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Muzaffarnagar News: खूंटी पर बैसाखियां टांगने वाली बिटिया के पीछे दौड़े पदक

Thu, 22 Oct 2026 01:20 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 01:20 AM IST
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Medals came chasing after the girl who had hung up her crutches on a peg.
प्रीति पाल, स्रोत परिजन
मुजफ्फरनगर। जापान में प्रीति पाल ने दूसरे दिन चांदी का तमगा जीतकर हासमपुर गांव के किसान अनिल पाल का घर खुशियों से भर दिया। मां बालेश की आंखें भर आई और बहन नेहा बोली कि प्रीति को जीतना ही था। पिता कहते हैं कि इस जीत का यह भरोसा उस दिन हो गया था, जब बेटी अपनी लाचारगी की बैसाखियां खूंटी पर टांगकर खेल के मैदान में उतर गई थी। आगे प्रीति दौड़ने लगी और पेरिस से जापान तक पदक उसके पीछे-पीछे भागते रहे।
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यह कहानी सिर्फ पैरा एशियाई खेलों में दो पदक जीतने की नहीं है। किसान के घर 26 साल पहले जन्मीं बेटी और सिर्फ छह दिन बाद पैरों की समस्या से शुरू होती है। बेटी के पैर सीधे नहीं हुए तो मां-बाप के होश उड़ गए। पैरों पर प्लास्टर चढ़ाया गया।
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बचपन में प्रीति कैलिपर्स (बैसाखी) पहनकर चलती थीं लेकिन अपने दृढ़ संकल्प से उन्होंने इस कमजोरी को पीछे छोड़ दिया। पिता अनिल पाल बताते हैं कि एक आम परिवार की तरह रोजमर्रा में जाने क्या-क्या सुनने को मिला।
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बेटी को दादा के पास मेरठ छोड़ दिया गया। शुरुआती दिन बेहद मुश्किलों भरे थे। बेटी ने खुद खेलों की तरफ रुझान बढ़ाना शुरू किया। मेरठ में रहने के दौरान पैरालंपिक खेलों की वीडियो देखकर प्रीति ने स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया।
पैरालंपिक एथलीट फातिमा खातून ने प्रीति का हौसला बढ़ाया। 2018 में स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहली बार हिस्सेदारी की। 100 मीटर और 200 मीटर स्प्रिंट में एशियाई पैरा खेलों 2022 के लिए क्वालिफाई किया तो जिंदगी का वह बड़ा मोड़ था।
मां कहती हैं कि हर मुसीबत का सामना हौसले से किया जा सकता है। किसी भी स्थिति में हौसला नहीं हारना चाहिए, यह हमने अपने घर में बेटी से सीखा। हम कभी नहीं हारे थे लेकिन कभी-कभी डर लगता था कि बेटी टूट न जाए। बेटी ने टूटी और अब वह चैंपियन है। बड़ी बेटी नेहा पाल की 21 नवंबर को शादी है। प्रीति ने इस खुशी में भी रंग भर दिए हैं।
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पेरिस से जापान तक प्रीति ने बजाया डंका
पैरा एथलीट प्रीति पाल ने पेरिस पैरालंपिक के महिला वर्ग की 200 मीटर टी35 स्पर्धा के फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 30.01 सेकंड में दौड़ पूरी कर कांस्य पदक जीता था। महिलाओं की 100 मीटर टी35 वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी है। अब जापान के पैरालंपिक में पदक जीतकर प्रीति ने खुद को साबित कर दिखाया है।

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यह खिलाड़ी खेलते हैं टी35 वर्ग में
टी35 में वो खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनमें हाइपरटोनिया, अटैक्सिया और एथेटोसिस जैसी समन्वय संबंधी विकार होते हैं। इस वर्ग में खेलने वाली एथलीट प्रीति पाल लखनऊ में खंड विकास अधिकारी है। पिता अनिल कुमार पाल कहते हैं कि प्रीति पाल ने कभी हिम्मत नहीं हारी। बहन नेहा पाल कहती हैं कि उसके हौसले से हमें भी हिम्मत मिली।
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