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अपात्र हो गया हूं, अब नहीं चाहिए गेहूं, चावल, चना और तेल
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मुजफ्फरनगर। साहब...मेरा परिवार पात्र गृहस्थी राशन कार्ड के लिए अपात्र श्रेणी में आ गया है। इसलिए राशन कार्ड सरेंडर करने आया हूं...। जिला पूर्ति कार्यालय पर रोजाना इस तरह के मामले पहुंच रहे हैं।
राशन कार्डों को लेकर शुरू हुए सत्यापन अभियान का असर यह हुआ कि लोग खुद ही अपने कार्ड लेकर तहसील और पूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। पिछले 20 दिन में ही अब तक करीब दो हजार राशन कार्ड विभाग को सरेंडर किए जा चुके हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि खुद राशन कार्ड धारक पहुंच रहे हैं। अधिकतर लोगों का कहना है कि वह पहले पात्र थे, लेकिन अब अपात्र हो गए हैं। इसी वजह से अब योजना का लाभ नहीं लेना चाहते।
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ट्रैक्टर और एसी वाले योजना के पात्र नहीं
आयकर दाता, किसी भी सदस्य के पास गाड़ी, ट्रैक्टर, एसी, हार्वेस्टर, पांच केवी या इससे अधिक क्षमता का जनरेटर है, पांच एकड़ से अधिक सिंचित भूमि, परिवार के सदस्यों की आय दो लाख से अधिक, परिवार में एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो तो वह व्यक्ति पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड के लिए पात्र होगा।
शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए यह शर्तें
आयकर दाता, गाड़ी, एसी, पांच केवी या इससे अधिक क्षमता का जनरेटर, 100 वर्ग मीटर का आवासीय प्लॉट, कारपोरेट एरिया का आवासीय प्लाट, ऐसे कार्ड धारक जिनके या परिवार के किसी सदस्य के पास कारपोरेट एरिया में 80 वर्ग मीटर का व्यावसायिक स्थान, समस्त सदस्यों की आय तीन लाख से अधिक या एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो तो शहरी क्षेत्र के ऐसे व्यक्ति योजना के पात्र नहीं होंगे।
इस तरह की जाएगी रिकवरी
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि प्रशासन की जांच में अगर कोई अपात्र व्यक्ति खाद्यान्न लेते हुए पाया गया तो गेहूं 24 रुपये प्रति किलोग्राम, चावल 32 रुपये प्रति किलोग्राम और नमक, तेल और चलना की वसूली बाजार मूल्य के हिसाब से की जाएगी।
कोरोना के बाद बढ़े थे कार्ड धारक
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत कार्ड धारकों को गेहूं, चना, चावल, तेल और नमक दिया जा रहा था। कोरोना संक्रमण के बाद कार्डधारकों की संख्या बढ़ी थी। जिले में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या पांच लाख से अधिक है।
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राशन कार्डों को लेकर शुरू हुए सत्यापन अभियान का असर यह हुआ कि लोग खुद ही अपने कार्ड लेकर तहसील और पूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। पिछले 20 दिन में ही अब तक करीब दो हजार राशन कार्ड विभाग को सरेंडर किए जा चुके हैं।
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जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि खुद राशन कार्ड धारक पहुंच रहे हैं। अधिकतर लोगों का कहना है कि वह पहले पात्र थे, लेकिन अब अपात्र हो गए हैं। इसी वजह से अब योजना का लाभ नहीं लेना चाहते।
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ट्रैक्टर और एसी वाले योजना के पात्र नहीं
आयकर दाता, किसी भी सदस्य के पास गाड़ी, ट्रैक्टर, एसी, हार्वेस्टर, पांच केवी या इससे अधिक क्षमता का जनरेटर है, पांच एकड़ से अधिक सिंचित भूमि, परिवार के सदस्यों की आय दो लाख से अधिक, परिवार में एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो तो वह व्यक्ति पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड के लिए पात्र होगा।
शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए यह शर्तें
आयकर दाता, गाड़ी, एसी, पांच केवी या इससे अधिक क्षमता का जनरेटर, 100 वर्ग मीटर का आवासीय प्लॉट, कारपोरेट एरिया का आवासीय प्लाट, ऐसे कार्ड धारक जिनके या परिवार के किसी सदस्य के पास कारपोरेट एरिया में 80 वर्ग मीटर का व्यावसायिक स्थान, समस्त सदस्यों की आय तीन लाख से अधिक या एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हो तो शहरी क्षेत्र के ऐसे व्यक्ति योजना के पात्र नहीं होंगे।
इस तरह की जाएगी रिकवरी
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि प्रशासन की जांच में अगर कोई अपात्र व्यक्ति खाद्यान्न लेते हुए पाया गया तो गेहूं 24 रुपये प्रति किलोग्राम, चावल 32 रुपये प्रति किलोग्राम और नमक, तेल और चलना की वसूली बाजार मूल्य के हिसाब से की जाएगी।
कोरोना के बाद बढ़े थे कार्ड धारक
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत कार्ड धारकों को गेहूं, चना, चावल, तेल और नमक दिया जा रहा था। कोरोना संक्रमण के बाद कार्डधारकों की संख्या बढ़ी थी। जिले में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या पांच लाख से अधिक है।