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घासीपुरा ट्रिपल मर्डर में इंस्पेक्टर दोषी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:29 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चर्चित घासीपुरा ट्रिपल मर्डर मामले की जांच में तत्कालीन कोतवाल को दोषी पाया गया है। एसपी ट्रैफिक की जांच में कोतवाल अमरेश बघेल को शवों के पोस्टमार्टम में देरी किए जाने का दोषी पाया है। एसपी ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। घटना के बाद ही आरोपी कोतवाल का तबादला बुलंदशहर जनपद में कर दिया गया था।
मंसूरपुर के घासीपुरा में बस्ती से बाहर स्थित एक मकान में 21 सितंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में बागपत निवासी सचिन, दीपक और शामली के मालेंडी निवासी गौरव के गोली लगे शव मिले थे। घटना को लेकर जाट बिरादरी ने तत्कालीन कोतवाल अमरेश बघेल पर फर्जी एनकाउंटर में युवकों की हत्या करने का आरोप लगाया था। नाराज परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया था। आईजी अजय आनंद और डीआईजी जेके शाही ने मौके पर जाकर घटना की जानकारी ली थी।
मामले में तनाव के चलते जाट समाज ने तीन अक्तूबर को महापंचायत की घोषणा कर दी थी। नाराज लोगों को शांत करने के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। एसपी ट्रैफिक डॉक्टर कृष्ण गोपाल यादव ने मामले की जांच की। जांच में एसपी ने तत्कालीन मंसूरपुर प्रभारी निरीक्षक अमरेश बघेल को तीनों युवकों के पोस्टमार्टम में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है। एसपी के अनुसार 21 सितंबर की रात घटना के बाद तीनों शवों का पीएम दो दिन बाद 23 तारीख को हुआ था। एसपी ने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। मामले में घटना के बाद कोतवाल का तबादला बुलंदशहर कर दिया गया था।
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एफएसएल जांच टीम की नहीं आई रिपोर्ट
घासीपुरा ट्रिपल मर्डर की जांच के साथ तत्कालीन एसएसपी दीपक कुमार ने लखनऊ से विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को फोरेंसिक जांच के लिए बुलाया था। 27 सितंबर को आई छह सदस्यीय टीम ने मौके पर जाकर घंटों घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ने घर की जांच, फर्श पर खून के धब्बे, मिट्टी के नमूने आदि के नमूने लिए थे। टीम के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय ने कहा था कि मेरठ की फोरेंसिक टीम द्वारा लिए गए नमूनों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। टीम की ओर से जांच रिपोर्ट नहीं देने पर दो माह पूर्व रिमाइंडर भेजा गया था। साढ़े चार माह बीत जाने के बाद भी आज तक एफएसएल टीम अपनी जांच रिपोर्ट नहीं दे पाई है।
लखनऊ से जांच में आए थे अधिकारी
घासीपुरा के ट्रिपल मर्डर में लखनऊ से आई जांच टीम के लिए मौके पर छह लोगों की टीम आई थी। टीम में डायरेक्टर डॉ. श्यामबिहारी उपाध्याय, डॉ. ग्यासूदीन खान मेडिकल लीगल एक्सपर्ट, डॉ अजय श्रीवास्तव फायर एक्सपर्ट, नरेंद्र कुमार भौतिकी विशेषज्ञ, हरेंद्र कुमार फील्ड यूनिट, डॉ. सुधीर कुमार डिप्टी डायरेक्टर गाजियाबाद मौजूद रहे। इनके अलावा मुजफ्फरनगर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी मौजूद रही थी।
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मंसूरपुर के घासीपुरा में बस्ती से बाहर स्थित एक मकान में 21 सितंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में बागपत निवासी सचिन, दीपक और शामली के मालेंडी निवासी गौरव के गोली लगे शव मिले थे। घटना को लेकर जाट बिरादरी ने तत्कालीन कोतवाल अमरेश बघेल पर फर्जी एनकाउंटर में युवकों की हत्या करने का आरोप लगाया था। नाराज परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया था। आईजी अजय आनंद और डीआईजी जेके शाही ने मौके पर जाकर घटना की जानकारी ली थी।
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मामले में तनाव के चलते जाट समाज ने तीन अक्तूबर को महापंचायत की घोषणा कर दी थी। नाराज लोगों को शांत करने के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। एसपी ट्रैफिक डॉक्टर कृष्ण गोपाल यादव ने मामले की जांच की। जांच में एसपी ने तत्कालीन मंसूरपुर प्रभारी निरीक्षक अमरेश बघेल को तीनों युवकों के पोस्टमार्टम में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है। एसपी के अनुसार 21 सितंबर की रात घटना के बाद तीनों शवों का पीएम दो दिन बाद 23 तारीख को हुआ था। एसपी ने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। मामले में घटना के बाद कोतवाल का तबादला बुलंदशहर कर दिया गया था।
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एफएसएल जांच टीम की नहीं आई रिपोर्ट
घासीपुरा ट्रिपल मर्डर की जांच के साथ तत्कालीन एसएसपी दीपक कुमार ने लखनऊ से विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को फोरेंसिक जांच के लिए बुलाया था। 27 सितंबर को आई छह सदस्यीय टीम ने मौके पर जाकर घंटों घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ने घर की जांच, फर्श पर खून के धब्बे, मिट्टी के नमूने आदि के नमूने लिए थे। टीम के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय ने कहा था कि मेरठ की फोरेंसिक टीम द्वारा लिए गए नमूनों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। टीम की ओर से जांच रिपोर्ट नहीं देने पर दो माह पूर्व रिमाइंडर भेजा गया था। साढ़े चार माह बीत जाने के बाद भी आज तक एफएसएल टीम अपनी जांच रिपोर्ट नहीं दे पाई है।
लखनऊ से जांच में आए थे अधिकारी
घासीपुरा के ट्रिपल मर्डर में लखनऊ से आई जांच टीम के लिए मौके पर छह लोगों की टीम आई थी। टीम में डायरेक्टर डॉ. श्यामबिहारी उपाध्याय, डॉ. ग्यासूदीन खान मेडिकल लीगल एक्सपर्ट, डॉ अजय श्रीवास्तव फायर एक्सपर्ट, नरेंद्र कुमार भौतिकी विशेषज्ञ, हरेंद्र कुमार फील्ड यूनिट, डॉ. सुधीर कुमार डिप्टी डायरेक्टर गाजियाबाद मौजूद रहे। इनके अलावा मुजफ्फरनगर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी मौजूद रही थी।