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दुल्हैंडी पर 10 गांव में नहीं रहता दूध

Sat, 07 Mar 2020 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2020 12:42 AM IST
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Milk does not live in 10 villages on Dulhandi
जगेंद्र उज्ज्वल
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मुजफ्फरनगर। होली पर्व पर सिद्ध बाबा दूधाधारी से जुड़ी आस्था श्रद्धालुओं को फहीमपुर खुर्द खींच लाती हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा में जिले के दस गांव जुड़े हैं। जहां के ग्रामीण दुल्हैंडी के दिन दूध का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इन गांवों से दूध सिद्ध बाबा के समाधि मंदिर पर चढ़ता है। वहीं भोग प्रसाद बनाकर भक्तों में वितरित किया जाता है। इसके बाद ही दुल्हैंडी खेली जाती है और घरों में चूल्हे जलते हैं।
खतौली ब्लाक के गांव फहीमपुर खुर्द में सिद्ध बाबा दूधाधारी गणेशजी महाराज का समाधि मंदिर है। होली के त्योहार पर समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। यह परंपरा कब से चली आ रही है, किसी को ज्ञात नहीं है। सदियों से जिले के दस गांव के ग्रामीण आस्था और श्रद्धा के साथ दुल्हैंडी पर यहां आते है। फहीमपुर खुर्द, सिखेड़ा, शाहपुर, आदमपुर मौचड़ी, पिपलहेड़ा, ककराला, जंधेडी, अहमदगढ़, बिहारीपुर, सुशीलापुरी के ग्रामीण दुल्हैंडी को दूध का घरों में प्रयोग नहीं करते। तमाम दूध एकत्र कर फहीमपुर खुर्द गांव में सिद्ध बाबा की समाधि पर पहुंचता है। जहां बाबा को भोग के बाद दूधिया (मीठा दूध) का प्रसाद और खीर वितरित किया जाता है। जब तक प्रसाद नहीं बंटता, तब तक इन गांव में घरों में सुबह का नाश्ता तक नहीं बनता और न ही दुल्हैंडी खेली जाती। प्रसाद वितरण के बाद दुल्हैंडी खेली जाती है और भोजन बनाया जाता है। अहम बात यह है कि इस परंपरा से जुड़े सभी दस गांव अलग-अलग बिरादियों के है, जो स्नेह भाव से होली की महत्ता को प्रदर्शित करते है। बाबा की समाधि की सेवा में जुड़े शम्भूबन बताते है, सिद्ध बाबा से जुड़ी आस्था, श्रद्धा और भक्ति ग्रामीणों को फहीमपुर खुर्द लाती है। यह भारत की विविध संस्कृति का अनूठा स्वरूप है। दुल्हैंडी पर सिद्ध बाबा का दूधिया प्रसाद ग्रहण करने से किसानों और पशु पालकों के यहां कभी दूध की कमी नहीं रहती, ऐसी मान्यता है। हेम सिंह चौहान बताते है कि समाधि पर भोग प्रसाद लेने के बाद ही ग्रामीण अपने गांव लौट कर दुल्हैंडी पर्व मनाते है। सुनील पंडित पिपलहेड़ा कहते है, कब से बाबा की समाधि पर दुल्हैंडी पर दूध चढ़ाने की परंपरा है, उनके बुजुर्ग भी नहीं बता पाते थे।
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सर्प दंश से नहीं होती मौत, टिट्डी दल फसलों पर हमला नहीं करता
मुजफ्फरनगर। बुजुर्ग रणवीर सिंह, सतवीर मुखिया बताते है कि जनश्रुति है कि समाधि एक हजार वर्ष से ज्यादा प्राचीन है। मान्यता है कि बाबा की समाधि पर दूध चढ़ाने से गांव की परिधि में सर्प दंश से कोई मौत नहीं होती, टिट्डी दल फसलों पर हमला नहीं करता तथा हिंसक जानवर की जबाड़ी (मुहं) नहीं खुलता।
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