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बच्चों का जीवन बचाना है, तो जल बचाना होगा
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बुढ़ाना में मकान के बाहर कार की धुलाई करता चालक।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
बुढ़ाना। जल ही जीवन है। बच्चों का जीवन बचाना है, तो जल बचाना होगा। कुछ लोग धरती की कोख में ही जीवन का कत्ल करने पर तुले हैं। भू-गर्भ जल का बेहिसाब दोहन और वो भी बिना वजह हो रहा है।
जल बर्बाद होने से रोकने के लिए शासन व प्रशासन द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में बड़े-बड़े मंच व सेमिनार आदि के माध्यम से भी भू-गर्भ जल को संरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। हालात यह है कि इन तमाम कोशिशों के बाद भी बुढ़ाना ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुका है। क्षेत्र के लोग इससे समझने को तैयार नहीं। लोग घरों में लगे सबमर्सिबल पंप से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। एक दशक पहले कस्बा व देहात क्षेत्र में बामुश्किल 50-100 सबमर्सिबल पंप लगे थे। अब यह संख्या हजारों में पहुंच गई है। कस्बे में अधिकतर घरों के निर्माण के दौरान ही सबमर्सिबल पंप लगवाए जा रहे हैं। गांवों में भी कोई गली-मोहल्ला नहीं जहां सबमर्सिबल न लगा हो। बिजली आते ही सबमर्सिबल पंप चल जाते हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग सबमर्सिबल को खुला छोड़ देते हैं। ग्रामीण पानी की तेज धार से सफाई करते हैं। पशुओं को नहलाने में भी पानी की बर्बादी हो रही है। जिले में लगातार भूजल स्तर गिरता जा रहा है, मगर कोई समझने को तैयार नहीं।
डार्क जोन घोषित हो चुका है बुढ़ाना
बुढ़ाना। जिले में गिरते जल स्तर को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा क्षेत्र को डार्क जोन घोषित किया है। इस क्षेत्र में नलकूप के नये कनेक्शन स्वीकृति के बिना नहीं मिलते। जलस्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। सार्वजनिक हैंडपंप और नलकूप की बोरिंग 200-300 फीट से अधिक पर हो रही हैं। इस कारण गरीब किसान व गरीब तबके के लोग परेशान हैं। लोगों ने पानी के लिए बेहिसाब सबमर्सिबल पंप लगा लिए हैं। निजी इंतजाम से पानी की भरपूर उपलब्धता का दुरुपयोग भी खूब हो रहा है। जिसका परिणाम है कि धरती की कोख लगातार सूख रही है।
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जल नही बचाया तो जीवन नहीं बचेगा
बुढ़ाना। विकास खंड कार्यालय के मीटिंग हॉल में ग्राम प्रधानों के साथ वार्ता में सहारनपुर से आए अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई शरद कुमार तथा अधिशासी अभियंता भूजल विभाग आमोद कुमार ने ग्राम प्रधानों से अपने-अपने गांव में लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। खंड विकास अधिकारी कपिल कुमार ने कहा कि गिरता जल स्तर गंभीर समस्या है। जल बर्बादी का उपाय न किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
डग पर हो रही जल की बर्बादी
खतौली। जल ही जीवन है, यह स्लोगन हर नगर, देहात में लिखा मिल जाता है, लेकिन इसको समझ पाना उतना ही मुश्किल है। लाख समझाने के बाद भी जल की बर्बादी करने से लोग बाज नहीं आ रहे है। एक गिलास ठंडा जल लेने के लिए लोग सबमर्सिबल चलाकर छोड़ देते है, जिससे कारण पानी खराब होता है। ऐसी ही कुछ वाहन की धुलाई करने वाले डग पर देखा जा सकता है। सुबह से लेकर सायं तक वाहनों की धुलाई कराने पहुंचने वाले वाहनों के कारण कितना जल बर्बाद होता है, इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है। एक वाहन की धुलाई में सैकड़ों व्यक्तियों के पेयजल की बर्बादी होती है। फिर भी लोग भविष्य की चिंता किए बगैर जल का दोहन करने में लगे है।
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जल बर्बाद होने से रोकने के लिए शासन व प्रशासन द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में बड़े-बड़े मंच व सेमिनार आदि के माध्यम से भी भू-गर्भ जल को संरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। हालात यह है कि इन तमाम कोशिशों के बाद भी बुढ़ाना ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुका है। क्षेत्र के लोग इससे समझने को तैयार नहीं। लोग घरों में लगे सबमर्सिबल पंप से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। एक दशक पहले कस्बा व देहात क्षेत्र में बामुश्किल 50-100 सबमर्सिबल पंप लगे थे। अब यह संख्या हजारों में पहुंच गई है। कस्बे में अधिकतर घरों के निर्माण के दौरान ही सबमर्सिबल पंप लगवाए जा रहे हैं। गांवों में भी कोई गली-मोहल्ला नहीं जहां सबमर्सिबल न लगा हो। बिजली आते ही सबमर्सिबल पंप चल जाते हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग सबमर्सिबल को खुला छोड़ देते हैं। ग्रामीण पानी की तेज धार से सफाई करते हैं। पशुओं को नहलाने में भी पानी की बर्बादी हो रही है। जिले में लगातार भूजल स्तर गिरता जा रहा है, मगर कोई समझने को तैयार नहीं।
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डार्क जोन घोषित हो चुका है बुढ़ाना
बुढ़ाना। जिले में गिरते जल स्तर को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा क्षेत्र को डार्क जोन घोषित किया है। इस क्षेत्र में नलकूप के नये कनेक्शन स्वीकृति के बिना नहीं मिलते। जलस्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। सार्वजनिक हैंडपंप और नलकूप की बोरिंग 200-300 फीट से अधिक पर हो रही हैं। इस कारण गरीब किसान व गरीब तबके के लोग परेशान हैं। लोगों ने पानी के लिए बेहिसाब सबमर्सिबल पंप लगा लिए हैं। निजी इंतजाम से पानी की भरपूर उपलब्धता का दुरुपयोग भी खूब हो रहा है। जिसका परिणाम है कि धरती की कोख लगातार सूख रही है।
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जल नही बचाया तो जीवन नहीं बचेगा
बुढ़ाना। विकास खंड कार्यालय के मीटिंग हॉल में ग्राम प्रधानों के साथ वार्ता में सहारनपुर से आए अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई शरद कुमार तथा अधिशासी अभियंता भूजल विभाग आमोद कुमार ने ग्राम प्रधानों से अपने-अपने गांव में लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। खंड विकास अधिकारी कपिल कुमार ने कहा कि गिरता जल स्तर गंभीर समस्या है। जल बर्बादी का उपाय न किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
डग पर हो रही जल की बर्बादी
खतौली। जल ही जीवन है, यह स्लोगन हर नगर, देहात में लिखा मिल जाता है, लेकिन इसको समझ पाना उतना ही मुश्किल है। लाख समझाने के बाद भी जल की बर्बादी करने से लोग बाज नहीं आ रहे है। एक गिलास ठंडा जल लेने के लिए लोग सबमर्सिबल चलाकर छोड़ देते है, जिससे कारण पानी खराब होता है। ऐसी ही कुछ वाहन की धुलाई करने वाले डग पर देखा जा सकता है। सुबह से लेकर सायं तक वाहनों की धुलाई कराने पहुंचने वाले वाहनों के कारण कितना जल बर्बाद होता है, इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है। एक वाहन की धुलाई में सैकड़ों व्यक्तियों के पेयजल की बर्बादी होती है। फिर भी लोग भविष्य की चिंता किए बगैर जल का दोहन करने में लगे है।