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अलविदा-2020---- कोरोना संक्रमण के बीच भी अपराध से जूझती रही खाकी
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कोरोना काल के बीच भी अपराध से जूझती रही खाकी
मुजफ्फरनगर। जनपद में वर्ष 2020 पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। वर्ष की शुरूआत से ही बदमाश लगातार अपराधों को अंजाम देते रहे। यहां तक कि लॉकडाउन में भी जनपद में हत्याओं का सिलसिला नहीं रुका। पांच माह की इस अवधि में ही मामूली बातों को लेकर नौ लोगों की हत्याएं कर दी गईं। इनमें कहीं कहासुनी का विवाद रहा तो कहीं महज कुत्ता घुमाने को लेकर ही जान ले ली गई। इनके अलावा, लूट-चोरी व अपहरण के मामलों में भी वर्ष भर किसी तरह की कमी नहीं आई। जनपद पुलिस के लिए राहत यही रही कि साल का अंत होते-होते इनमें से अधिकांश मामले सुलझा लिए गए हैं।
वे वारदात, जिन्होंने कराई पुलिस की फजीहत
मुजफ्फरनगर। इस वर्ष 17 सितंबर को मोरना में हुई दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की दुस्साहसिक हत्या और उसके परिवार द्वारा किए गए पलायन की वारदात ने जनपद पुलिस की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि बाद में पुलिस ने वारदात में शामिल तीन आरोपियों को धरदबोचा, जबकि एक अन्य हरियाणा में पकड़ा गया। वहीं, शहर के शांतिनगर में हुई दो युवकों की हत्या ने भी पुलिस को उलझाकर रख दिया था। इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया।
जिले में 1,316 लोगों पर है एक पुलिसकर्मी
मुजफ्फरनगर। जनपद में सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक 1,316 लोगों की आबादी पर एक पुलिसकर्मी तैनात है। जिले की करीब 30 लाख की आबादी के सापेक्ष यहां अफसरों सहित कुल 2,281 पुलिसकर्मी हैं। इनमें एक एसएसपी, तीन एसपी, आठ सीओ, 59 इंस्पेक्टर, 363 दरोगा, 20 महिला दरोगा, 291 हेड कांस्टेबल, 14 महिला हेड कांस्टेबल, 1,283 कांस्टेबल और 349 महिला कांस्टेबल तैनात हैं।
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बेखौफ रहे अपराधी
मुजफ्फरनगर। जनपद में एक वर्ष की अवधि में हत्या, लूट, चोरी, अपहरण व मारपीट के 4,941 मुकदमे दर्ज किए हैं। इनमें 11,118 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। एक वर्ष की अवधि में पुलिस के साथ अपराधियों की कुल 298 मुठभेड़ हुईं हैं, जिनमें 511 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 117 अपराधी पुलिस की गोलियों से घायल भी हुए। वहीं, पेशेवर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 103 मुकदमों में शामिल 410 अपराधियों को गैंगस्टर एक्ट और 534 अपराधियों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया है। 140 अपराधियों की इस अवधि में हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है। पुलिस ने 13 नए गैंग भी पंजीकृत किए।
साइबर क्राइम से संबंधित 28 केस अनसुलझे
मुजफ्फरनगर। जनपद में एक वर्ष की अवधि में साइबर क्राइम के कुल 152 केस दर्ज किए गए। इनमें अधिकांश लोगों के बैंक खातों से रुपये उड़ाने या ऑनलाइन ट्रांसफर कराने से संबंधित रहे। जनपद में अलग से गठित साइबर सेल ने इनमें से 124 केस सुलझाने में कामयाबी हासिल की। साइबर क्राइम के चार बड़े केस का भी पुलिस ने खुलासा किया। इनमें सिम स्वैपिंग कर एक करोड़ का ट्रांजक्शन करने वाले गिरोह का खुलासा और बैंक खातों से ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर करने वाले तीन गिरोह का भी भंडाफोड़ किया गया।
वर्ष भर चर्चाओं में रहा ‘जीरो ड्रग्स अभियान’
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस द्वारा शुरू किया गया ‘जीरो ड्रग्स अभियान’ पूरे वर्ष चर्चाओं में रहा। साल के शुरूआती दौर में ही पुलिस ने अवैध शराब के धंधे में लगे राष्ट्रीय स्तर के गिरोह का खुलासा किया। इनसे करीब एक करोड़ के रेपर, लाखों होलोग्राम, 30 लाख से अधिक ढक्कन शामिल थे। एक वर्ष में जिले में दस लाख कीमत की नकली शराब भी बरामद की गई तो 20 हजार लीटर कच्ची शराब भी पकड़कर नष्ट की गई। वहीं, 25,561 किलो चरस, 1,177 किलो गांजा, 470 किलो डोडा, दो किलो स्मैक और 4.55 किलो अफीम भी बरामद की गई।
चार अपराधियों की 29 करोड़ की संपत्ति हुई कुर्क
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस ने इस वर्ष चार अपराधियों की 29 करोड़ से अधिक की संपत्ति भी कुर्क की। इनमें शिक्षा माफिया इमलाख खान भी शामिल है। वहीं, कुख्यात बदमाश भूपेंद्र बाफर की दो करोड़ से अधिक की मेरठ स्थित संपत्ति को कुर्क करने संबंधी नोटिस भी चस्पा किया गया है।
नकली फूड सप्लीमेंट गिरोह का भंडाफोड़
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस ने इस वर्ष युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले राष्ट्रीय स्तर के नकली फूड सप्लीमेंट के दो गिरोह का भंडाफोड़ किया। ये आरोपी युवाओं को न केवल पशुओं के स्टेरॉयड मिश्रित इंजेक्शन लगा रहे थे, वहीं सस्ते व बेहद हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल कर बनाए गए नकली फूड सप्लीमेंट बेचकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे।
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मुजफ्फरनगर। जनपद में वर्ष 2020 पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। वर्ष की शुरूआत से ही बदमाश लगातार अपराधों को अंजाम देते रहे। यहां तक कि लॉकडाउन में भी जनपद में हत्याओं का सिलसिला नहीं रुका। पांच माह की इस अवधि में ही मामूली बातों को लेकर नौ लोगों की हत्याएं कर दी गईं। इनमें कहीं कहासुनी का विवाद रहा तो कहीं महज कुत्ता घुमाने को लेकर ही जान ले ली गई। इनके अलावा, लूट-चोरी व अपहरण के मामलों में भी वर्ष भर किसी तरह की कमी नहीं आई। जनपद पुलिस के लिए राहत यही रही कि साल का अंत होते-होते इनमें से अधिकांश मामले सुलझा लिए गए हैं।
वे वारदात, जिन्होंने कराई पुलिस की फजीहत
मुजफ्फरनगर। इस वर्ष 17 सितंबर को मोरना में हुई दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की दुस्साहसिक हत्या और उसके परिवार द्वारा किए गए पलायन की वारदात ने जनपद पुलिस की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि बाद में पुलिस ने वारदात में शामिल तीन आरोपियों को धरदबोचा, जबकि एक अन्य हरियाणा में पकड़ा गया। वहीं, शहर के शांतिनगर में हुई दो युवकों की हत्या ने भी पुलिस को उलझाकर रख दिया था। इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया।
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जिले में 1,316 लोगों पर है एक पुलिसकर्मी
मुजफ्फरनगर। जनपद में सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक 1,316 लोगों की आबादी पर एक पुलिसकर्मी तैनात है। जिले की करीब 30 लाख की आबादी के सापेक्ष यहां अफसरों सहित कुल 2,281 पुलिसकर्मी हैं। इनमें एक एसएसपी, तीन एसपी, आठ सीओ, 59 इंस्पेक्टर, 363 दरोगा, 20 महिला दरोगा, 291 हेड कांस्टेबल, 14 महिला हेड कांस्टेबल, 1,283 कांस्टेबल और 349 महिला कांस्टेबल तैनात हैं।
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बेखौफ रहे अपराधी
मुजफ्फरनगर। जनपद में एक वर्ष की अवधि में हत्या, लूट, चोरी, अपहरण व मारपीट के 4,941 मुकदमे दर्ज किए हैं। इनमें 11,118 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। एक वर्ष की अवधि में पुलिस के साथ अपराधियों की कुल 298 मुठभेड़ हुईं हैं, जिनमें 511 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 117 अपराधी पुलिस की गोलियों से घायल भी हुए। वहीं, पेशेवर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 103 मुकदमों में शामिल 410 अपराधियों को गैंगस्टर एक्ट और 534 अपराधियों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया है। 140 अपराधियों की इस अवधि में हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है। पुलिस ने 13 नए गैंग भी पंजीकृत किए।
साइबर क्राइम से संबंधित 28 केस अनसुलझे
मुजफ्फरनगर। जनपद में एक वर्ष की अवधि में साइबर क्राइम के कुल 152 केस दर्ज किए गए। इनमें अधिकांश लोगों के बैंक खातों से रुपये उड़ाने या ऑनलाइन ट्रांसफर कराने से संबंधित रहे। जनपद में अलग से गठित साइबर सेल ने इनमें से 124 केस सुलझाने में कामयाबी हासिल की। साइबर क्राइम के चार बड़े केस का भी पुलिस ने खुलासा किया। इनमें सिम स्वैपिंग कर एक करोड़ का ट्रांजक्शन करने वाले गिरोह का खुलासा और बैंक खातों से ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर करने वाले तीन गिरोह का भी भंडाफोड़ किया गया।
वर्ष भर चर्चाओं में रहा ‘जीरो ड्रग्स अभियान’
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस द्वारा शुरू किया गया ‘जीरो ड्रग्स अभियान’ पूरे वर्ष चर्चाओं में रहा। साल के शुरूआती दौर में ही पुलिस ने अवैध शराब के धंधे में लगे राष्ट्रीय स्तर के गिरोह का खुलासा किया। इनसे करीब एक करोड़ के रेपर, लाखों होलोग्राम, 30 लाख से अधिक ढक्कन शामिल थे। एक वर्ष में जिले में दस लाख कीमत की नकली शराब भी बरामद की गई तो 20 हजार लीटर कच्ची शराब भी पकड़कर नष्ट की गई। वहीं, 25,561 किलो चरस, 1,177 किलो गांजा, 470 किलो डोडा, दो किलो स्मैक और 4.55 किलो अफीम भी बरामद की गई।
चार अपराधियों की 29 करोड़ की संपत्ति हुई कुर्क
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस ने इस वर्ष चार अपराधियों की 29 करोड़ से अधिक की संपत्ति भी कुर्क की। इनमें शिक्षा माफिया इमलाख खान भी शामिल है। वहीं, कुख्यात बदमाश भूपेंद्र बाफर की दो करोड़ से अधिक की मेरठ स्थित संपत्ति को कुर्क करने संबंधी नोटिस भी चस्पा किया गया है।
नकली फूड सप्लीमेंट गिरोह का भंडाफोड़
मुजफ्फरनगर। जनपद पुलिस ने इस वर्ष युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले राष्ट्रीय स्तर के नकली फूड सप्लीमेंट के दो गिरोह का भंडाफोड़ किया। ये आरोपी युवाओं को न केवल पशुओं के स्टेरॉयड मिश्रित इंजेक्शन लगा रहे थे, वहीं सस्ते व बेहद हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल कर बनाए गए नकली फूड सप्लीमेंट बेचकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे।
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