{"_id":"68e18a54b09d7f7a080c5db7","slug":"mental-depression-is-pushing-the-youth-towards-drugs-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1005-155764-2025-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: युवा वर्ग को नशे की और धकेल रहा मानसिक अवसाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: युवा वर्ग को नशे की और धकेल रहा मानसिक अवसाद
विज्ञापन
मुज़फ्फरनगर। नौकरी और कारोबार में असफलता युवा वर्ग के मन में अवसाद पैदा कर रही है। मानसिक अवसाद ग्रस्त युवा तनाव से बचने के लिए नशे का सहारा ले रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में प्रतिदिन ऐसे दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। दवा कंपनी में नौकरी करने वाले एक युवक ने सेल्स का टारगेट पूरा न होने पर तनाव से बचने के लिए एक बार नशे का सहारा लिया, जिसके बाद वह नशे के गर्त में धंसता चला गया। तनाव का शिकार युवा सूखा नशा कर रहे हैं, जबकि अधेड़ शराब की गिरफ्त में हैं। जिला अस्पताल स्थित मानसिक रोग विभाग में प्रतिदिन ऐसे दर्जनों मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जो किसी न किसी कारण से नशे की लत में पड़ गए।
काम पूरा करने का दबाव नशे का बड़ा कारण
जिला अस्पताल मानसिक रोग विभाग के चिकित्सक डॉ.अर्पण जैन का कहना है कि इस युग में आमतौर से सभी लोगों पर काम का बोझ है। इसे एक प्रकार से स्ट्रेस कहते हैं, लेकिन समय सीमा में लक्ष्य आधारित सफलता न मिलने से यह दबाव काफी बढ़ जाता है। जिसे डिस्ट्रेस कहा जाता है। उस स्थिति में आने पर कोई भी व्यक्ति तनाव कम करने के लिए सिगरेट, तंबाकू सहित अन्य सूखा नशे की लत में आ सकता है। यह एक ऐसी अवस्था होती है काफी परिश्रम करने के बावजूद परिणाम अपेक्षाकृत नहीं मिल पाते। कुछ लोग बर्नआउट की स्थिति में भी पहुंच जाते हैं। जिसमें काम के लिए समय तो पूरा दिया जाता है, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। किसी भी व्यक्ति की ऐसी स्थिति को उसके परिवार वाले समझ पाते हैं। ऐसे हालात में पीड़ित व्यक्ति को मनोचिकित्सक से परामर्श दिलाने की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक मरीज ऐसी ही परिस्थिति वाले आते हैं, जिनमें अधिकतर सेल्स और मार्केटिंग कंपनियों में काम करने वाले होते हैं।
बिक्री का टारगेट पूरा नहीं कर पाया तो करने लगा नशा
शहर के एक निजी बैंक के सैल्स एंड मार्केटिंग विभाग में कार्यरत एक युवक नशे का आदि हो गया। डॉ.अर्पण जैन ने बताया कि नई मंडी निवासी एक युवा को उसके अभिभावक परामर्श के लिए उसके पास लेकर पहुंचे। जिसने बताया कि कंपनी की ओर से दुकानों पर पीओएस मशीन सेल्स का टारगेट का दिया गया था, जिसे वह तीन माह तक पूरा नहीं कर पाया। निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा न कर पाने के कारण व अवसाद में आ गया। तनाव कम करने के लिए उसने शुरुआत में सिगरेट और फिर शराब का सेवन शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि एक मेडिकल रेप्रेंजेटिव के साथ भी ऐसा ही हुआ। दवा बिक्री का टारगेट पूरा न कर पाने पर वह सूखा नशा करने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
काम पूरा करने का दबाव नशे का बड़ा कारण
जिला अस्पताल मानसिक रोग विभाग के चिकित्सक डॉ.अर्पण जैन का कहना है कि इस युग में आमतौर से सभी लोगों पर काम का बोझ है। इसे एक प्रकार से स्ट्रेस कहते हैं, लेकिन समय सीमा में लक्ष्य आधारित सफलता न मिलने से यह दबाव काफी बढ़ जाता है। जिसे डिस्ट्रेस कहा जाता है। उस स्थिति में आने पर कोई भी व्यक्ति तनाव कम करने के लिए सिगरेट, तंबाकू सहित अन्य सूखा नशे की लत में आ सकता है। यह एक ऐसी अवस्था होती है काफी परिश्रम करने के बावजूद परिणाम अपेक्षाकृत नहीं मिल पाते। कुछ लोग बर्नआउट की स्थिति में भी पहुंच जाते हैं। जिसमें काम के लिए समय तो पूरा दिया जाता है, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। किसी भी व्यक्ति की ऐसी स्थिति को उसके परिवार वाले समझ पाते हैं। ऐसे हालात में पीड़ित व्यक्ति को मनोचिकित्सक से परामर्श दिलाने की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक मरीज ऐसी ही परिस्थिति वाले आते हैं, जिनमें अधिकतर सेल्स और मार्केटिंग कंपनियों में काम करने वाले होते हैं।
विज्ञापन
बिक्री का टारगेट पूरा नहीं कर पाया तो करने लगा नशा
शहर के एक निजी बैंक के सैल्स एंड मार्केटिंग विभाग में कार्यरत एक युवक नशे का आदि हो गया। डॉ.अर्पण जैन ने बताया कि नई मंडी निवासी एक युवा को उसके अभिभावक परामर्श के लिए उसके पास लेकर पहुंचे। जिसने बताया कि कंपनी की ओर से दुकानों पर पीओएस मशीन सेल्स का टारगेट का दिया गया था, जिसे वह तीन माह तक पूरा नहीं कर पाया। निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा न कर पाने के कारण व अवसाद में आ गया। तनाव कम करने के लिए उसने शुरुआत में सिगरेट और फिर शराब का सेवन शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि एक मेडिकल रेप्रेंजेटिव के साथ भी ऐसा ही हुआ। दवा बिक्री का टारगेट पूरा न कर पाने पर वह सूखा नशा करने लगा।
विज्ञापन