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Muzaffarnagar News: खुद से बाहर निकलें, बच्चों और बड़ों को घेर रहा अवसाद
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मुजफ्फरनगर। आजकल के रहन-सहन और तनाव से भरी जीवनशैली में मानसिक रोग तेजी से पैर पसार रहा है। अवसाद (डिप्रेशन) के मरीज जिला अस्पताल में अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक ने कहा कि ध्यान नहीं देने पर मानसिक रोगी की जान तक चली जाती है। पढ़ाई से लेकर काम का दबाव भी अवसाद का कारण बन रहा है।
स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल में इन दिनों मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना 150-175 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या ओसीडी व अवसाद की समस्या वाले मरीजों की है। यह दोनों ही स्थिति खतरनाक हैं, जो ज्यादा सोचने के कारण होती है।
मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी में अवसाद की समस्या हो रही है। बच्चों को अपनी पढ़ाई का दबाव व अन्य किसी कारण से डिप्रेशन हो जाता है। इससे बाहर नहीं निकलने का मुख्य कारण है कि वह अपने परिवार से परेशानियों को साझा नहीं करते हैं।
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उन्होंने बताया कि ओसीडी (ऑबसेसिव -कम्पलसिव डिसऑर्डर) भी खतरनाक है। इसमें व्यक्ति के मन में बार-बार एक ही विचार आता रहता है। बार-बार कोई जोड़ या गिनती करता है, बार-बार ताला व दरवाजा बंद करके पुनः खोलकर उसे चेक करता है। यह सभी ओसीडी के ही लक्षण है। डॉ. अर्पण जैन ने कहा कि दोनों ही बीमारी लाइलाज मनोविकार नहीं हैं। यह एक साधारण विचारों एवं उलझन की बीमारी है, जिसे दवा एवं मनोवैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी के लक्षणों में परिवर्तन होता रहता है।
उन्होंने कहा कि दोनों ही मानसिक रोगों में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्हें रोगियों का हौसला बढ़ाना चाहिए। रोगी को कभी भी बुरा भला ना कहें। परिवार को यह समझना होगा कि मरीज जान बूझकर यह कार्य नहीं कर रहा है।
यह है अवसाद के लक्षण
- उदास मन व किसी काम में मन नहीं लगना ।
- उलझन एवं घबराहट होना।
- वजन कम या ज्यादा होना।
-निराशा का भाव व आत्महत्या के विचार आना।
-नींद निर्धारित समय से दो घंटे पहले खुल जाना।
-सुबह बिस्तर छोड़ने की इच्छा नहीं करना।
यह है ओसीडी के लक्षण
- एक ही विचार बार-बार मन में आना।
- थोड़े समय तक ही विचारों को रोक पाना।
- यदि कोई ना करें तो अत्यधिक उलझन होना।
- गंदगी का विचार बार-बार आना।
- किसी वस्तु या व्यक्ति को बार-बार छूने का विचार।
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स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल में इन दिनों मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना 150-175 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या ओसीडी व अवसाद की समस्या वाले मरीजों की है। यह दोनों ही स्थिति खतरनाक हैं, जो ज्यादा सोचने के कारण होती है।
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मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी में अवसाद की समस्या हो रही है। बच्चों को अपनी पढ़ाई का दबाव व अन्य किसी कारण से डिप्रेशन हो जाता है। इससे बाहर नहीं निकलने का मुख्य कारण है कि वह अपने परिवार से परेशानियों को साझा नहीं करते हैं।
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उन्होंने बताया कि ओसीडी (ऑबसेसिव -कम्पलसिव डिसऑर्डर) भी खतरनाक है। इसमें व्यक्ति के मन में बार-बार एक ही विचार आता रहता है। बार-बार कोई जोड़ या गिनती करता है, बार-बार ताला व दरवाजा बंद करके पुनः खोलकर उसे चेक करता है। यह सभी ओसीडी के ही लक्षण है। डॉ. अर्पण जैन ने कहा कि दोनों ही बीमारी लाइलाज मनोविकार नहीं हैं। यह एक साधारण विचारों एवं उलझन की बीमारी है, जिसे दवा एवं मनोवैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी के लक्षणों में परिवर्तन होता रहता है।
उन्होंने कहा कि दोनों ही मानसिक रोगों में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्हें रोगियों का हौसला बढ़ाना चाहिए। रोगी को कभी भी बुरा भला ना कहें। परिवार को यह समझना होगा कि मरीज जान बूझकर यह कार्य नहीं कर रहा है।
यह है अवसाद के लक्षण
- उदास मन व किसी काम में मन नहीं लगना ।
- उलझन एवं घबराहट होना।
- वजन कम या ज्यादा होना।
-निराशा का भाव व आत्महत्या के विचार आना।
-नींद निर्धारित समय से दो घंटे पहले खुल जाना।
-सुबह बिस्तर छोड़ने की इच्छा नहीं करना।
यह है ओसीडी के लक्षण
- एक ही विचार बार-बार मन में आना।
- थोड़े समय तक ही विचारों को रोक पाना।
- यदि कोई ना करें तो अत्यधिक उलझन होना।
- गंदगी का विचार बार-बार आना।
- किसी वस्तु या व्यक्ति को बार-बार छूने का विचार।