, इसलिए जीआरपी के जवानों को सुरक्षा में लगाया गया है।