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एक थाना, जहां जमीन में दफन है बमों का जखीरा
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:38 AM IST
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विस्फोट के बाद उखड़ा कबाड़ी की दुकान का फर्श।
- फोटो : अमर उजाला
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आपको शायद यकीन न हो, लेकिन अपने जिले में एक थाना ऐसा भी है, जो वर्षों से खुद बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। बात हो रही है हाइवे के मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित मंसूरपुर थाने की। पिछले दशक में खाड़ी देशों से सैन्य कबाड़ मंगाकर यहां औने-पौने दामों में लोहे की फैक्ट्रियों में सप्लाई कर दिया जाता था, जिसे भट्ठियों में गलाकर लोहे की एंगल, सरिया, गार्डर व अन्य उत्पाद तैयार कर लिए जाते थे।
मोटे मुनाफे के चलते जहां कबाड़ी इस धंधे से जुड़े थे, वहीं उनके तार मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित कई लोहा फैक्ट्रियों से भी जुड़े हुए थे। उस समय बड़े पैमाने पर इन फैक्ट्रियों में सैन्य कबाड़ मंगाया गया, जिनमें बड़ी तादाद में निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलें तक शामिल होती थीं।
कई साल तक फैक्ट्री मालिकान का कबाड़िय़ों से साठगांठ के चलते यह धंधा जोर-शोर से चलता रहा, लेकिन उसी दौरान वहलना क्षेत्र स्थित एक लोहा फैक्ट्री की भट्ठी में हुए बम विस्फोट के बाद पुलिस-प्रशासन को इस खेल की जानकारी हुई। इसके बाद अफसरों ने सख्ती दिखाते हुए शासन की मदद से ऐसे सैन्य कबाड़ की सप्लाई पूरी तरह बंद करा दी।
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इसके साथ ही मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा फैक्ट्रियों की जांच भी शुरू करते हुए इस तरह के कबाड़ को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। नतीजा यह निकला कि फैक्ट्री मालिकान ने पूर्व में मंगाए जा चुके निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों से भरे इस कबाड़ को खुर्द-बुर्द करना शुरू कर दिया।
सैन्य कबाड़ को नष्ट करने के लिए फैक्ट्री मालिकान ने इन निष्प्रोज्य बम व मिसाइलों को यहां-वहां नाले, रजवाहे, नदी व नहरों में डालना शुरू कर दिया। इसके बाद कई महीने तक इन स्थानों से निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलें लावारिस मिलनी शुरू हो गई, जो अधिकांशत: मंसूरपुर थाना क्षेत्र में आते थे।
ऐसे में मजबूरीवश ही सही, लेकिन तत्कालीन पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को जब्त करते हुए पहले तो दूरदराज के स्थानों पर जमीन में दफन करना शुरू किया, लेकिन बाद में वहां भी ये कबाड़ जमीन से बाहर आना शुरू हो गया, जिसके चलते पुलिस-प्रशासन ने इन्हें सुरक्षित रखने के नाम पर धीरे-धीरे मंसूरपुर थाने के परिसर में ही जमीन में दफन करना शुरू कर दिया।
इसके बाद बड़े पैमाने पर लावारिस मिलने वाले इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को मंसूरपुर थाने की जमीन में दफन किया गया था। अब आलम यह है कि हाइवे के मंसूरपुर थाना परिसर की जमीन में कई जगह यह बमों का जखीरा दफन है, जिसके चलते शुरूआत में तो पुलिसकर्मी इस थाने में तैनाती लेने से भी बचते नजर आते थे।
हालांकि धीरे-धीरे पुराने पुलिसकर्मियों की यहां से रवानगी होती गई और नए रंगरूट व अफसर आते रहे, जिसके बाद मंसूरपुर थाने की इस बारूदी विरासत पर समय की गर्द चढ़ती चली गई और अब शायद ही किसी को मंसूरपुर थाने की इस सच्चाई का पता हो।
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मोटे मुनाफे के चलते जहां कबाड़ी इस धंधे से जुड़े थे, वहीं उनके तार मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित कई लोहा फैक्ट्रियों से भी जुड़े हुए थे। उस समय बड़े पैमाने पर इन फैक्ट्रियों में सैन्य कबाड़ मंगाया गया, जिनमें बड़ी तादाद में निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलें तक शामिल होती थीं।
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कई साल तक फैक्ट्री मालिकान का कबाड़िय़ों से साठगांठ के चलते यह धंधा जोर-शोर से चलता रहा, लेकिन उसी दौरान वहलना क्षेत्र स्थित एक लोहा फैक्ट्री की भट्ठी में हुए बम विस्फोट के बाद पुलिस-प्रशासन को इस खेल की जानकारी हुई। इसके बाद अफसरों ने सख्ती दिखाते हुए शासन की मदद से ऐसे सैन्य कबाड़ की सप्लाई पूरी तरह बंद करा दी।
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इसके साथ ही मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा फैक्ट्रियों की जांच भी शुरू करते हुए इस तरह के कबाड़ को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। नतीजा यह निकला कि फैक्ट्री मालिकान ने पूर्व में मंगाए जा चुके निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों से भरे इस कबाड़ को खुर्द-बुर्द करना शुरू कर दिया।
सैन्य कबाड़ को नष्ट करने के लिए फैक्ट्री मालिकान ने इन निष्प्रोज्य बम व मिसाइलों को यहां-वहां नाले, रजवाहे, नदी व नहरों में डालना शुरू कर दिया। इसके बाद कई महीने तक इन स्थानों से निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलें लावारिस मिलनी शुरू हो गई, जो अधिकांशत: मंसूरपुर थाना क्षेत्र में आते थे।
ऐसे में मजबूरीवश ही सही, लेकिन तत्कालीन पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को जब्त करते हुए पहले तो दूरदराज के स्थानों पर जमीन में दफन करना शुरू किया, लेकिन बाद में वहां भी ये कबाड़ जमीन से बाहर आना शुरू हो गया, जिसके चलते पुलिस-प्रशासन ने इन्हें सुरक्षित रखने के नाम पर धीरे-धीरे मंसूरपुर थाने के परिसर में ही जमीन में दफन करना शुरू कर दिया।
इसके बाद बड़े पैमाने पर लावारिस मिलने वाले इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को मंसूरपुर थाने की जमीन में दफन किया गया था। अब आलम यह है कि हाइवे के मंसूरपुर थाना परिसर की जमीन में कई जगह यह बमों का जखीरा दफन है, जिसके चलते शुरूआत में तो पुलिसकर्मी इस थाने में तैनाती लेने से भी बचते नजर आते थे।
हालांकि धीरे-धीरे पुराने पुलिसकर्मियों की यहां से रवानगी होती गई और नए रंगरूट व अफसर आते रहे, जिसके बाद मंसूरपुर थाने की इस बारूदी विरासत पर समय की गर्द चढ़ती चली गई और अब शायद ही किसी को मंसूरपुर थाने की इस सच्चाई का पता हो।