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शुकतीर्थ को गंगा लाने वाले भगीरथ की तलाश

Sat, 01 Feb 2020 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 12:39 AM IST
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Ganges flow from Bhogpur in Haridwar
शुकतीर्थ में गंगा यात्रा के समापन पर दीपों से सजाया गया गंगा घाट। - फोटो : KHATAULI
शुकतीर्थ को गंगा लाने वाले भगीरथ की तलाश
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मुजफ्फरनगर। हरिद्वार के भोगपुर में बांध के निर्माण के बाद से शुकतीर्थ गंगाजल के लिए तरस रहा है। नमामि गंगे योजना में प्रदेश सरकार की ओर से शुकतीर्थ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि गंगा को शुकतीर्थ में लाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री रहते हुए डॉ संजीव बालियान का प्रयास भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। स्वामी कल्याणदेव की पुण्यतिथि में शामिल होने आए सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने इस समस्या को स्वामी ओमानंद सरस्वती उठा चुके हैं। शुकतीर्थ को अब लंबे अरसे से उस भगीरथ का इंतजार है, जो गंगा को इस पावन तीर्थस्थल तक पहुंचा दें।
हरिद्वार के भोगपुर से गंगा की जलधारा बाण गंगा के रूप में निकल रही थी। बाढ़ आने से गंगा और बाण गंगा के बीच के गांवों में स्थिति विकट हो जाती थी। इसे देखते हुए सरकार ने हरिद्वार के भोगपुर में बांध बनाकर बाण गंगा को बंद कर दिया था। तीन दशक पहले शुकतीर्थ से बाण गंगा और शाकंभरी की पहाड़ियों से निकलने वाली सोलानी नदी बहती रही है। शुकतीर्थ में गंगा जल नहीं आने से यहां अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज इस मांग को लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी इस समस्या को उठाया, लेकिन हल नहीं निकला। केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री रहते हुए 2017 में डॉ संजीव बालियान ने इसका बीड़ा उठाया। उन्होंने जल संसाधन के वेवकोष को इसकी डीपीआर बनाने का जिम्मा सौंपा। साठ करोड़ का खर्च इस कार्य में बताया गया। इंजीनियरों ने काफी मशक्कत के बाद यह माना कि भोगपुर में एक गेट लगाया जाएगा, जिसकी लागत 20 करोड़ होगी। बाकी खर्च पूरा मार्ग बनाने पर आएगा। उस गेट से एक निश्चित मात्रा में पानी चालू कर दिया जाएगा, जो बाण गंगा के माध्यम से शुकतीर्थ में आता रहेगा। बीच से कहीं से भी गंगा को शुकतीर्थ में नहीं लाया जा सकता। डॉ संजीव बालियान के मंत्री पद से हटने के बाद यह परियोजना लटक गई। हाल ही में प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने भी गंगा से जुड़े सिंचाई विभाग के अफसरों की बैठक ली और जलधारा को लाने पर चर्चा की। उनके सामने इंजीनियरों ने पूर्व प्रोजेक्ट को रखा। देश में इस समय नमामि गंगे परियोजना चल रही है। ऐसे में शुकतीर्थ के लोगों को यह उम्मीद थी कि गंगा की जलधारा यहां आ जाएगी, लेकिन अब सभी उस भगीरथ का इंतजार कर रहे हैं जो यहां जलधारा लेकर आएगा।
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केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव: बालियान
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रस्ताव को उन्होंने जिस हालत में छोड़ा था, अभी तक उसी हालत में है। हाल ही में वह देश के जल संसाधन मंत्री से मिले थे। उन्होंने यह कहा है कि उत्तराखंड और यूपी के मुख्यमंत्री प्रस्ताव करके भेजें तो इस योजना पर काम शुरू हो सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ से उनकी बात हो चुकी है। अब वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात करने के लिए देहरादून जाएंगे।
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तो शुकतीर्थ से ही शुरू होती गंगा यात्रा
मुजफ्फरनगर। शुकतीर्थ में गंगाजल की धारा होती तो प्रदेश सरकार की गंगा यात्रा शुकतीर्थ से ही प्रारंभ होती है। शुकतीर्थ में गंगाजल नहीं होने के कारण ही सरकार ने बैराज से यह यात्रा प्रारंभ की।
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