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एक जिंदगी बचाने में उजड़ गए चार परिवार
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मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में हादसे में क्षतिग्रस्त रोडवेज बस।
- फोटो : KHATAULI
एक जिंदगी बचाने में उजड़ गए चार परिवार
मंसुरपुर (मुजफ्फरनगर)। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हुए हादसे ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। सिपाही ने हाईवे पार कर रहे व्यक्ति की जिंदगी बचाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान कार अनियंत्रित होकर पलट गई। पल भर में ही चार परिवार उजड़ गए, जबकि घायल भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
उत्तरकाशी के रहने वाले सिपाही कुलदीप मिश्रा का बेटा बीमार है। रविवार रात घर से कॉल आई तो तय हुआ कि सोमवार को देहरादून में उपचार कराया जाएगा। सिपाही ने सुबह पत्नी को कॉल कर देहरादून पहुंचने के लिए कहा और वह खुद कार से दिया। मंसूरपुर के निकट कार हादसे का शिकार हो गई। जिससे सिपाही के परिवार और मेरठ में गम का माहौल है। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी दिनेश यादव और परीक्षितगढ़ के अमन गौतम देहरादून स्थित रक्षा संपदा विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी करते थे। आमतौर पर दोनों शुक्रवार शाम को देहरादून से घर आते थे और सोमवार सुबह मेरठ से वापस जाते थे। सोमवार को दोनों ने देहरादून जाने के लिए ही लिफ्ट ली थी, लेकिन हादसे का शिकार हो गए। दिनेश यादव की ढाई साल की बेटी है।
गाजियाबाद के मोदीनगर की नेहरू कॉलोनी निवासी मनीष सिंघल पुत्र हरीश सिंघल और मेरठ के मुल्ताननगर निवासी देवेंद्र शर्मा पुत्र शिव कुमार शर्मा गाजियाबाद में एक डिस्ट्रीब्यूटर के पास काम करते थे। दोनों सोमवार को देहरादून जाने के लिए निकले और उन्होंने भी कार में लिफ्ट ली थी।
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हाईवे पर हुआ जोरदार धमाका
वैगनआर कार अनियंत्रित होकर पलटी तो हाईवे पर जोरदार धमाका हुआ। पल भर में कार डिवाइडर से टकराई और हाईवे के दूसरी तरफ सोहराब गेट डिपो की रोडवेज बस से टकरा गई। हादसे से बस यात्री भी दहल गए। पहले किसी की समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ है। यात्रियों को मामूली चोट लगी है। यात्री दूसरी बसों और अन्य वाहनों में सवार होकर अपने गंतव्य को रवाना हो गए। हादसे के बाद मौके पर जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। जबकि हाईवे से कार और बस को हटवाकर यातायात सुचारु कराया।
आधार कार्ड और पहचान पत्र से हुई शनाख्त
कार सवार लोगों की शनाख्त को लेकर संशय बना रहा। सिपाही की पहचान पुलिस के कार्ड से हुई, जबकि अन्य लोगों के पास भी कार्ड और आधार कार्ड मिले। लेकिन परिजनों के नंबर उपलब्ध नहीं थे। काफी मशक्कत के बाद नंबर जुटाकर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी।
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मंसुरपुर (मुजफ्फरनगर)। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हुए हादसे ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। सिपाही ने हाईवे पार कर रहे व्यक्ति की जिंदगी बचाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान कार अनियंत्रित होकर पलट गई। पल भर में ही चार परिवार उजड़ गए, जबकि घायल भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
उत्तरकाशी के रहने वाले सिपाही कुलदीप मिश्रा का बेटा बीमार है। रविवार रात घर से कॉल आई तो तय हुआ कि सोमवार को देहरादून में उपचार कराया जाएगा। सिपाही ने सुबह पत्नी को कॉल कर देहरादून पहुंचने के लिए कहा और वह खुद कार से दिया। मंसूरपुर के निकट कार हादसे का शिकार हो गई। जिससे सिपाही के परिवार और मेरठ में गम का माहौल है। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी दिनेश यादव और परीक्षितगढ़ के अमन गौतम देहरादून स्थित रक्षा संपदा विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी करते थे। आमतौर पर दोनों शुक्रवार शाम को देहरादून से घर आते थे और सोमवार सुबह मेरठ से वापस जाते थे। सोमवार को दोनों ने देहरादून जाने के लिए ही लिफ्ट ली थी, लेकिन हादसे का शिकार हो गए। दिनेश यादव की ढाई साल की बेटी है।
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गाजियाबाद के मोदीनगर की नेहरू कॉलोनी निवासी मनीष सिंघल पुत्र हरीश सिंघल और मेरठ के मुल्ताननगर निवासी देवेंद्र शर्मा पुत्र शिव कुमार शर्मा गाजियाबाद में एक डिस्ट्रीब्यूटर के पास काम करते थे। दोनों सोमवार को देहरादून जाने के लिए निकले और उन्होंने भी कार में लिफ्ट ली थी।
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हाईवे पर हुआ जोरदार धमाका
वैगनआर कार अनियंत्रित होकर पलटी तो हाईवे पर जोरदार धमाका हुआ। पल भर में कार डिवाइडर से टकराई और हाईवे के दूसरी तरफ सोहराब गेट डिपो की रोडवेज बस से टकरा गई। हादसे से बस यात्री भी दहल गए। पहले किसी की समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ है। यात्रियों को मामूली चोट लगी है। यात्री दूसरी बसों और अन्य वाहनों में सवार होकर अपने गंतव्य को रवाना हो गए। हादसे के बाद मौके पर जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। जबकि हाईवे से कार और बस को हटवाकर यातायात सुचारु कराया।
आधार कार्ड और पहचान पत्र से हुई शनाख्त
कार सवार लोगों की शनाख्त को लेकर संशय बना रहा। सिपाही की पहचान पुलिस के कार्ड से हुई, जबकि अन्य लोगों के पास भी कार्ड और आधार कार्ड मिले। लेकिन परिजनों के नंबर उपलब्ध नहीं थे। काफी मशक्कत के बाद नंबर जुटाकर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी।