International Yoga Day: योगपथ पर छा गए म्हारे योग गुरु, चीन से हरिद्वार तक सिखा रहे योग
आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के सैकड़ों युवा योग के जरिए अपनी प्रतिभा का डंका पूरी दुनिया में बजा रहे हैं। ये योग नगरी हरिद्वार से लेकर चीन व अमेरिका तक लोगों को योग सिखाकर उन्हें निरोगी बना रहे हैं।
विस्तार
योग में जिले के युवा अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। गांव, गली से लेकर देश और विदेशों में युवाओं ने अपनी छाप छोड़ी है। कोरोना संक्रमण जैसी मुश्किलें भी राह नहीं रोक पाई। चीन में जिले के युवाओं की संख्या कोरोना संक्रमण के बाद भले ही कम हुई हो, लेकिन अब भी वर्चुअल तरीके से देश-विदेश में योग कक्षाएं जारी हैं। उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न शहरों में जिले के योग गुरु योग सिखा रहे हैं।
चीन से हरिद्वार तक योग सिखा रहे विपिन
गांव सिकंदरपुर निवासी विपिन गोलियान हरिद्वार में दिव्य योग केंद्र नामक प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं। यहां देश-विदेशी लोग उनसे योग क्रियाएं सीख रहे हैं। कोरोना काल से पहले विपिन चीन में योग सिखाते थे, लेकिन अब देश में ही योग का प्रचार कर रहे हैं।
योग में नाम ऊंचा कर रहे भाई-बहन
कस्बबा भोकरहेड़ी निवासी भाई बहन अक्षय और अक्षिता सहरावत ने पतंजलि यूनिवर्सिटी से योग में डिग्री हासिल की। अब दोनों नोएडा में ऑनलाइन देश-विदेश के लोगों को योग क्रियाएं सिखा रहे हैं। दोनों योग में जिले का नाम ऊंचा कर रहे हैं।
कई देशों में ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे शिवम
शाहपुर के गांव काकड़ा के अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट योगाचार्य शिवम गोस्वामी ऋषिकेश में लक्ष्य एकेडमी चला रहे हैं। योगाचार्य ने बताया कि उनके यहां प्रशिक्षण लेने वाले बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। आधा दर्जन देशों के लोग उनसे ऑनलाइन प्रशिक्षण ले रहे हैं। लक्ष्य योग फाउंडेशन की स्थापना की, जिसके जरिए योग का प्रचार कर रहे है। योग साधना से कम नहीं है।
कवाल में योग सिखा रहे है विजय कुमार
जानसठ निवासी योग प्रशिक्षक विजय कुमार गांव कवाल स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में ग्रामीणों को योग क्रियाएं सिखा रहे हैं। हरिद्वार के संस्कृत विश्वविद्यालय से योग में पीएचडी भी कर रहे हैं।
आशीष ने योग को बनाया जीवन
भोकरहेड़ी के आशीष सहरावत ने लक्ष्मी बाई इंस्टीट्यूट फिजीकल एजुकेशन ग्वालियर से शिक्षा प्राप्त की। मेरठ विवि से साइंस योगा कर रहे हैं। किसान मिंटू चौधरी के पुत्र आशीष ने भी विदेशों में योग क्रियाएं सिखाने का संकल्प लिया है। हाल में वहग्वालियर में सैकड़ों साधकों को योग सिखा रहे हैं।
विभिन्न गांवों की बेटियां योग में भी किसी से कम नहीं है। सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बेटियों ने योग में नाम ऊंचा किया है। भोकरहेड़ी की बेटियों ने योग में महारत हासिल की है।
गांव सिकंदरपुर निवासी पूजा राठी ने चीन, फ्रांस और इटली में योग सिखाया है। वह वर्तमान में नेशनल योगा स्पोर्ट्स फाउंडेशन में टेक्निकल डायरेक्टर (वेस्ट यूपी) के साथ काम कर रही है। साथ ही नेशनल योगा में जज और नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी है।
उनकी पांच वर्षीय बेटी दिव्यांशी ने पतंजलि यूनिवर्सिटी में आयोजित की गई अंडर-10 उत्तराखंड राज्य स्तरीय योग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
भोकरहेड़ी की तानिया नेशनल स्तर पर प्रतिभाग कर चुकी है। भोकरहेड़ी की ही सोनम और परिवार की दो बहनें शालिनी और अंजलि देशवाल भी योग में मुकाम हासिल किया है। बसेड़ा की शिवानी योग में डिग्री हासिल कर बंगलुरु में योग सिखा रही है। सिकंदरपुर विद्यालय की शिक्षिका पंखुरी भी प्रतिदिन योग करती है।
किसान की बेटी बन गई योगाचार्य
शुकतीर्थ निवासी मानवी चौधरी ने योग को अपने जीवन का आधार बना लिया है। दिल्ली, नोएडा, ऋषिकेश, मेरठ और मुजफ्फरनगर में भी मानवी चौधरी ने अनेकों प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए हैं। किसान सुरेंद्र चौधरी से बेटी को योग की प्रेरणा मिली।