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जालसाज को एक वर्ष की सजा, 1.52 करोड़ का जुर्माना
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 06 Mar 2018 11:09 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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बसपा सरकार में हुए लालबत्ती प्रकरण के फर्जीवाडे़ से जुड़े चेक बाउंस मामले में अदालत ने आरोपी राजीव मिश्रा को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने जालसाज पर एक करोड़ 52 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। गाजियाबाद निवासी मिश्रा बीते दो साल में जिला कारागार में बंद है।
वर्ष 2011 में दर्जा राज्यमंत्री बनाए जाने का फर्जीवाड़ा हुआ था। जिसमें नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के प्रमोद पंवार को मोटर परिवहन संघ का फर्जी अध्यक्ष बनाया था। साजिश में फर्जी नियुक्ति पत्र और एनेक्सी पास जारी कर प्रमोद पंवार के खाते से एक करोड़ 10 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए थे।
मामले का खुलासा होने के बाद लखनऊ एसटीएफ ने मुख्य आरोपी राजीव मिश्रा निवासी इंदिरापुरम गाजियाबाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले में लखनऊ से राजस्व विशिष्ट अधिसूचना के क्लर्क अनूप श्रीवास्तव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। सिविल लाइन पुलिस ने फर्जी लालबत्ती लगाने के आरोप में प्रमोद पंवार को भी जेल भेज दिया था। जेल में लंबे समय रहने के बाद राजीव मिश्रा, अनूप श्रीवास्तव और प्रमोद पंवार को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
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लालबत्ती दिलाने की एवज में वसूली गई रकम की पंवार पक्ष ने मिश्रा से मांग की, जिसके भुगतान के लिए उसने उन्हें 76 लाख रुपये का चेक 15 मई 2011 को दिया था। चेक बाउंस होने के बाद प्रमोद के भाई जयकुमार ने 27 जून 2011 को कोर्ट में राजीव मिश्रा के खिलाफ वाद दायर किया था।
लंबी कार्रवाई के बाद राजीव मिश्रा कोर्ट में पेश हुआ, मगर फर्जी दस्तावेज के सहारे कोर्ट को गुमराह करने पर उसकी जमानत रद्द कर दी गई, तभी से वह जेल में है। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त न्यायालय के पीठासीन अधिकारी सुरेंद्रपाल गोयल की अदालत में हुई। कोर्ट ने एनआई एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत राजीव मिश्रा को दोषी माना और उसे एक वर्ष के कारावास और एक करोड़ 52 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। वादी पक्ष की ओर से पैरवी वकार अहमद एडवोकेट ने की है।
सतीश मिश्रा के नाम से जमाता था रौब
मुजफ्फरनगर। फर्जी लालबत्ती की साजिश में बड़ा गिरोह सक्रिय था। इंदिरापुरम गाजियाबाद निवासी राजीव मिश्रा ने खुद को बसपा सरकार में राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा को अपना रिश्तेदार बता कर पुलिस प्रशासन पर रौब गालिब किया था। फर्जी राज्यमंत्री बनाए गए प्रमोद पंवार को लखनऊ के एक होटल में रखा गया और वहां उसकी फर्जी अफसरों से मुलाकात कराई गई। पंवार ने जब एसएसपी मुजफ्फरनगर से शेडो की मांग की, तब फर्जी लालबत्ती दिए जाने का खुलासा हुआ।
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वर्ष 2011 में दर्जा राज्यमंत्री बनाए जाने का फर्जीवाड़ा हुआ था। जिसमें नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के प्रमोद पंवार को मोटर परिवहन संघ का फर्जी अध्यक्ष बनाया था। साजिश में फर्जी नियुक्ति पत्र और एनेक्सी पास जारी कर प्रमोद पंवार के खाते से एक करोड़ 10 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए थे।
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मामले का खुलासा होने के बाद लखनऊ एसटीएफ ने मुख्य आरोपी राजीव मिश्रा निवासी इंदिरापुरम गाजियाबाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले में लखनऊ से राजस्व विशिष्ट अधिसूचना के क्लर्क अनूप श्रीवास्तव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। सिविल लाइन पुलिस ने फर्जी लालबत्ती लगाने के आरोप में प्रमोद पंवार को भी जेल भेज दिया था। जेल में लंबे समय रहने के बाद राजीव मिश्रा, अनूप श्रीवास्तव और प्रमोद पंवार को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
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लालबत्ती दिलाने की एवज में वसूली गई रकम की पंवार पक्ष ने मिश्रा से मांग की, जिसके भुगतान के लिए उसने उन्हें 76 लाख रुपये का चेक 15 मई 2011 को दिया था। चेक बाउंस होने के बाद प्रमोद के भाई जयकुमार ने 27 जून 2011 को कोर्ट में राजीव मिश्रा के खिलाफ वाद दायर किया था।
लंबी कार्रवाई के बाद राजीव मिश्रा कोर्ट में पेश हुआ, मगर फर्जी दस्तावेज के सहारे कोर्ट को गुमराह करने पर उसकी जमानत रद्द कर दी गई, तभी से वह जेल में है। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त न्यायालय के पीठासीन अधिकारी सुरेंद्रपाल गोयल की अदालत में हुई। कोर्ट ने एनआई एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत राजीव मिश्रा को दोषी माना और उसे एक वर्ष के कारावास और एक करोड़ 52 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। वादी पक्ष की ओर से पैरवी वकार अहमद एडवोकेट ने की है।
सतीश मिश्रा के नाम से जमाता था रौब
मुजफ्फरनगर। फर्जी लालबत्ती की साजिश में बड़ा गिरोह सक्रिय था। इंदिरापुरम गाजियाबाद निवासी राजीव मिश्रा ने खुद को बसपा सरकार में राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा को अपना रिश्तेदार बता कर पुलिस प्रशासन पर रौब गालिब किया था। फर्जी राज्यमंत्री बनाए गए प्रमोद पंवार को लखनऊ के एक होटल में रखा गया और वहां उसकी फर्जी अफसरों से मुलाकात कराई गई। पंवार ने जब एसएसपी मुजफ्फरनगर से शेडो की मांग की, तब फर्जी लालबत्ती दिए जाने का खुलासा हुआ।