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चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए
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पूर्व सैनिक हरपाल।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए
मुजफ्फरनगर, भोपा। भारतीय सैनिकों की शहादत से पूर्व सैनिकों में आक्रोश है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारत द्वारा सीमा तक सड़क निर्माण करने से बौखलाया चीन इस तरह की शर्मनाक हरकतें कर रहा है। इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
गांव छछरौली निवासी पूर्व सैनिक हरिप्रकाश चौहान वर्ष 1962 से 1967 तक चीन सीमा से लगे सिक्किम क्षेत्र में तैनात रहे हैं। उन्होंने बताया कि सात अप्रैल 1964 को उन्होंने कैप्टन जीएस लांबा के नेतृत्व में साथी सैनिकों मानसिंह व महेंद्र सिंह के साथ करीब 20 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र में पैदल चलते हुए चीनी बंकरों की रेकी की थी। भारत-पाक के बीच वर्ष 1971 के युद्ध में भी वे सीमा पर तैनात रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन को उसकी औकात बताने में हमारे सैनिक पूरी तरह सक्षम हैं।
कस्बा भोकरहेड़ी निवासी पूर्व सैनिक हरपाल सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1975 से 1978 तक और इसके बाद 1986 से 1989 तक चीन सीमा से लगे सिक्किम क्षेत्र में तैनात रहे हैं। चीन सीमा पर आए दिन छेड़छाड़ करता है। उनके समय में भी चीन सैनिक लगातार इस तरह की हरकतें करते थे, जिन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाता था। उन्होंने कहा कि यह नया भारत है, जो चीन की बंदर घुड़की में नहीं आएगा और हमारे सैनिक उसे उसी की भाषा में जवाब देंगे। कस्बा निवासी पूर्व सैनिक रोहित राठी ने बताया कि वह वर्ष 2011 से 2014 तक चीन बॉर्डर पर तैनात रहे हैं। करीब नौ माह पूर्व ही वह सेवानिवृत्त होकर लौटे हैं। रोहित ने बताया कि सीमा पर अक्सर चीनी सैनिक हदें पार करते हैं, जिन्हें इसका माकूल जवाब भारतीय सैनिकों द्वारा दिया जाता है। सोमवार रात हमारे जवान शहीद हुए, लेकिन चीन को भी इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। क्षेत्र के पूर्व सैनिक जोगिंदर सिंह, चंद्रपाल सिंह और इंद्राज सिंह ने भी सोमवार रात हुई भिड़ंत को लेकर चीनी रवैये पर आक्रोश व्यक्त करते हुए देश से चीन को कड़ा जवाब देने की मांग की है।
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मुजफ्फरनगर, भोपा। भारतीय सैनिकों की शहादत से पूर्व सैनिकों में आक्रोश है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारत द्वारा सीमा तक सड़क निर्माण करने से बौखलाया चीन इस तरह की शर्मनाक हरकतें कर रहा है। इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
गांव छछरौली निवासी पूर्व सैनिक हरिप्रकाश चौहान वर्ष 1962 से 1967 तक चीन सीमा से लगे सिक्किम क्षेत्र में तैनात रहे हैं। उन्होंने बताया कि सात अप्रैल 1964 को उन्होंने कैप्टन जीएस लांबा के नेतृत्व में साथी सैनिकों मानसिंह व महेंद्र सिंह के साथ करीब 20 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र में पैदल चलते हुए चीनी बंकरों की रेकी की थी। भारत-पाक के बीच वर्ष 1971 के युद्ध में भी वे सीमा पर तैनात रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन को उसकी औकात बताने में हमारे सैनिक पूरी तरह सक्षम हैं।
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कस्बा भोकरहेड़ी निवासी पूर्व सैनिक हरपाल सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1975 से 1978 तक और इसके बाद 1986 से 1989 तक चीन सीमा से लगे सिक्किम क्षेत्र में तैनात रहे हैं। चीन सीमा पर आए दिन छेड़छाड़ करता है। उनके समय में भी चीन सैनिक लगातार इस तरह की हरकतें करते थे, जिन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाता था। उन्होंने कहा कि यह नया भारत है, जो चीन की बंदर घुड़की में नहीं आएगा और हमारे सैनिक उसे उसी की भाषा में जवाब देंगे। कस्बा निवासी पूर्व सैनिक रोहित राठी ने बताया कि वह वर्ष 2011 से 2014 तक चीन बॉर्डर पर तैनात रहे हैं। करीब नौ माह पूर्व ही वह सेवानिवृत्त होकर लौटे हैं। रोहित ने बताया कि सीमा पर अक्सर चीनी सैनिक हदें पार करते हैं, जिन्हें इसका माकूल जवाब भारतीय सैनिकों द्वारा दिया जाता है। सोमवार रात हमारे जवान शहीद हुए, लेकिन चीन को भी इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। क्षेत्र के पूर्व सैनिक जोगिंदर सिंह, चंद्रपाल सिंह और इंद्राज सिंह ने भी सोमवार रात हुई भिड़ंत को लेकर चीनी रवैये पर आक्रोश व्यक्त करते हुए देश से चीन को कड़ा जवाब देने की मांग की है।

हरिप्रकाश चौहान- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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