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नाम की सीएचसी, सुविधाएं पीएचसी जैसी भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 20 Jun 2017 11:57 PM IST
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चरथावल सीएचसी।
- फोटो : अमर उजाला
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चरथावल सीएचसी में 11 साल बाद भी पीएचसी वाली सुविधाएं मिल रही हैं। कई मर्तबा भेजे गए प्रस्ताव के बावजूद शासन से बजट के अभाव में यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और माकूल स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। हादसे अथवा मारपीट की घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। पीएचसी के भवन में ही सीएचसी चल रहा है।
करीब दो दशक तत्कालीन भाजपा एमएलए रणधीर सिंह के प्रयास से शासन से चरथावल को सीएचसी का तोहफा मिला था। 30 जून 2006 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने नुमाइश कैंप में रैली के दौरान सीएचसी के शिलापट का लोकार्पण किया था, लेकिन अभी तक सीएचसी वाली सुविधाएं शुरू नहीं की गई हैं। दरअसल, तब शासन से एक सीएचसी का बजट मिला था। वह शाहपुर और चरथावल की सीएचसी में कोल्ड चेन और मीटिंग कक्ष के लिए खर्च कर दिया गया।
सीएचसी के मानक के अनुरूप यहां छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। जबकि यहां सिर्फ दो जनरल फिजिशियन हैं और पीएचसी वाली पुरानी बिल्डिंग में बैठते हैं। सीएचसी के लिए निर्धारित कक्ष, चिकित्सकों के लिए आवास और ऑपरेशन की सुविधाओं का अभाव है। एक्सरे मशीन नहीं है। पुराने आवास जर्जर और रहने लायक नहीं हैं।
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अधिकांश उपकेंद्रों की हालत जर्जर
सीएचसी के अंतर्गत 29 गांवों के अधिकांश उप स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत जर्जर है। इनमें से नंगला राई, बिरालसी, दूधली और रोनी हरजीपुर समेत सात उपकेंद्रों पर तो अरसे से एएनएम तैनात नहीं हैं। जिससे प्रसव पूर्व महिलाओं की देखभाल और बच्चों का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।
पीपलशाह गांव केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सजीव बालियान द्वारा आदर्श सांसद गांव योजना में गोद लेने के कारण जर्जर भवन के निर्माण के लिए बजट मंजूर हो गया है। सीएससी प्रभारी डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। रिक्त पदों पर एएनएम की तैनाती के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।
दशक बाद शुरू हुआ नसबंदी कार्यक्रम
दो दिन पूर्व सीएचसी में महीने में होने वाली महिला नसबंदी कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। जिला चिकित्सालय से सर्जन की टीम ने यहां आकर इस कार्यक्रम की शुरुआत करीब दस साल बाद की है। जिसमें नसबंदी के छह केस किए गए। सीएचसी प्रभारी ने बताया कि हाल में प्रदेश सरकार ने प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया है।
जिसमें सीएचसी से लिवर फंक्शन, किडनी, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी और थायराइड की जांच पूरी तरह फ्री की जा रही है। यहां रोगी का ब्लड सैंपल लेकर गाजियाबाद लैब में भेजा जाता है। तीसरे दिन रिपोर्ट आ जाती है। भाजपा नेता अनुज त्यागी, पूर्व नगराध्यक्ष विजय त्यागी और मनीष गर्ग ने बताया कि करीब दो से ढाई हजार रुपये तक की जांच नि:शुल्क होने लगी हैं।
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करीब दो दशक तत्कालीन भाजपा एमएलए रणधीर सिंह के प्रयास से शासन से चरथावल को सीएचसी का तोहफा मिला था। 30 जून 2006 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने नुमाइश कैंप में रैली के दौरान सीएचसी के शिलापट का लोकार्पण किया था, लेकिन अभी तक सीएचसी वाली सुविधाएं शुरू नहीं की गई हैं। दरअसल, तब शासन से एक सीएचसी का बजट मिला था। वह शाहपुर और चरथावल की सीएचसी में कोल्ड चेन और मीटिंग कक्ष के लिए खर्च कर दिया गया।
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सीएचसी के मानक के अनुरूप यहां छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। जबकि यहां सिर्फ दो जनरल फिजिशियन हैं और पीएचसी वाली पुरानी बिल्डिंग में बैठते हैं। सीएचसी के लिए निर्धारित कक्ष, चिकित्सकों के लिए आवास और ऑपरेशन की सुविधाओं का अभाव है। एक्सरे मशीन नहीं है। पुराने आवास जर्जर और रहने लायक नहीं हैं।
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अधिकांश उपकेंद्रों की हालत जर्जर
सीएचसी के अंतर्गत 29 गांवों के अधिकांश उप स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत जर्जर है। इनमें से नंगला राई, बिरालसी, दूधली और रोनी हरजीपुर समेत सात उपकेंद्रों पर तो अरसे से एएनएम तैनात नहीं हैं। जिससे प्रसव पूर्व महिलाओं की देखभाल और बच्चों का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।
पीपलशाह गांव केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सजीव बालियान द्वारा आदर्श सांसद गांव योजना में गोद लेने के कारण जर्जर भवन के निर्माण के लिए बजट मंजूर हो गया है। सीएससी प्रभारी डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। रिक्त पदों पर एएनएम की तैनाती के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।
दशक बाद शुरू हुआ नसबंदी कार्यक्रम
दो दिन पूर्व सीएचसी में महीने में होने वाली महिला नसबंदी कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। जिला चिकित्सालय से सर्जन की टीम ने यहां आकर इस कार्यक्रम की शुरुआत करीब दस साल बाद की है। जिसमें नसबंदी के छह केस किए गए। सीएचसी प्रभारी ने बताया कि हाल में प्रदेश सरकार ने प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया है।
जिसमें सीएचसी से लिवर फंक्शन, किडनी, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी और थायराइड की जांच पूरी तरह फ्री की जा रही है। यहां रोगी का ब्लड सैंपल लेकर गाजियाबाद लैब में भेजा जाता है। तीसरे दिन रिपोर्ट आ जाती है। भाजपा नेता अनुज त्यागी, पूर्व नगराध्यक्ष विजय त्यागी और मनीष गर्ग ने बताया कि करीब दो से ढाई हजार रुपये तक की जांच नि:शुल्क होने लगी हैं।