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किसानों की फसलें जलमग्न
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मंसूरपुर में किसानों की फसलों में भरा नाले का पानी।
- फोटो : KHATAULI
किसानों की फसलें जलमग्न
मंसूरपुर। जिला प्रशासन द्वारा नाले में बंद लगाकर रोका गया पानी किसानों की फसलों में भर गया है। नतीजतन किसानों की फसलें जलमग्न हो गई है। किसानों ने आशंका जताई कि उनकी फसल बर्बाद हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत बंद खुलवा कर जलनिकासी की मांग की है।
सात फरवरी को जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम प्रशासन अमित कुमार व एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी ने नेशनल हाईवे के पास गुरुकुल विद्यालय की बराबर में नाले में बंद लगवा कर पानी रोक दिया था। प्रशासन का कहना था कि इस नाले का पानी काली नदी को प्रदूषित कर रहा है। प्रशासन का तर्क था कि वे देखना चाहते हैं कि इस नाले में किन किन औद्योगिक इकाइयों का पानी आ रहा है। इस नाले में प्रदूषित पानी किसी भी कीमत पर बहने नहीं दिया जाएगा। किसान अंगद चौधरी, जयपाल, कंवरपाल, जोगिंद्र, ओमप्रकाश, जयपाल आदि का कहना है कि प्रशासन ने कहा था कि बाद में नाला खोल दिया जाएगा, लेकिन बंद कराने के बाद प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब पानी नाले से बाहर उफन कर उनकी गन्ने तथा गेहूं की फसल में भर गया है। पानी भर जाने से वे गन्ने की छिलाई भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी अब उनका फोन भी नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पानी की जिम्मेदार उद्योग इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा तुरंत नाले से बंद खोलने की मांग की है।
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मंसूरपुर। जिला प्रशासन द्वारा नाले में बंद लगाकर रोका गया पानी किसानों की फसलों में भर गया है। नतीजतन किसानों की फसलें जलमग्न हो गई है। किसानों ने आशंका जताई कि उनकी फसल बर्बाद हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत बंद खुलवा कर जलनिकासी की मांग की है।
सात फरवरी को जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम प्रशासन अमित कुमार व एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी ने नेशनल हाईवे के पास गुरुकुल विद्यालय की बराबर में नाले में बंद लगवा कर पानी रोक दिया था। प्रशासन का कहना था कि इस नाले का पानी काली नदी को प्रदूषित कर रहा है। प्रशासन का तर्क था कि वे देखना चाहते हैं कि इस नाले में किन किन औद्योगिक इकाइयों का पानी आ रहा है। इस नाले में प्रदूषित पानी किसी भी कीमत पर बहने नहीं दिया जाएगा। किसान अंगद चौधरी, जयपाल, कंवरपाल, जोगिंद्र, ओमप्रकाश, जयपाल आदि का कहना है कि प्रशासन ने कहा था कि बाद में नाला खोल दिया जाएगा, लेकिन बंद कराने के बाद प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब पानी नाले से बाहर उफन कर उनकी गन्ने तथा गेहूं की फसल में भर गया है। पानी भर जाने से वे गन्ने की छिलाई भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी अब उनका फोन भी नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पानी की जिम्मेदार उद्योग इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा तुरंत नाले से बंद खोलने की मांग की है।
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