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फाइलों में भूमि अधिग्रहण का मामला, तीन साल से नहीं बना बिजलीघर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 24 May 2017 12:36 AM IST
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बिजली
- फोटो : amar ujala
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चरथावल के बधाई कलां गांव में प्रस्तावित 220/132 केवी का बिजलीघर जमीन अधिग्रहण का मुद्दा तीन वर्षों से शासन की फाइलों में लटका पड़ा है। ग्राम पंचायत द्वारा उपकेंद्र के निर्माण के लिए मेला मैदान के नाम दर्ज भूमि का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था, लेकिन भूमि की वर्तमान स्थिति को अभिलेखों में परिवर्तित कराने के लिए भेजे प्रस्ताव की पत्रावली राजस्व अनुभाग में मंजूरी की आस लगाए हैं।
वर्ष 2014 में शासन द्वारा गांव बधाई कलां में सर्वे कराने के बाद 220 केवी का बिजलीघर बनाने के लिए हरी झंडी दी थी। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित बिजलीघर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। ग्राम पंचायत ने बिजलीघर बनाने के लिए 54 बीघा भूमि का प्रस्ताव भी कर दिया था, लेकिन शासन ने राजस्व रिकॉर्ड में उक्त जमीन मेला स्थान और ब्रायलर्स कुक्कड़ कॉम्पलेक्स के नाम से अंकित होने के कारण अड़ंगा लगा दिया था।
शासन ने भूमि अधिग्रहण के मामले को कैबिनेट में रखने से पहले वर्तमान स्थिति में बदलाव कराने के लिए जिलाधिकारी को लिखा था। इस प्रक्रिया के बाद भूमि ग्राम पंचायत द्वारा 90 साल के उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन वितरण के नाम एक रुपया हेक्टेयर के नाम से सांकेतिक दर पर पट्टे पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
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ग्रामीणों के प्रयास से कई बार जिले से प्रस्ताव बनवाकर शासन को भेजा जा चुका है। निवर्तमान डीएम दिनेश कुमार सिंह ने गत तीन मार्च को नया प्रस्ताव बनाकर लखनऊ भेजा था। ग्रामीण जिले सिंह, पूर्व प्रधान विजयपाल सिंह, धूम सिंह, नितिन मलिक और भोपाल सिंह बताते हैं कि उनकी याद में गांव में प्रस्तावित भूमि पर कभी कोई मेला अथवा मुर्गी पालन का कार्य नहीं किया गया।
गांव में नए बिजलीघर की सौगात से जिले के पुरकाजी, रुड़की चुंगी, बघरा और सहारनपुर के देवबंद को जोड़ने की योजना है। ट्रांसमिशन के एक्सईएन नीरज गोयल ने बताया कि बधाई में प्रस्तावित बिजलीघर के लिए प्रक्रिया चल रही है। नए बिजलीघर के निर्माण से क्षेत्र में तरक्की के नए आयाम स्थापित होंगे और लोगों को नए कनेक्शन लेने में सुलभता होगी। साथ ही औद्योगिक विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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वर्ष 2014 में शासन द्वारा गांव बधाई कलां में सर्वे कराने के बाद 220 केवी का बिजलीघर बनाने के लिए हरी झंडी दी थी। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित बिजलीघर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। ग्राम पंचायत ने बिजलीघर बनाने के लिए 54 बीघा भूमि का प्रस्ताव भी कर दिया था, लेकिन शासन ने राजस्व रिकॉर्ड में उक्त जमीन मेला स्थान और ब्रायलर्स कुक्कड़ कॉम्पलेक्स के नाम से अंकित होने के कारण अड़ंगा लगा दिया था।
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शासन ने भूमि अधिग्रहण के मामले को कैबिनेट में रखने से पहले वर्तमान स्थिति में बदलाव कराने के लिए जिलाधिकारी को लिखा था। इस प्रक्रिया के बाद भूमि ग्राम पंचायत द्वारा 90 साल के उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन वितरण के नाम एक रुपया हेक्टेयर के नाम से सांकेतिक दर पर पट्टे पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
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ग्रामीणों के प्रयास से कई बार जिले से प्रस्ताव बनवाकर शासन को भेजा जा चुका है। निवर्तमान डीएम दिनेश कुमार सिंह ने गत तीन मार्च को नया प्रस्ताव बनाकर लखनऊ भेजा था। ग्रामीण जिले सिंह, पूर्व प्रधान विजयपाल सिंह, धूम सिंह, नितिन मलिक और भोपाल सिंह बताते हैं कि उनकी याद में गांव में प्रस्तावित भूमि पर कभी कोई मेला अथवा मुर्गी पालन का कार्य नहीं किया गया।
गांव में नए बिजलीघर की सौगात से जिले के पुरकाजी, रुड़की चुंगी, बघरा और सहारनपुर के देवबंद को जोड़ने की योजना है। ट्रांसमिशन के एक्सईएन नीरज गोयल ने बताया कि बधाई में प्रस्तावित बिजलीघर के लिए प्रक्रिया चल रही है। नए बिजलीघर के निर्माण से क्षेत्र में तरक्की के नए आयाम स्थापित होंगे और लोगों को नए कनेक्शन लेने में सुलभता होगी। साथ ही औद्योगिक विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।