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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Life imprisonment for wife's murder; 10-year sentence for the death of the unborn child.

Muzaffarnagar News: पत्नी की हत्या में उम्रकैद, गर्भ में बच्चे की मौत पर 10 साल की सजा

Sat, 08 Aug 2026 12:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:41 AM IST
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Life imprisonment for wife's murder; 10-year sentence for the death of the unborn child.
मुजफ्फरनगर। दो साल पहले आठ महीने की गर्भवती पत्नी की दहेज के लिए हत्या के दोषी पति राशिद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अजन्मे बच्चे की हत्या के लिए दस वर्ष का कठोर कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड मिला। साक्ष्य के अभाव में आरोपी सास-ससुर को बरी कर दिया गया। अपर सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया।
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बागपत के गांव असारा गांव निवासी जहरुदीन ने 20 अप्रैल 2024 को शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वादी ने बताया कि भतीजी शबाना का निकाह 28 मई 2020 को कसेरवा गांव के राशिद से हुआ था। शादी के बाद राशिद मोटरसाइकिल और नकदी की मांग को लेकर शबाना को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा।
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यह प्रताड़ना तब भी जारी रही जब शबाना आठ महीने की गर्भवती थी। 19 अप्रैल 2024 की रात राशिद ने अपनी गर्भवती पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शबाना के शरीर पर सात गंभीर चोटों के निशान मिले। उसके गर्भ में पल रहे आठ माह के शिशु की भी मौत हो गई थी। पुलिस ने पति, सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या में आरोपपत्र दाखिल किया।
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शुक्रवार को अदालत ने दोषी पति राशिद को दहेज हत्या के लिए उसे आजीवन कारावास दिया गया। क्रूरता व प्रताड़ना के लिए तीन वर्ष का कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
हेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं तीन और चार के तहत उसे कुल सात वर्ष का कारावास और बीस हजार रुपये अर्थदंड दिया गया, जो सभी सजाओं के साथ-साथ चलेगा।

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इस आधार पर दोष मुक्त किए गए सास-ससुर
पुलिस ने राशिद के ससुर जाहिद और सास जयबुनी उर्फ जबूननिशा के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान यह सिद्ध हुआ कि वह काफी समय से गाजियाबाद, लोनी और लुधियाना में अलग रह रहे थे। राशिद अपनी पत्नी के साथ हरियाणा के महेंद्रगढ़ में रहता था। न्यायालय ने उन्हें क्रूरता और दहेज की मांग में सीधे लिप्त न पाते हुए संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। मृतका की पांच वर्षीय दिव्यांग बेटी रिमशा अब अपनी दादी के पास रह रही है।

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विसरा रिपोर्ट नहीं...इस आधार पर सजा
शबाना के आठ माह की गर्भवती होने के बावजूद उसके पति राशिद ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की थी। मृतका शबाना के शरीर पर कुल सात चोटें पाई गई हैं। शबाना की मृत्यु का सटीक और निश्चित कारण स्पष्ट न होने के कारण डॉक्टरों ने उसके विसरा को सुरक्षित (प्रिजर्व) रखा था, ताकि रासायनिक जांच की जा सके। अभी तक अभियोजन पक्ष की ओर से वह विसरा रिपोर्ट अदालत की फाइल (पत्रावली) में दाखिल नहीं की गई है। न्यायालय का मानना है कि सात चोटों को देखते हुए शबाना की मौत प्राकृतिक नहीं है। यदि यह सामान्य मौत होती, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि निश्चित रूप से हो जाती। ब्यूरो
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