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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Kanwar Yatra order: Both Muslim and Hindu owners ask staff to quit, small dhabas fear hit to income

UP Nameplate Controversy: नाम ने छीना काम... हिंदू-मुस्लिम मालिकों ने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा

Sun, 21 Jul 2024 12:28 PM IST
विजय पुंडीर पीटीआई, मुजफ्फरनगर
पीटीआई, मुजफ्फरनगर Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 21 Jul 2024 12:28 PM IST
सार

सरकार के आदेश ने न केवल मुस्लिम मालिकों और उनके कर्मचारियों की कमाई पर असर डाला है, बल्कि हिंदू मालिकों के भोजनालयों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों पर भी असर डाला है। 

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Kanwar Yatra order: Both Muslim and Hindu owners ask staff to quit, small dhabas fear hit to income
Muzaffarnagar Nameplate Controversy - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांवड़ मार्गों की खाने-पीने की दुकान पर संचालकों का नाम और पहचान अनिवार्य कर दिए जाने से दुकानदारों में बेचैनी बढ़ गई है। सरकार के फैसले के साथ ही मुजफ्फरनगर में कांवड़ मार्ग की दुकानों पर दुकानदारों ने अपने नाम वाले फ्लैक्स लगा रहे हैं। ढाबों से मुस्लिम कर्मचारी भी कांवड़ यात्रा तक के लिए हटाए जा रहे हैं। कई जगह स्वेच्छा से ही कर्मचारियों ने आने से इन्कार कर दिया है। 

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पिछले सात वर्षों से एक दिहाड़ी मजदूर ब्रिजेश पाल श्रावण के दो महीनों के दौरान मुजफ्फरनगर के खतौली इलाके में एक सड़क किनारे ढाबे पर काम करता था ताकि अपने मुस्लिम मालिक को ग्राहकों, मुख्य रूप से कांवड़ियों की भारी भीड़ को प्रबंधित करने में मदद मिल सके। इस काम के लिए उन्हें 400-600 रुपये और हर दिन कम से कम दो वक्त का खाना मिलता था।
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हालांकि, इस साल उनके मालिक मोहम्मद अरसलान ने उन्हें अन्य नौकरी की तलाश करने के लिए कहा है। क्योंकि वह अतिरिक्त कर्मचारियों को काम पर रखने में सक्षम नहीं थे। उन्हें लग रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा होटल रेस्तरां, भोजनालय के मालिकों को दिए गए आदेशों के कारण उनकी कमाई पर असर पड़ेगा।

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पाल ने पीटीआई-भाषा को बताया, 'यह आय का एक अच्छा स्रोत था क्योंकि इस मौसम में अन्य नौकरियां ढूंढना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि मानसून के मौसम में निर्माण और कृषि कार्य ज्यादा नहीं होते हैं, जहां मुझे एक मजदूर के रूप में नौकरी मिल सके। मैंने एक सप्ताह पहले ही ढाबे पर काम करना शुरू किया था, लेकिन अब मालिक ने मुझे कहीं और काम तलाशने के लिए कहा है।'

छोटे फल विक्रेताओं और ढाबों को डर है कि सरकार के इस कदम से उनकी कमाई बुरी तरह प्रभावित होगी। ढाबे के मालिक अरसलान ने कहा कि उन्हें डर है कि उनके मुस्लिम नाम के कारण कांवड़िए उनके यहां खाना नहीं खाएंगे। इस मार्ग पर हर तीसरे ढाबे की तरह, मेरे ढाबे का नाम बाबा का ढाबा है। मेरे आधे से अधिक कर्मचारी हिंदू हैं। हम यहां केवल शाकाहारी भोजन परोसते हैं और श्रावण (मानसून) के दौरान लहसुन और प्याज का उपयोग करने से भी बचते हैं।

सरकार के आदेश ने न केवल मुस्लिम मालिकों और उनके कर्मचारियों की कमाई पर असर डाला है, बल्कि हिंदू मालिकों के भोजनालयों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों पर भी असर डाला है। 

खतौली में मुख्य बाजार के ठीक बाहर सड़क किनारे भोजनालय के मालिक अनिमेष त्यागी ने कहा, 'एक मुस्लिम व्यक्ति मेरे रेस्तरां में तंदूर पर काम करता था। लेकिन इस मुद्दे के कारण, मैंने उसे जाने के लिए कहा। क्योंकि लोग इसे मुद्दा बना सकते हैं। हम यहां ऐसी परेशानी नहीं चाहते हैं। इस बार तंदूर पर काम करने के लिए एक हिंदू व्यक्ति को बुलाया है।

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