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पंचतत्व में विलीन हुए ज्योति प्रसाद, बड़कली में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम विदाई

Thu, 09 Nov 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 09 Nov 2017 11:47 PM IST
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Freedom fighter Jyoti Prasad
स्वतंत्रता सेनानी को गार्ड ऑफ ऑनर देते पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का बिगुल बजाने वाले बड़कली गांव के स्वाधीनता सेनानी ज्योति प्रसाद त्यागी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। एसडीएम और सीओ सिटी ने प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर के साथ पुष्पचक्र अर्पित किए। तिरंगे ध्वज में लिपटे त्यागी के पार्थिव शरीर पर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान समेत जिले के राजनीतिज्ञों, अधिवक्ताओं और नागरिकों ने पुष्पांजलि दी। 
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 क्षेत्र के गांव बड़कली में आजादी के सिपाही 96 वर्षीय ज्योति प्रसाद त्यागी का बुधवार को देहावसान हो गया था। खेतीबाड़ी से जुड़े रामचंद्र त्यागी के परिवार में जन्मे ज्योति प्रसाद को मुजफ्फरनगर के डीएवी हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान स्वतंत्रता संग्राम के खिलाफ आवाज बुलंद करने की प्रेरणा मिली। युवा अवस्था में ही स्वदेशी, खादी, हिंदी के पक्ष में उन्होंने सड़कों पर प्रदर्शन किया और फिरंगी हुकूमत के पुतले फूंके।
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मेधावी छात्र रहे त्यागी ने मेरठ से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और वहां भी वह क्रांतिकारियों से जुड़े रहे। बापू के आह्वान पर उन्होंने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्होंने उर्दू, अंग्रेजी और फारसी में अंग्रेजों के खिलाफ लेख लिखे। साथी स्वाधीनता सेनानियों के संघर्ष को एक किताब के रूप में प्रस्तुत किया। 
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ज्योति प्रसाद की फिरंगियों के खिलाफ उग्रता और देशप्रेम के जज्बे से अंग्रेज अफसर उन्हें आंखों की किरकिरी समझने लगे। वर्ष 1942-43 के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट ने 11 माह की सजा सुनाई। त्यागी को बरेली और मेरठ की जेल में सजा काटनी पड़ी। स्वाधीनता संग्राम के दौरान ही वह देश के बड़े सेनानियों के संपर्क में आए। बरेली जेल में कैद नारायण दत्त तिवारी से उनकी आत्मिक मित्रता हो गई।

तिवारी के संपर्क से ही त्यागी को पंडित नेहरू से जुड़ने का मौका मिला। बृहस्पतिवार को सुबह से ही क्षेत्र के नागरिक बड़कली गांव पहुंचने लगे। उनकी पार्थिव शरीर पर ग्रामीणों ने पुष्प चढ़ाए। प्रशासन की ओर से एसडीएम कन्हई सिंह और सीओ सिटी हरीश भदौरिया ने पुष्पचक्र अर्पित किया। पुलिस लाइन से पहुंची बटालियन ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अमर सेनानी को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक कपिलदेव अग्रवाल, प्रमोद ऊंटवाल ने श्रद्धांजलि अर्पित की।


अंतिम यात्रा के बाद गांव के जंगल में ही वेदमंत्रों के साथ वैदिक रीति से त्यागी के पुत्र ब्रिजेश त्यागी ने मुखाग्नि दी। इस दौरान जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद त्यागी, राजेश्वरदत्त त्यागी, पूर्व विधायक अनिल कुमार, जिला पंचायत सदस्य अनिल त्यागी, अशोक गुर्जर, सुशील त्यागी, पंकज त्यागी, सुबोध शर्मा, सरदार हरजीत सिंह, विपुल त्यागी, शहर कोतवाल संजीव शर्मा, प्रधानाचार्य अविनाश त्यागी, ग्राम प्रधान मुनेश आदि अंतिम यात्रा में सम्मलित हुए। 
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