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एक बार फिर किसान आंदोलन का गवाह बना जीआईसी का मैदान

Sat, 30 Jan 2021 12:26 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:26 AM IST
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Mahapanchayat was held in GIC grounds in 2002 also
मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत में किसानों का उमड़ा सैलाब। - फोटो : KHATAULI
एक बार फिर किसान आंदोलन का गवाह बना जीआईसी का मैदान
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मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज का मैदान यहां बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है। भाकियू संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पर कचहरी में हुए हमले के बाद पहली बार यहां वर्ष 2002 में बड़ी महापंचायत हुई। इसके बाद पंकज मलिक पर डीडीओ द्वारा मुकदमे दर्ज किए जाने के बाद 2008 में पंचायत हुई।
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पर हाथरस में हुए हमले के बाद 2020 में रालोद ने यहां बड़ी रैली की। अब एक बार फिर भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के साथ हुए घटनाक्रम के बाद महापंचायत हुई। यहां हुई चारों पंचायत में हर बार सरकारों को ललकारने का काम किया गया। जीआईसी के मैदान से 2002 में किसानों ने सरकार को उस समय ललकारा था, जब कलक्ट्रेट में आंदोलन के दौरान किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के सिर में लाठी से चोट लगी थी। तत्कालीन एसएसपी भजनीराम मीणा के खिलाफ किसानों की महापंचायत हुई और सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था।
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वर्ष 2008 में जिला पंचायत सभागार में मनरेगा को लेकर हुई पहली बैठक में तत्कालीन डीडीओ ने विधायक पंकज मलिक पर अभद्र टिप्पणी की थी, जिसके बाद पंकज समर्थकों ने डीडीओ के साथ मारपीट कर दी थी। बाद में पंकज मलिक पर मुकदमे कर दिए गए। बसपा की मायावती सरकार ने मामले ने तूल पकड़ा तो इसी मैदान पर पंचायत हुई, जिसमें चौधरी अजित सिंह और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत रात तक डटे रहे। प्रशासन को यहां बैकफुट पर आना पड़ा। रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पर हाथरस में जब हमला हुआ, तो अक्तूबर 2020 में यह मैदान फिर विरोध रैली का गवाह बना। रालोद ने इसी मैदान को सरकार का विरोध करने के लिए चुना। बृहस्पतिवार की रात जब भाकियू नेता राकेश टिकैत रोये तो भाकियू ने महापंचायत का एलान इसी मैदान पर किया। एक बार फिर किसानों की महापंचायत का गवाह यह मैदान बना। इस महापंचायत में भी भाकियू ने सीधे सरकार को ललकारा है। महापंचायत से किसानों पर आंदोलन खत्म करने का दबाव कम हुआ है। किसान आंदोलन में एक नई जान आई है।
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