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हिजाब इस्लाम का जरूरी आदेश : मदनी

Wed, 16 Mar 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 11:39 PM IST
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Hijab is an essential order of Islam: Madani
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि हिजाब को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्णय इस्लामी शिक्षाओं और शरीयत के आदेशों के अनुसार नहीं है। उन्होंने कहा कि जो आदेश अनिवार्य होते हैं वह जरूरी होते हैं, उनका उल्लंघन करना गुनाह है। इसी प्रकार हिजाब भी इस्लाम का एक जरूरी आदेश है।
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बुधवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हिजाब को लेकर कुरआन और हदीस में जो हुक्म दिया गया है। यदि कोई इसका पालन न करे तो इस्लाम से खारिज नहीं होता, लेकिन वो पापी हो कर अल्लाह के अजाब और नरक का हकदार अवश्य होता है। इसलिए यह कहना कि पर्दा इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है सरासर ग़लत है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह लोग ‘अनिवार्य’ का अर्थ यह समझ रहे हैं कि जो व्यक्ति इसका पालन नहीं करेगा वो इस्लाम से खारिज हो जाएगा, हालांकि ऐसा नहीं है। अगर अनिवार्य है तो जरूरी है। इसके न करने पर कल कयामत के दिन अल्लाह के अजाब का हकदार होगा। मौलाना अरशद मदनी ने यह भी कहा कि मुसलमान अपनी सुस्ती और लापरवाही के कारण नमाज नहीं पढ़ते, रोजा नहीं रखते तो इसका अर्थ यह नहीं है कि नमाज और रोजा अनिवार्य नहीं है। उन्हाेंने कहा कि यूनिफार्म लागू करने का अधिकार स्कूलों की हद तक सीमित है जो मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था वह स्कूल का नहीं कॉलेज का था। इसलिए नियमों के अनुसार कॉलेज को अपनी ओर से यूनिफार्म लागू करने का अधिकार नहीं है।
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मौलाना अरशद मदनी ने यह दिए तर्क
देवबंद। मौलाना अरशद मदनी ने हिजाब को इस्लाम का हिस्सा न मानने वाले कोर्ट के फैसले पर कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संविधान के आर्टिकल-25 और इसके उप-खंडों के अंतर्गत जो अधिकार प्राप्त हैं, वह संविधान में इस बात की गारंटी देता है कि देश के हर नागरिक को धर्म के अनुसार आस्था रखने, धार्मिक नियमों का पालन करने और इबादत की पूर्ण स्वतंत्रता है। भारत सरकार या राज्य सरकार का अपना कोई सरकारी धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति या समुदाय अपनी धार्मिक पहचान जाहिर न करे, धर्मनिरपेक्षता में यह बात अवश्य दाखिल है कि सरकार किसी विशेष धर्म की पहचान को सभी नागरिकों पर न थोपे। हिजाब एक धार्मिक कर्तव्य है जिसका आधार क़ुरआन और सुन्नत है वही हमारी स्वाभाविक और तर्कसंगत आवश्यकता है।
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