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Muzaffarnagar News: 16 साल पहले दादा की हुई थी हत्या, दादी रहीं प्रधान, चुनाव की तैयारी कर रहा था अंकित
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। तितावी के मांडी की दोना फैक्टरी के संचालक अंकित बालियान के दादा राजबीर सिंह की गांव की रंजिश में करीब 16 साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
चाचा विपिन पर जानलेवा हमला किया गया। यही नहीं दूसरे पक्ष पर हमले में चाचा के नाम भी प्राथमिकी दर्ज हुई। रंजिश में हथियार उठाए गए। बाद में पंचायताें ने समझौते कराए। आरोपियों ने घेर को फैक्टरी में बदला और पिटबुल बांधकर दहशत फैला दी। ग्रामीणों ने घेर की तरफ आवाजाही सीमित कर दी। खुलासे से गांव हैरान रह गया।
मुख्य आरेापी अंकित बालियान की दादी सुदेश बाला साल 2010 में प्रधान रही। इसके बाद अब तक हुए दो चुनाव में परिवार को एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई। चौथी बार चुनाव लड़ने के लिए गांव में प्रचार सामग्री भी चस्पा करानी शुरू कर दी गई। परिवार के हिस्से में करीब 90 बीघा जमीन है। गांव के बाहर घेर को डेढ़ साल पहले फैक्टरी में बदला गया। तय किया गया कि दोना फैक्टरी का संचालन किया जाएगा। यहां से दोने देहरादून सप्लाई किए जा रहे थे।
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मुख्य रूप से फैक्टरी की देखरेख अंकित बालियान करता था। परिवार के लोगों की भी यहां आवाजाही रहती थी। सुपरवाइजर शिवा त्यागी को साथ मिलाकर मजदूरों पर उत्पीड़न शुरू किया। पंचायतों में हुए समझौतों के बाद रंजिश के फैसले हो गए।
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मुजफ्फरनगर। तितावी के मांडी की दोना फैक्टरी के संचालक अंकित बालियान के दादा राजबीर सिंह की गांव की रंजिश में करीब 16 साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
चाचा विपिन पर जानलेवा हमला किया गया। यही नहीं दूसरे पक्ष पर हमले में चाचा के नाम भी प्राथमिकी दर्ज हुई। रंजिश में हथियार उठाए गए। बाद में पंचायताें ने समझौते कराए। आरोपियों ने घेर को फैक्टरी में बदला और पिटबुल बांधकर दहशत फैला दी। ग्रामीणों ने घेर की तरफ आवाजाही सीमित कर दी। खुलासे से गांव हैरान रह गया।
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मुख्य आरेापी अंकित बालियान की दादी सुदेश बाला साल 2010 में प्रधान रही। इसके बाद अब तक हुए दो चुनाव में परिवार को एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई। चौथी बार चुनाव लड़ने के लिए गांव में प्रचार सामग्री भी चस्पा करानी शुरू कर दी गई। परिवार के हिस्से में करीब 90 बीघा जमीन है। गांव के बाहर घेर को डेढ़ साल पहले फैक्टरी में बदला गया। तय किया गया कि दोना फैक्टरी का संचालन किया जाएगा। यहां से दोने देहरादून सप्लाई किए जा रहे थे।
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मुख्य रूप से फैक्टरी की देखरेख अंकित बालियान करता था। परिवार के लोगों की भी यहां आवाजाही रहती थी। सुपरवाइजर शिवा त्यागी को साथ मिलाकर मजदूरों पर उत्पीड़न शुरू किया। पंचायतों में हुए समझौतों के बाद रंजिश के फैसले हो गए।