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हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 14 Sep 2016 12:35 AM IST
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धरने पर बैठे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं। जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की लाइन लगी है, लेकिन उन्हें सही से उपचार नहीं मिल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में लगभग 500 संविदा स्वास्थ्य कर्मी तैनात हैं। इनमें डॉक्टर, नर्स, ऑपरेटर, फार्मेसिस्ट, एंबुुलेंस चालक भी शामिल हैं। एक साथ सभी संविदा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। सरकार की आम जनता को राहत देने वाली सभी योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। जिले में 15 एंबुलेंस गाड़ियां हैं, सभी अस्पताल में खडी़ हैं।
उधर, जिले में सौ के लगभग संविदा चिकित्सक हैं, इनके हड़ताल पर जाने से सीएचसी, पीएचसी की इमरजेंसी सुविधाएं तक प्रभावित हो गई हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर तो केवल संविदा पर रखे गए चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज परेशान हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात नर्सों, फार्मेसिस्टों के हड़ताल पर जाने से स्थिति और भी विकट हो गई है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हड़ताल का कोई विकल्प तैयार नहीं कर पा रहे हैं। आम जनता को हड़ताल से सीधे दो-चार होना पड़ रहा है।
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टीकाकरण की योजनाएं प्रभावित
सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार का कहना है कि हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। प्रदेश स्तरीय हड़ताल है और नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, इसमें हम क्या कर सकते हैं। हम रेगुलर स्टाफ से काम ले रहे हैं। हमें सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी स्कीमों को लेकर आ रही है। जो नर्स इनमें काम करती हैं, वह सब हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाऐं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जिला मुख्यालय पर रेगुलर स्टाफ है, लेकिन सीएचसी, पीएचसी में ज्यादातर संविदा पर स्टाफ है।
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स्वास्थ्य विभाग में लगभग 500 संविदा स्वास्थ्य कर्मी तैनात हैं। इनमें डॉक्टर, नर्स, ऑपरेटर, फार्मेसिस्ट, एंबुुलेंस चालक भी शामिल हैं। एक साथ सभी संविदा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। सरकार की आम जनता को राहत देने वाली सभी योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। जिले में 15 एंबुलेंस गाड़ियां हैं, सभी अस्पताल में खडी़ हैं।
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उधर, जिले में सौ के लगभग संविदा चिकित्सक हैं, इनके हड़ताल पर जाने से सीएचसी, पीएचसी की इमरजेंसी सुविधाएं तक प्रभावित हो गई हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर तो केवल संविदा पर रखे गए चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज परेशान हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात नर्सों, फार्मेसिस्टों के हड़ताल पर जाने से स्थिति और भी विकट हो गई है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हड़ताल का कोई विकल्प तैयार नहीं कर पा रहे हैं। आम जनता को हड़ताल से सीधे दो-चार होना पड़ रहा है।
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टीकाकरण की योजनाएं प्रभावित
सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार का कहना है कि हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। प्रदेश स्तरीय हड़ताल है और नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, इसमें हम क्या कर सकते हैं। हम रेगुलर स्टाफ से काम ले रहे हैं। हमें सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी स्कीमों को लेकर आ रही है। जो नर्स इनमें काम करती हैं, वह सब हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाऐं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जिला मुख्यालय पर रेगुलर स्टाफ है, लेकिन सीएचसी, पीएचसी में ज्यादातर संविदा पर स्टाफ है।