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Muzaffarnagar News: 26 साल बाद कांटे के मुकाबले में आए हरेंद्र मलिक

Tue, 04 Jun 2024 02:46 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2024 02:46 AM IST
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Harendra Malik came in a close contest after 26 years
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव के नतीजों पर सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक की साख भी दाव पर लगी है। 26 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब हरेंद्र मलिक कांटे के मुकाबले में हैं। इससे पहले 1998 में सपा के टिकट पर ही वह भाजपा के सोहनवीर सिंह से 22724 वोटों से हार गए थे। इसके बाद लड़े चुनाव में वह तीसरे और चौथे स्थान पर रहे।
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बघरा क्षेत्र के काजीखेड़ा गांव में जन्मे और वर्तमान में प्रेमपुरी में रह रहे सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक (69) पश्चिम की राजनीति में पहचान के मोहताज नहीं हैं। पार्टी और सीट बदलने के उनके फाॅर्मूलों की सियासी गलियों में खूब चर्चा रहती है। मलिक ने पहला लोकसभा चुनाव साल 1998 में सपा के टिकट पर ही लड़ा था। भाजपा के सोहनवीर सिंह को 250466 और हरेंद्र मलिक को 227742 वोट मिले थे। सिर्फ 22724 वोटों के अंतर से पहले ही चुनाव में वह सांसद बनते-बनते रह गए थे।
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इसके बाद 1999 में दोबारा सपा ने चुनाव लड़ाया, लेकिन 112499 वोटों के साथ वह चौथे स्थान पर खिसक गए। साल 2009 में कांग्रेस के टिकट पर भी 73848 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे।
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करीब दस साल बाद 2019 में मलिक ने कैराना लोकसभा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और 69355 वोट हासिल कर वह तीसरे स्थान पर रहे। साल 2022 में अपने बेटे पंकज मलिक को शामली के बजाए चरथावल से चुनाव लड़ाकर जीत दिलाई। तब से ही वह सपा में मुजफ्फरनगर सीट से टिकट के दावेदार थे, लेकिन रालोद में उनके नाम पर सहमति नहीं बनीं। मुजफ्फरनगर सीट पर शुरू हुए मतभेद के बाद सपा-रालोद गठबंधन टूट गया। 26 साल बाद मलिक मुख्य मुकाबले में नजर आ रहे हैं। मंगलवार को आने वाले नतीजों में उनकी साख भी दांव पर लगी है।

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इनसेट
राजनीति में इस तरह आगे बढ़ते गए हरेंद्र मलिक

पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति की। 1982 में बीडीसी का चुनाव लड़ा, उनके भाई बघरा के प्रमुख रहे थे। 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने उन्हें खतौली से टिकट दिया तो वह विधायक चुने गए। इसके बाद तीन बार बघरा से विधायक रहे।

इंडियन नेशनल लोकदल से वह राज्यसभा सांसद रहे। पूर्व सांसद ने अपने बेटे पंकज मलिक को राजनीति में आगे बढ़ाया तो वह अब तीसरी बार विधायक बने हैं।
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