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Muzaffarnagar News: बचपन में सवार हुए तो फिर हमसफर बन गई साइकिल
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प्रेम सागर
भोपा। भोपा डाकघर मे डाकिया के पद पर तैनात थाना सिखेड़ा के गांव भंडूर निवासी सोमपाल सिंह की उम्र लगभग 61 साल है। वह साइकिल को अपनी सारथी मानते हैं। उन्हें बचपन से ही साइकिल चलाने का शौक हैं।
सोमपाल सिंह बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 8 अपने गांव के स्कूल से पास की और कक्षा 9 में उन्होंने मुजफ्फरनगर के गवर्नमेंट कॉलेज में अपना दाखिला करा लिया था। वह अपने गांव से मुजफ्फरनगर कॉलेज तक प्रतिदिन साइकिल से आना-जाना करते थे। उसके बाद उन्हें भोपा डाकघर में डाकिया के रूप में तैनाती मिल गई। यहां भी उसी समय से वह साइकिल पर आते जाते हैं।
गांव से भोपा और इस बीच में डाक वितरण करने के कार्य सहित वह प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक साइकिल का सफर तय करते हैं। उनका कहना है कि बचपन से लेकर स्कूल तक और स्कूल से लेकर नौकरी के अंतिम पड़ाव तक साइकिल उनका खूब साथ दे रही है।
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70 साल की उम्र में भी साइकिल से दौड़ रहे यशपाल
भोपा। भोपा खादर क्षेत्र के गांव मजलिसपुर तौफीर निवासी 70 वर्षीय किसान यशपाल भगत का कहना है कि साइकिल उनका ऐसा साथी है जो बचपन से लेकर आज तक साथ निभा रही है। उनका कहना है कि उनका गांव उत्तर प्रदेश की सीमा का गांव है। पढ़ते समय वह लगभग 50 किमी का सफर तय कर शिक्षा ग्रहण करने के लिए भोपा के जनता इंटर कालेज में आते जाते थे।
इतना ही नहीं उत्तराखंड की डोईवाला स्थित शुगर मिल में भी बड़ा सफर तय कर उन्होंने साइकिल के माध्यम से मजदूरी कार्य किया। घर में सब तरह के वाहन होने के बावजूद भी वह साइकिल के ही दीवाने हैं। उनका यह भी कहना है कि सड़क पर हो रही दुर्घटनाओं के चलते साइकिल की सवारी को महत्व देते हैं। बेहतर स्वास्थ्य का राज भी साइकिल है। वह साइकिल ठीक करने का सामान भी रखते हैं और अपनी साइकिल स्वयं ठीक कर लेते हैं। यशपाल भगत जी का साइकिल के प्रति प्रेम लोगों में चर्चा का विषय रहता है।
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भोपा। भोपा डाकघर मे डाकिया के पद पर तैनात थाना सिखेड़ा के गांव भंडूर निवासी सोमपाल सिंह की उम्र लगभग 61 साल है। वह साइकिल को अपनी सारथी मानते हैं। उन्हें बचपन से ही साइकिल चलाने का शौक हैं।
सोमपाल सिंह बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 8 अपने गांव के स्कूल से पास की और कक्षा 9 में उन्होंने मुजफ्फरनगर के गवर्नमेंट कॉलेज में अपना दाखिला करा लिया था। वह अपने गांव से मुजफ्फरनगर कॉलेज तक प्रतिदिन साइकिल से आना-जाना करते थे। उसके बाद उन्हें भोपा डाकघर में डाकिया के रूप में तैनाती मिल गई। यहां भी उसी समय से वह साइकिल पर आते जाते हैं।
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गांव से भोपा और इस बीच में डाक वितरण करने के कार्य सहित वह प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक साइकिल का सफर तय करते हैं। उनका कहना है कि बचपन से लेकर स्कूल तक और स्कूल से लेकर नौकरी के अंतिम पड़ाव तक साइकिल उनका खूब साथ दे रही है।
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70 साल की उम्र में भी साइकिल से दौड़ रहे यशपाल
भोपा। भोपा खादर क्षेत्र के गांव मजलिसपुर तौफीर निवासी 70 वर्षीय किसान यशपाल भगत का कहना है कि साइकिल उनका ऐसा साथी है जो बचपन से लेकर आज तक साथ निभा रही है। उनका कहना है कि उनका गांव उत्तर प्रदेश की सीमा का गांव है। पढ़ते समय वह लगभग 50 किमी का सफर तय कर शिक्षा ग्रहण करने के लिए भोपा के जनता इंटर कालेज में आते जाते थे।
इतना ही नहीं उत्तराखंड की डोईवाला स्थित शुगर मिल में भी बड़ा सफर तय कर उन्होंने साइकिल के माध्यम से मजदूरी कार्य किया। घर में सब तरह के वाहन होने के बावजूद भी वह साइकिल के ही दीवाने हैं। उनका यह भी कहना है कि सड़क पर हो रही दुर्घटनाओं के चलते साइकिल की सवारी को महत्व देते हैं। बेहतर स्वास्थ्य का राज भी साइकिल है। वह साइकिल ठीक करने का सामान भी रखते हैं और अपनी साइकिल स्वयं ठीक कर लेते हैं। यशपाल भगत जी का साइकिल के प्रति प्रेम लोगों में चर्चा का विषय रहता है।