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Muzaffarnagar News: शहर में बनने लगा मोर्चा, जुटने लगे किसान
Mon, 30 Jan 2023 01:32 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 30 Jan 2023 01:32 PM IST
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राजकीय कालेज के मैदान में किसानों के धरना पर बैठे चौधरी राकेश टिकैत।
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर भाकियू ने मोर्चेबंदी करनी शुरू कर दी है। मैदान के एक कोने में झोपड़ियां बनाईं जा रही हैं। हरियाणा, पंजाब के किसान भी धरने में शामिल हुए। सहारनपुर और मेरठ मंडल के जिलों से भाकियू कार्यकर्ताओं ने धरने पर पहुंचकर किसानों की समस्या उठाई। किसानों ने कहा कि बात नहीं सुनी गई तो धरना लंबा चलेगा।
राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में शनिवार को भाकियू का धरना शुरू हुआ। भाकियू का कहना है कि एमएसपी पर गारंटी कानून की लड़ाई जारी रहेगी। जीआईसी से ही अब किसानों के मुद्दों पर संघर्ष किया जाएगा। इस मोर्चे को पक्का बनाया जाएगा। किसान अपनी आवाज यहीं से बुलंद करेंगे। दोपहर में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान पहुंचे।
भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने रात में किसानों के ठहरने और खाने पीने की व्यवस्था कराई। किसानों ने कहा कि समस्याओं का समाधान होने तक वह मोर्चे से नहीं हटेंगे। टिकैत ने खुद कहा कि यहां कोई एक या दो दिन का धरना नहीं है, बल्कि पक्के मोर्चे बनाकर मांगों को उठाया जाएगा। सभी लोग गाडिय़ों के बजाए अपने-अपने तंबू गाड़ लें और खाने-पीने की व्यवस्था करें। हर ब्लॉक हर दिन अपने यहां सभी के खाने-पीने का इंतजाम करेगा।
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किसानों की जमीन छीनने की साजिश : टिकैत
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि देश में बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है। नए अधिग्रहण नियम के तहत किसानों की जमीन को छीनने के काम किया जा रहा है। देश को बचाने है तो आंदोलन ही करना होगा। आंदोलन नहीं होगा तो किसान की जमीन नहीं बचेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार कोई काम नहीं कर रही है। अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। लखनऊ एयरपोर्ट की जमीन बिना मुआवजे के ही कब्जा ली गई। व्यापारी लगातार सडक़ के बराबर की खेती की जमीन को खरीद रहे है और दीवार खड़ी कर रहे है। उन्होंने आह्वान किया कि कोई भी किसान अपनी जमीन ना बेचें, क्योंकि इससे पहले बिहार का भी यही हाल हुआ है।
इन्होंने सबसे पहले बिहार को ही बर्बाद किया है। बिहार में वहीं तीन कानून लागू किए गए थे। आवारा पशुओं की समस्या का निदान करने की बजाए सरकार खेतों में दवाई छिडऩे की बात करती है। अगर खेतों में दवाई छिड़क दी गई तो सभी पशु मर जाएंगे। घर में पलने वाले पशुओं को भी जहरीली घास खानी पड़ेगी।
सरकार रच रही बड़ा षड्यंत्र
गठवाला खाप के थांबेदार श्याम सिंह ने कहा कि सरकार बड़ा षड्यंत्र रच रही है। वह चाहती है कि किसान को आपस में कैसे बांटा जाए, इस पर पूरा षड्यंत्र रचा जा रहा है। फसलों के नाम पर संगठन बनाने की कोशिश की जा रही है। किसानों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। सभी लोगों को मिलकर एक होना होगा।
बात करने के लिए तैयार नहीं सरकार : टिकैत
टिकैत ने कहा कि सरकार से आखिरी बार 22 जनवरी 2021 को बात हुई थी। सरकार बात करने को तैयार नहीं है। इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर है। आंदोलन ही देश को बचा सकता है। आज सरकार दूरदर्शन के दफ्तर को शिफ्ट कर रही है और उसकी जमीन को बेचने की फिराक में है। सरकार व्यापारी है, इन्हें तिरंगे और देश के लोगों से कोई लगाव नहीं है।
किसानों की अनसुनी, बागेश्वर धाम का प्रचार
टिकैत ने कहा कि इस वक्त बागेश्वर महाराज का प्रचार किया जा रहा है। किसानों की बात को कोई नहीं सुन रहा। टीवी चैनलों को भी सवाल बताए जा रहे है कि बागेश्वर धाम पर कौन से सवाल पूछने है। जो किसानों के खिलाफ होगा, हम उसके खिलाफ होंगे। अगर सरकार के पक्ष में कोई पार्टी होगी तो हम उसके खिलाफ हो जाएंगे।
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राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में शनिवार को भाकियू का धरना शुरू हुआ। भाकियू का कहना है कि एमएसपी पर गारंटी कानून की लड़ाई जारी रहेगी। जीआईसी से ही अब किसानों के मुद्दों पर संघर्ष किया जाएगा। इस मोर्चे को पक्का बनाया जाएगा। किसान अपनी आवाज यहीं से बुलंद करेंगे। दोपहर में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान पहुंचे।
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भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने रात में किसानों के ठहरने और खाने पीने की व्यवस्था कराई। किसानों ने कहा कि समस्याओं का समाधान होने तक वह मोर्चे से नहीं हटेंगे। टिकैत ने खुद कहा कि यहां कोई एक या दो दिन का धरना नहीं है, बल्कि पक्के मोर्चे बनाकर मांगों को उठाया जाएगा। सभी लोग गाडिय़ों के बजाए अपने-अपने तंबू गाड़ लें और खाने-पीने की व्यवस्था करें। हर ब्लॉक हर दिन अपने यहां सभी के खाने-पीने का इंतजाम करेगा।
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किसानों की जमीन छीनने की साजिश : टिकैत
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि देश में बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है। नए अधिग्रहण नियम के तहत किसानों की जमीन को छीनने के काम किया जा रहा है। देश को बचाने है तो आंदोलन ही करना होगा। आंदोलन नहीं होगा तो किसान की जमीन नहीं बचेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार कोई काम नहीं कर रही है। अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। लखनऊ एयरपोर्ट की जमीन बिना मुआवजे के ही कब्जा ली गई। व्यापारी लगातार सडक़ के बराबर की खेती की जमीन को खरीद रहे है और दीवार खड़ी कर रहे है। उन्होंने आह्वान किया कि कोई भी किसान अपनी जमीन ना बेचें, क्योंकि इससे पहले बिहार का भी यही हाल हुआ है।
इन्होंने सबसे पहले बिहार को ही बर्बाद किया है। बिहार में वहीं तीन कानून लागू किए गए थे। आवारा पशुओं की समस्या का निदान करने की बजाए सरकार खेतों में दवाई छिडऩे की बात करती है। अगर खेतों में दवाई छिड़क दी गई तो सभी पशु मर जाएंगे। घर में पलने वाले पशुओं को भी जहरीली घास खानी पड़ेगी।
सरकार रच रही बड़ा षड्यंत्र
गठवाला खाप के थांबेदार श्याम सिंह ने कहा कि सरकार बड़ा षड्यंत्र रच रही है। वह चाहती है कि किसान को आपस में कैसे बांटा जाए, इस पर पूरा षड्यंत्र रचा जा रहा है। फसलों के नाम पर संगठन बनाने की कोशिश की जा रही है। किसानों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। सभी लोगों को मिलकर एक होना होगा।
बात करने के लिए तैयार नहीं सरकार : टिकैत
टिकैत ने कहा कि सरकार से आखिरी बार 22 जनवरी 2021 को बात हुई थी। सरकार बात करने को तैयार नहीं है। इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर है। आंदोलन ही देश को बचा सकता है। आज सरकार दूरदर्शन के दफ्तर को शिफ्ट कर रही है और उसकी जमीन को बेचने की फिराक में है। सरकार व्यापारी है, इन्हें तिरंगे और देश के लोगों से कोई लगाव नहीं है।
किसानों की अनसुनी, बागेश्वर धाम का प्रचार
टिकैत ने कहा कि इस वक्त बागेश्वर महाराज का प्रचार किया जा रहा है। किसानों की बात को कोई नहीं सुन रहा। टीवी चैनलों को भी सवाल बताए जा रहे है कि बागेश्वर धाम पर कौन से सवाल पूछने है। जो किसानों के खिलाफ होगा, हम उसके खिलाफ होंगे। अगर सरकार के पक्ष में कोई पार्टी होगी तो हम उसके खिलाफ हो जाएंगे।