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मध्यप्रदेश के भिंड जिले का था रामप्रकाश, परिजन बोले -भाई तो मिला नहीं, अब अस्थियां ही लेकर जाएंगे 

Mon, 28 Aug 2017 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 28 Aug 2017 12:41 AM IST
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Khatauli rail accident - eight
ट्रैक का निरीक्षण करते चीफ इंजीनियर। - फोटो : अमर उजाला
खतौली के कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में मारे गए व्यक्ति की पहचान हो गई है। वह मध्य प्रदेश के भिंड जिले का निवासी था। जीआरपी उसके शव का पहले ही अज्ञात में अंतिम संस्कार कर चुकी है। रविवार को मृतक का भाई और भतीजा उसकी तलाश करते हुए खतौली पहुंचे। खतौली चौकी पर रखा मृतक का बैग परिवारीजनों ने पहचान लिया। बाद में जीआरपी थाने में मृतक के कपड़े देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगे। परिजन अब उसकी अस्थियां लेने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।  
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मध्यप्रदेश के जिला भिंड की तहसील गोहद के गांव कनीपुरा निवासी गंगा सिंह और उसका भतीजा बनवारी उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे की जानकारी होने पर नौ दिन बाद खतौली रेलवे स्टेशन पर जीआरपी चौकी पहुंचे। भाई गंगा सिंह ने जीआरपी चौकी पर सिपाहियों को बताया कि उसका भाई 50 वर्षीय अमर सिंह उर्फ रामप्रकाश दास साधु बन गया था। 18 अगस्त को रामप्रकाश दास ग्वालियर से उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में हरिद्वार में सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने जाने के लिए बैठा था। भाई ने बताया कि उनको उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का पता चला तो वे रामप्रकाश दास की तलाश में खतौली पहुंचे।
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सिपाहियों ने चौकी में रखे यात्रियों के बैग दिखाए। चाचा-भतीजे ने उस बैग को पहचान लिया, जिस बैग को लेकर रामप्रकाश दास चला था। इसके बाद दोनों जीआरपी थाना मुजफ्फरनगर पहुंचे। बनवारी ने बताया कि जीआरपी थाने में कपड़ों से रामप्रकाश दास की पहचान कर ली है। बताते चलें कि जीआरपी ने हादसे के 72 घंटे बाद रामप्रकाश दास के शव का एक ट्रस्ट के सहयोग से अंतिम संस्कार कर दिया था। जीआरपी ने बताया था कि मृतक के हाथ पर रामदास गुदा हुआ था। चाचा-भतीजे ने बताया कि उन्हें अभी तक रामप्रकाश दास की अस्थियां नहीं मिली हैं। कागजी कार्रवाई पूरी कर अस्थियां लेकर घर जाएंगे। 
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चीफ इंजीनियर ने रेलवे ट्रैक का किया निरीक्षण      
ट्रेन हादसे के बाद बनाए नए रेलवे ट्रैक का चीफ इंजीनियर पंकज श्रीवास्तव ने गांव जड़ौदा से लेकर सकौती तक ट्रॉली में बैठकर निरीक्षण किया। उन्होंने नए ट्रैक पर कुछ देर के लिए रुककर ट्रैक मैनों को स्लीपर बदलने के साथ साथ आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। रविवार को भी स्लीपर बदलने का कार्य बदस्तूर जारी रहा। जगत कॉलोनी के सामने 19 अगस्त को हुए ट्रेन हादसे में पूरा रेलवे ट्रैक उखड़ गया था। रेलवे अधिकारियों और इंजीनियरों ने ट्रैक मैनों से नया रेलवे ट्रैक बनवाया था। अभी तक यह रेलवे ट्रैक पूरी तरह से मजबूत नहीं हुआ है।


रविवार को चीफ ट्रैक इंजीनियर पंकज श्रीवास्तव ने रेलवे ट्रैक अधिकारियों व अन्य इंजीनियरों को साथ लेकर ट्रॉली से गांव जड़ौदा से लेकर सकौती तक के रेलवे ट्रैक का निरीक्षण किया। निरीक्षण करते हुए दुर्घटनास्थल पर पहुंचे चीफ ट्रैक इंजीनियर ने नए रेलवे ट्रैक का निरीक्षण कर ट्रैक मैनों को शीघ्र सभी स्लीपर बदलने के दिशा निर्देश भी दिए। रविवार को भी ट्रैक मैन कॉसन लेकर नए ट्रैक को मजबूत करने के लिए दिनभर स्लीपर बदलने में जुटे रहे। इस नए ट्रैक से अभी भी सभी ट्रेनों को दस किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धीमी गति से निकलवाया जा रहा है। 
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