फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Enough, we want to forget the pain for life

बहुत हो गया, वो दर्द हम चाहते हैं जिंदगी भर के लिए भूलना

Thu, 27 Aug 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:15 AM IST
विज्ञापन
Enough, we want to forget the pain for life
कवाल के बाजार में वह चौराहा, जहां सचिन व गौरव की हत्या की गई थी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बहुत हो गया, वो दर्द हम चाहते हैं जिंदगी भर के लिए भूलना
विज्ञापन

कवाल (मुजफ्फरनगर)। कवाल में स्थित दिगंबर जैन मंदिर पर लिखा अहिंसापरमो धर्म का संदेश उस दिन भूला दिया गया, जब यहां भरे बाजार मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस घटना को सात साल बीत चुके हैं। इन वर्षों में यहां के लोगों ने काफी दुख-दर्द का दंश झेला। समय व्यतीत होने के साथ ही कवाल के लोग अब दंगे का दर्द भूलकर शांति के साथ जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। आज की तिथि में कवाल के बाजार में चहल पहल है और लोग रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त हैं।
27 अगस्त 2013 की बात है, जब मलिकपुरा के सचिन और गौरव से हुई कहासुनी में कवाल के शाहनवाज की मौत हो गई थी। गुस्साई भीड़ ने बाजार के चौराहे पर ममेरे भाइयों सचिव और गौरव की हत्या कर दी थी। यही कवाल कांड मुजफ्फरनगर दंगे की वजह बना था। घटना को सात साल हो गए। आज कवाल के बाजार में दुकानें खुली हैं। ग्रामीणों की आवाजाही है। चाय और समोसे की दुकान पर लोग बातचीत में मशगूल हैं। जानसठ रोड पर कवाल का मुख्य द्वार है। यहां से जो सड़क मलिकपुरा तक जाती है, उसी पर बाजार बना है। कहीं ज्वेलरी शॉप है तो कहीं मिस्त्री अपने हुनर में लगे हैं। ई- रिक्शा से गुजरती सवारियां दिखाई दीं, वहीं बैंक के बाहर ग्राहकों की कतार लगी थी।
विज्ञापन

सौहार्द का केंद्र रहा है कवाल
कवाल सौहार्द का केंद्र रहा है। गांव में दिगंबर जैन मंदिर के साथ राधा-कृष्ण मंदिर और आदर्श रामलीला कमेटी का भवन है, तो दूसरी ओर मस्जिद है। करीब 14 हजार की आबादी वाला कवाल गांव इतिहास की कई यादें समेटे हुए है। गांव के मौजूदा माहौल में ऐसा कतई महसूस नहीं होता कि यहां हुए तिहरे हत्याकांड से भाईचारे का विश्वास कभी टूट गया था। हालांकि लोगों के जेहन को वो घटना आज भी विचलित कर रही है। बुजुर्ग किसान रघुवीर सिंह कहते हैं कि न जाने किस अनहोनी से वो घटना हुई थी। फिलहाल सब मिल कर सौहार्द से रह रहे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह ने कहा कि कवाल कांड ने आपसी भरोसे को क्षति पहुंचाई थी। हाजी तैयब का कहना है कि सदियों से सभी मिलजुल कर यहां रहे हैं। उक्त घटना कवाल के भाईचारे के लिए कलंक थी। कारोबारी उस्मान ने कहा कि अब उस घटना को भूल जाना ही लोग बेहतर समझते हैं। ग्राम प्रधान नईमा के पति मोहम्मद इस्लाम कहते हैं कि घटना दुखद थी, जिसकी वजह से कवाल को बदनामी भी मिली। अब गांव का सौहार्द और आपसी भाईचारा मजबूत है। लोग घटना को भूल कर आगे बढ़ना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

नफरत की हिंसा में झुलस गया था जिला
मुजफ्फरनगर। कवाल के तिहरे हत्याकांड से जिले का आपसी सौहार्द नफरत की हिंसा में झुलस गया था। आपसी विवाद में मात्र 25 मिनट में ही सब कुछ बिखर गया था। शाहनवाज की अस्पताल में मौत हुई थी। जबकि उग्र लोगों ने सचिन और गौरव को मार डाला था। घटना के बाद तत्कालीन अखिलेश सरकार ने रातोंरात उस समय के डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला कर दिया था। घटना को लेकर पंचायतों का दौर शुरू हुआ। सात सितंबर 2013 को जनपद में दंगा भड़क गया था।
उजड़ गई दुनिया, बिखर गए सपने
(फोटो समाचार)
मलिकपुरा। ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की मौत ने मलिकपुरा के परिवार की खुशियों को उजाड़ दिया। कवाल से करीब तीन किलोमीटर जंगल में बसे मलिकपुरा मजरे में मकानों की तादाद ज्यादा नहीं है। केवल डेढ़ सौ ही मतदाता हैं। खेतीबाड़ी पर सब परिवार निर्भर हैं। घर के दो जवान बेटों की मौत का गम आज भी मलिकपुरा की आबोहवा में दिखता है। परिवार बिखर गया है और सपने टूट गए हैं। गौरव के पिता रविंद्र सिंह अपनी पत्नी सुरेश के साथ शहर में रहने लगे हैं। बेटियां निति और शैली की शादी हो चुकी है। सचिन के पिता बिशन और मां मुनेश छोटे बेटे राहुल के साथ गांव में ही रह रहे हैं। बेटी रीतू की शादी काफी समय पहले कर दी थी। बिशन और मुनेश घटना को याद कर भावुक हो जाते हैं। कहते हैं कि सचिन और गौरव के चले जाने के बाद परिवार की खुशियां छिन गईं। बहू स्वाति पौत्र गगन के साथ मायके पुरबालियान में रहती है। अब मलिकपुरा में मन नहीं लगता, लेकिन रहना मजबूरी है।
शाहनवाज के पिता बोले, घटना ने दिया ताउम्र का दर्द
(फोटो)
कवाल। शाहनवाज के पिता सलीम भी वक्त के साथ बूढे़ हो चले हैं। हालांकि घटना की बातें उन्हें नहीं भूली हैं। कहते हैं कि उन्हें आशा है, कोर्ट उनके मुकदमे में भी न्याय करेगा। कवाल की वारदात ने उन्हें ताउम्र का दर्द दिया है। शाहनवाज की मौत हो गई और दो बेटे जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
दोहरे हत्याकांड में हो चुकी है सात लोगों को उम्रकैद
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में सचिन और गौरव की हुई हत्या में कोर्ट का निर्णय आ चुका है। इस दोहरे हत्याकांड में 8 फरवरी 2019 को एडीजे-7 कोर्ट ने सात आरोपियों मुजस्सिम और उसके भाई मुजम्मिल पुत्रगण नसीम अहमद, फुरकान पुत्र फजला, जहांगीर और उसके भाई नदीम पुत्रगण सलीम, अफजाल और उसके भाई इकबाल पुत्र बुंदू निवासीगण कवाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में मुजम्मिल बुलंदशहर जेल में तथा बाकी सभी आगरा जेल में बंद हैं।

शाहनवाज हत्याकांड विचाराधीन
मुजफ्फरनगर। एसआईसी (स्पेशल विवेचना सेल) ने कवाल कांड की जांच की थी। जांच में एसआईसी ने शाहनवाज हत्याकांड में एफआर लगाई थी। तर्क यह दिया कि सचिन और गौरव ने शाहनवाज की हत्या की थी। उसी समय मौके पर ही इन दोनों की भी हत्या कर दी गई थी। जिस पर शाहनवाज के पिता सलीम की ओर से अदालत में परिवाद दायर किया गया था। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। अब यह मुकदमा जिला जज की कोर्ट में विचाराधीन है। मुकदमे के सभी छह आरोपी रविंद्र सिंह, बिशन, प्रहलाद, तहेंद्र, जितेंद्र और देवेंद्र जमानत पर बाहर हैं।

कवाल के दिगंबर जैन मंदिर पर  लिखा अहिंसा परमो धर्म का संदेश।

कवाल के दिगंबर जैन मंदिर पर लिखा अहिंसा परमो धर्म का संदेश।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

मलिकपुरा निवासी मृतक सचिन के माता-पिता।

मलिकपुरा निवासी मृतक सचिन के माता-पिता।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

कवाल निवासी मृतक शाहनवाज का पिता सलीम अपने आवास पर।

कवाल निवासी मृतक शाहनवाज का पिता सलीम अपने आवास पर।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

कवाल गांव से मलिकपुरा की ओर जाती सड़क।

कवाल गांव से मलिकपुरा की ओर जाती सड़क।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

मुजफ्फरनगर- जानसठ मार्ग पर कवाल गांव का मुख्य द्वार।

मुजफ्फरनगर- जानसठ मार्ग पर कवाल गांव का मुख्य द्वार।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed