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कार्यशाला में दी गई अहम जानकारी
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श्रीराम कालेज में आयोजित कार्यशाला में मौजूद विद्यार्थी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
कार्यशाला में दी गई अहम जानकारी
मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मशीन लर्निंग विषय पर एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला का आयोजन हुआ। आइटेनिक टेक्नोलॉजी के तकनीकी विशेषज्ञ मुदित शर्मा और नितिन उपाध्याय ने विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग के विभिन्न तकनीकी गुर बताए।
कार्यशाला में तकनीकी विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को बताया कि मशीन लर्निंग एक एल्गॉरिथ्म है, जो कि सॉफ्टवेयर को सही रूप से चलाने में मदद करती है। मशीन लर्निंग का सामान्य काम यह है कि वह ऐसी एल्गॉरिथ्म बनाए, जिससे वो इनपुट डाटा को लेकर सांख्यिकी मूल्यांकन कर सके, ताकि आउटपुट में आने वाला डाटा बता सके और नए डाटा को भी अपडेट कर सके। नागरिक मशीन लर्निंग से परिचित हैं। क्योंकि लोग इंटरनेट से ऑनलाइन शॉपिग करते है और जो विज्ञापन चलते हैं वो भी मशीन लर्निंग का ही परिणाम है। ऑनलाइन डिलीवरी में भी कुछ सर्च इंजन होते हैं जो मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हैं। संस्था चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों का तकनीकी ज्ञान विकसित होता है तथा उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग मुख्य रूप से एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मशीनें मानव दिमाग की तरह चीजों को सीखती है और इस प्रक्रिया में उन्हें किसी मानव की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती। पवन गोयल ने कहा कि मशीन लर्निंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और किसी भी तरह के धोखे को पकड़ने, थ्रेट डिटेशन और नेटवर्क सिक्योरिटी आदि कार्यों में भी इस तरह की टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। कार्यक्रम में साक्षी श्रीवास्तव, रुचि रॉय, अंकुर रोहिला, प्रीयम त्यागी, देवेश मलिक, आदित्य सैनी, अनुज कुमार आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मशीन लर्निंग विषय पर एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला का आयोजन हुआ। आइटेनिक टेक्नोलॉजी के तकनीकी विशेषज्ञ मुदित शर्मा और नितिन उपाध्याय ने विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग के विभिन्न तकनीकी गुर बताए।
कार्यशाला में तकनीकी विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को बताया कि मशीन लर्निंग एक एल्गॉरिथ्म है, जो कि सॉफ्टवेयर को सही रूप से चलाने में मदद करती है। मशीन लर्निंग का सामान्य काम यह है कि वह ऐसी एल्गॉरिथ्म बनाए, जिससे वो इनपुट डाटा को लेकर सांख्यिकी मूल्यांकन कर सके, ताकि आउटपुट में आने वाला डाटा बता सके और नए डाटा को भी अपडेट कर सके। नागरिक मशीन लर्निंग से परिचित हैं। क्योंकि लोग इंटरनेट से ऑनलाइन शॉपिग करते है और जो विज्ञापन चलते हैं वो भी मशीन लर्निंग का ही परिणाम है। ऑनलाइन डिलीवरी में भी कुछ सर्च इंजन होते हैं जो मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हैं। संस्था चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों का तकनीकी ज्ञान विकसित होता है तथा उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग मुख्य रूप से एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मशीनें मानव दिमाग की तरह चीजों को सीखती है और इस प्रक्रिया में उन्हें किसी मानव की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती। पवन गोयल ने कहा कि मशीन लर्निंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और किसी भी तरह के धोखे को पकड़ने, थ्रेट डिटेशन और नेटवर्क सिक्योरिटी आदि कार्यों में भी इस तरह की टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। कार्यक्रम में साक्षी श्रीवास्तव, रुचि रॉय, अंकुर रोहिला, प्रीयम त्यागी, देवेश मलिक, आदित्य सैनी, अनुज कुमार आदि मौजूद रहे।
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