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किसान मनमानी कीमत पर कोल्हू पर गन्ना डालने को मजबूर
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सरनावली गांव में कोल्हूं में गन्ने की पैराई देखता ठेकेदार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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किसान मनमानी कीमत पर कोल्हू पर गन्ना डालने को मजबूर
बुढ़ाना। तहसील क्षेत्र में कोल्हू और क्रेशर मालिकों का गन्ने का पेराई आरंभ हो गया है। कोल्हू और क्रेशर मलिक मनमानी कीमत पर किसानों से गन्ना खरीद रहे हैं। समय पर बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण किसान कोल्हू में गन्ना डालने को मजबूर है। उत्पादन लागत में भी घाटा होने के कारण क्षेत्र का गन्ना किसान परेशान है।
शहर और देहात का व्यक्ति कच्चा मीठा/ कोल्हू का बना गुड़ और शक्कर खाने का महत्व समझने लगा है। दोनों स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है। गुड़ व शक्कर की मांग बढ़ने के कारण क्षेत्र में कोल्हुओं की भरमार हो गई है। देहात क्षेत्र में 15 दिन पहले कोल्हू व क्रेशर में पेराई आरंभ हो गया था। आरंभ में कोल्हू मालिकों ने 250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीदा था। अब कोल्हू व क्रेशर मालिक 200 से 230 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ना खरीद रहे हैं। अगली फसल की समय पर बुआई करने के लिए गन्ना किसान मनमानी कीमत पर कोल्हू में गन्ना डालने को मजबूर हैं।
स्थानीय मंडियों में भाव ठीक नहीं मिलता
बुढ़ाना। गठवाला खाप के गांव सरनावली में देेशी गुड़, शक्कर व खांड़ का कारोबार होता है। डूंगर, सरनावली व सुन्ना गांव में दर्जनों की संख्या में कोल्हू चल रहे हैं। सभी कोल्हू मालिक गुड़ व शक्कर बना रहे हैं। गांव सरनावली निवासी कोल्हू मालिक सुरेंद्र ने बताया कि आरंभ में जब कोल्हू आरंभ हुए थे, तो स्थानीय मंडी में गुड़ का भाव 4000 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल था। मंडी में गुड़ की आवक अधिक होने के कारण भाव गिरते चले गए। सुरेंद्र ने बताया कि आज कल मंडी में गुड़ 3000 से 3200 प्रति क्विंटल बिक रहा है। हरियाणा व पंजाब में यही गुड़ 4800 से 5000 रुपये तक बिक जाता है। उन्होंने बताया कि वहां तक ले जाने में ट्रांसपोर्ट का खर्चा अधिक आने के कारण मुनाफा खत्म हो जाता है।
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कई गांवों में चल रहे हैं कोल्हू
बुढ़ाना। क्षेत्र के गांव फुगाना, डूूंगर, सरनावली, सुन्ना, खरड़, भौराकलां व इटावा सहित कई गांवों में दर्जनों की संख्या में कोल्हू चल रहे हैं। कोल्हू संचालकों का कहना है कि जो कोल्हू मालिक गन्ना खरीदने से गुड़ बनाने तक का कार्य पार्टनरशिप में करते है। वे अच्छा पैसा कमा लेते हैं। मजदूरी पर काम करने वाला वाला कोल्हू मालिक अधिक लाभ नहीं कमा पाता।
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बुढ़ाना। तहसील क्षेत्र में कोल्हू और क्रेशर मालिकों का गन्ने का पेराई आरंभ हो गया है। कोल्हू और क्रेशर मलिक मनमानी कीमत पर किसानों से गन्ना खरीद रहे हैं। समय पर बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण किसान कोल्हू में गन्ना डालने को मजबूर है। उत्पादन लागत में भी घाटा होने के कारण क्षेत्र का गन्ना किसान परेशान है।
शहर और देहात का व्यक्ति कच्चा मीठा/ कोल्हू का बना गुड़ और शक्कर खाने का महत्व समझने लगा है। दोनों स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है। गुड़ व शक्कर की मांग बढ़ने के कारण क्षेत्र में कोल्हुओं की भरमार हो गई है। देहात क्षेत्र में 15 दिन पहले कोल्हू व क्रेशर में पेराई आरंभ हो गया था। आरंभ में कोल्हू मालिकों ने 250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीदा था। अब कोल्हू व क्रेशर मालिक 200 से 230 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ना खरीद रहे हैं। अगली फसल की समय पर बुआई करने के लिए गन्ना किसान मनमानी कीमत पर कोल्हू में गन्ना डालने को मजबूर हैं।
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स्थानीय मंडियों में भाव ठीक नहीं मिलता
बुढ़ाना। गठवाला खाप के गांव सरनावली में देेशी गुड़, शक्कर व खांड़ का कारोबार होता है। डूंगर, सरनावली व सुन्ना गांव में दर्जनों की संख्या में कोल्हू चल रहे हैं। सभी कोल्हू मालिक गुड़ व शक्कर बना रहे हैं। गांव सरनावली निवासी कोल्हू मालिक सुरेंद्र ने बताया कि आरंभ में जब कोल्हू आरंभ हुए थे, तो स्थानीय मंडी में गुड़ का भाव 4000 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल था। मंडी में गुड़ की आवक अधिक होने के कारण भाव गिरते चले गए। सुरेंद्र ने बताया कि आज कल मंडी में गुड़ 3000 से 3200 प्रति क्विंटल बिक रहा है। हरियाणा व पंजाब में यही गुड़ 4800 से 5000 रुपये तक बिक जाता है। उन्होंने बताया कि वहां तक ले जाने में ट्रांसपोर्ट का खर्चा अधिक आने के कारण मुनाफा खत्म हो जाता है।
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कई गांवों में चल रहे हैं कोल्हू
बुढ़ाना। क्षेत्र के गांव फुगाना, डूूंगर, सरनावली, सुन्ना, खरड़, भौराकलां व इटावा सहित कई गांवों में दर्जनों की संख्या में कोल्हू चल रहे हैं। कोल्हू संचालकों का कहना है कि जो कोल्हू मालिक गन्ना खरीदने से गुड़ बनाने तक का कार्य पार्टनरशिप में करते है। वे अच्छा पैसा कमा लेते हैं। मजदूरी पर काम करने वाला वाला कोल्हू मालिक अधिक लाभ नहीं कमा पाता।