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उत्कल हादसे की जांच के बाद कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:58 AM IST
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ट्रैक की मरम्मत करते कर्मचारी
- फोटो : amar ujala
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उत्कल रेल हादसे की जांच के बाद कई और बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। सीओ जीआरपी ने भी एक-एक कर 15 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। इस आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फिलहाल मामले में दो अधिकारी निलंबित हैं, जबकि 13 कर्मचारी बर्खास्त चल रहे हैं। हादसे में क्षतिग्रस्त ट्रेन के कारण रेलवे को साढ़े तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
19 अगस्त को खतौली में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन डिरेलमेंट हो गई थी, जिससे ट्रेन के करीब 13 डिब्बे पटरी से उतरे थे। भीषण हादसे में 26 यात्रियों की मृत्यु और 200 से अधिक घायल हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने मुजफ्फरनगर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) इंद्रजीत सिंह और जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार को निलंबित किया था, जबकि 13 कर्मचारी बर्खास्त किए गए हैं।
मामले की जांच सीओ जीआरपी गाजियाबाद रणधीर सिंह कर रहे हैं। इसके साथ ही रेलवे ने भी हादसे की गोपनीय जांच प्रारंभ कर दी है। रेलवे को हादसे में करीब साढ़े तीन करोड़ का फटका लगा है। इसका भी दोबारा से आकलन किया जा रहा है। सीओ जीआरपी ने भी अधिकारियों, कर्मचारियों समेत करीब 15 लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनके आधार पर रिपोर्ट बनाई जा रही है। रेलवे बोर्ड भी मामले की तेजी से जांच करने में लगा है।
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रेलवे स्टेशन प्रशासन के साथ जीआरपी से भी समय-समय पर फीडबैक लिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड हादसे में कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी मानकर चल रहा है। अक्तूबर तक हादसे की जांच पूरी होगी। उसके बाद इस पर स्थिति साफ होने के साथ दोषियों के चेहरे भी सामने आएंगे। स्टेशन अधीक्षक विपिन कुमार त्यागी ने बताया कि उत्कल हादसे की किसी भी जांच में उन्हें शामिल नहीं रखा गया है। हालांकि रेलवे बोर्ड अपनी जांच-पड़ताल कर रहा है। रिपोर्ट दिल्ली रेल मंत्रालय जाएगी, वहीं से कार्रवाई फाइनल होगी।
पटरियां बदलेंगी तो बिगड़ेगा संचालन
मुजफ्फरनगर। रेलवे बोर्ड ने खतौली, सकौती क्षेत्र में पुरानी हो चुकी पटरियों को बदलने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में सिंगल रेलवे लाइन होने के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। लंबी दूरी की ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया जा सकता है। ऐसे में आम यात्रियों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ेगा।
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19 अगस्त को खतौली में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन डिरेलमेंट हो गई थी, जिससे ट्रेन के करीब 13 डिब्बे पटरी से उतरे थे। भीषण हादसे में 26 यात्रियों की मृत्यु और 200 से अधिक घायल हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने मुजफ्फरनगर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) इंद्रजीत सिंह और जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार को निलंबित किया था, जबकि 13 कर्मचारी बर्खास्त किए गए हैं।
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मामले की जांच सीओ जीआरपी गाजियाबाद रणधीर सिंह कर रहे हैं। इसके साथ ही रेलवे ने भी हादसे की गोपनीय जांच प्रारंभ कर दी है। रेलवे को हादसे में करीब साढ़े तीन करोड़ का फटका लगा है। इसका भी दोबारा से आकलन किया जा रहा है। सीओ जीआरपी ने भी अधिकारियों, कर्मचारियों समेत करीब 15 लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनके आधार पर रिपोर्ट बनाई जा रही है। रेलवे बोर्ड भी मामले की तेजी से जांच करने में लगा है।
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रेलवे स्टेशन प्रशासन के साथ जीआरपी से भी समय-समय पर फीडबैक लिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड हादसे में कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी मानकर चल रहा है। अक्तूबर तक हादसे की जांच पूरी होगी। उसके बाद इस पर स्थिति साफ होने के साथ दोषियों के चेहरे भी सामने आएंगे। स्टेशन अधीक्षक विपिन कुमार त्यागी ने बताया कि उत्कल हादसे की किसी भी जांच में उन्हें शामिल नहीं रखा गया है। हालांकि रेलवे बोर्ड अपनी जांच-पड़ताल कर रहा है। रिपोर्ट दिल्ली रेल मंत्रालय जाएगी, वहीं से कार्रवाई फाइनल होगी।
पटरियां बदलेंगी तो बिगड़ेगा संचालन
मुजफ्फरनगर। रेलवे बोर्ड ने खतौली, सकौती क्षेत्र में पुरानी हो चुकी पटरियों को बदलने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में सिंगल रेलवे लाइन होने के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। लंबी दूरी की ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया जा सकता है। ऐसे में आम यात्रियों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ेगा।