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मदरसों के साथ ही अन्य सभी धर्मों की शिक्षण संस्थाओं का सर्वे कराए सरकार
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देवबंद। राष्ट्रवादी सेना ने सरकार से जाति धर्म से ऊपर उठकर मदरसों के साथ-साथ आरएसएस (संघ) एवं अन्य सभी धर्मों की शिक्षण संस्थाओं का सर्वे कराने की मांग की है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को संगठन द्वारा राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।
राष्ट्रवादी सेना के अध्यक्ष चौधरी विरेंद्र सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एसडीएम दीपक कुमार को ज्ञापन सौंपा। जिसमें बताया कि योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने के आदेश दिए गए हैं। जो पूरी तरह से राष्ट्रहित व बच्चों के भविष्य के लिए उचित है, लेकिन एकपक्षीय कार्रवाई विवाद का विषय बन चुका है जो राष्ट्रहित में नहीं है। इसलिए मदरसों के साथ-साथ सनातन, ईसाई, जैन, बौद्ध व सिख धर्म तथा संघ द्वार संचालित शिक्षण संस्थाओं का भी सर्वे कराना जरूरी है। ताकि पता चल सके कि मदरसों, गुरुकुल, स्कूल, मठों समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं में बच्चों को राष्ट्रविरोधी धार्मिक कट्टरता का पाठ तो नहीं पढ़ाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता व अखंडता के लिए खतरा बनने के साथ ही संविधान के विपरीत हो, क्योंकि संविधान में सभी धर्मों को बराबर की मान्यता दी गई है। बता दें कि सरकार द्वारा मदरसों का सर्वे कराने के विरोध में इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम एवं जमीयत उलमा-ए-हिंद ने 24 सितंबर को सम्मेलन बुलाया है। जिसमें दारुल उलूम से जुड़े करीब 250 मदरसों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ज्ञापन देने वालों में वरिष्ठ गुर्जर, कुणाल गुर्जर, रोहित गुर्जर, संदीप कुमार, कुलदीप कुमार, मामचंद प्रधान, जोगिंदर, राजपाल व विश्वास सिंह आदि रहे।
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राष्ट्रवादी सेना के अध्यक्ष चौधरी विरेंद्र सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एसडीएम दीपक कुमार को ज्ञापन सौंपा। जिसमें बताया कि योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने के आदेश दिए गए हैं। जो पूरी तरह से राष्ट्रहित व बच्चों के भविष्य के लिए उचित है, लेकिन एकपक्षीय कार्रवाई विवाद का विषय बन चुका है जो राष्ट्रहित में नहीं है। इसलिए मदरसों के साथ-साथ सनातन, ईसाई, जैन, बौद्ध व सिख धर्म तथा संघ द्वार संचालित शिक्षण संस्थाओं का भी सर्वे कराना जरूरी है। ताकि पता चल सके कि मदरसों, गुरुकुल, स्कूल, मठों समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं में बच्चों को राष्ट्रविरोधी धार्मिक कट्टरता का पाठ तो नहीं पढ़ाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता व अखंडता के लिए खतरा बनने के साथ ही संविधान के विपरीत हो, क्योंकि संविधान में सभी धर्मों को बराबर की मान्यता दी गई है। बता दें कि सरकार द्वारा मदरसों का सर्वे कराने के विरोध में इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम एवं जमीयत उलमा-ए-हिंद ने 24 सितंबर को सम्मेलन बुलाया है। जिसमें दारुल उलूम से जुड़े करीब 250 मदरसों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ज्ञापन देने वालों में वरिष्ठ गुर्जर, कुणाल गुर्जर, रोहित गुर्जर, संदीप कुमार, कुलदीप कुमार, मामचंद प्रधान, जोगिंदर, राजपाल व विश्वास सिंह आदि रहे।
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