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महिला की हत्या में पति, देवरानी को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:24 PM IST
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पंद्रह साल पहले शामली में हुई महिला की हत्या के मामले में एडीजे दशम ने मृतका के पति और देवरानी को आजीवन कारावास की सुजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बागपत जिले के गांव ट्योढ़ी निवासी श्यामलाल शर्मा ने 12 जून 2002 को शामली के आदर्श मंडी थाने पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी बेटी कुसुम की शादी करीब बीस साल पहले बागपत के छपरौली थाना क्षेत्र के गांव लूम निवासी कलीराम के पुत्र सोमदत्त के साथ हुई थी। पारिवारिक क्लेश के चलते वर्ष 1995 में दोनों में संबंध विच्छेद हो गए।
कुसुम की देवरानी कुसुम पत्नी ब्रह्मदत्त शामली के रेलपार मोहल्ले में रहती है। देवरानी ने दोनों में समझौता कराने के लिए कुसुम को 11 जून 2002 को शामली बुलाया था। उस दिन कुसुम अपनी बहन प्रेमलता के साथ शामली में देवरानी के घर आई थी। रात में ही उसकी संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गला दबा कर हत्या होना आया।
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पुलिस ने जांच के बाद मृतका के पति सोमदत्त और देवरानी कुसुम पत्नी ब्रह्मदत्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जांच के दौरान यह भी प्रकाश में आया था कि इन दोनों में अनैतिक संबंध थे, जिनका कुसुम विरोध करती थी। यह मुकदमा एडीजे-10 मयंक चौहान की कोर्ट में चला। एडीजीसी इनाम इलाही त्यागी ने अदालत में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कुसुम की हत्या करने में उसके पति सोमदत्त और देवरानी कुसुम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास, 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सोमदत्त पहले से ही जेल में बंद था। सजा के बाद मृतका की देवरानी को भी जेल भेज दिया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार बागपत जिले के गांव ट्योढ़ी निवासी श्यामलाल शर्मा ने 12 जून 2002 को शामली के आदर्श मंडी थाने पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी बेटी कुसुम की शादी करीब बीस साल पहले बागपत के छपरौली थाना क्षेत्र के गांव लूम निवासी कलीराम के पुत्र सोमदत्त के साथ हुई थी। पारिवारिक क्लेश के चलते वर्ष 1995 में दोनों में संबंध विच्छेद हो गए।
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कुसुम की देवरानी कुसुम पत्नी ब्रह्मदत्त शामली के रेलपार मोहल्ले में रहती है। देवरानी ने दोनों में समझौता कराने के लिए कुसुम को 11 जून 2002 को शामली बुलाया था। उस दिन कुसुम अपनी बहन प्रेमलता के साथ शामली में देवरानी के घर आई थी। रात में ही उसकी संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गला दबा कर हत्या होना आया।
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पुलिस ने जांच के बाद मृतका के पति सोमदत्त और देवरानी कुसुम पत्नी ब्रह्मदत्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जांच के दौरान यह भी प्रकाश में आया था कि इन दोनों में अनैतिक संबंध थे, जिनका कुसुम विरोध करती थी। यह मुकदमा एडीजे-10 मयंक चौहान की कोर्ट में चला। एडीजीसी इनाम इलाही त्यागी ने अदालत में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कुसुम की हत्या करने में उसके पति सोमदत्त और देवरानी कुसुम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास, 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सोमदत्त पहले से ही जेल में बंद था। सजा के बाद मृतका की देवरानी को भी जेल भेज दिया गया है।