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टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं मॉडल स्कूल के बच्चे
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:40 AM IST
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इंग्लिश मीडियम स्कूल में टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा विभाग के शहर के एक मात्र इंग्लिश मीडियम मॉडल स्कूल में बच्चों के लिए पेयजल, फर्नीचर और बिजली तक की सुविधा नहीं है। बिल जमा नहीं होने पर बिजली का कनेक्शन कट चुका है। भीषण गर्मी में बच्चों का हाल बेहाल है। प्रशासन ने स्कूल के दशा सुधारने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। स्कूल में बच्चों की संख्या तो बढ़ गई हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाई टाट पर बैठकर ही करनी पड़ रही है।
प्रदेश सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा में सुधार लाने के लिए प्रत्येक जिले में मॉडल स्कूल स्थापित किए हैं। इन स्कूलों को इंग्लिश मीडियम बनाया गया है। परीक्षा के बाद इन विद्यालयों में अलग से शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। स्कूलों को शिक्षा का माहौल देने का प्रयास किया गया है।
शहर में महावीर चौक स्थित जिला परिषद मार्केट के मध्य स्थित परिषदीय स्कूल को मॉडल स्कूल घोषित किया गया है। प्रधानाध्यापक सहित पांच टीचर की व्यवस्था यहां की गई है। मॉडल स्कूल बनने के बाद यहां बच्चों की संख्या बढ़ी है। पिछले वर्ष इस स्कूल में 60 बच्चे थे। इस बार अब तक संख्या 90 पर पहुंच गई है।
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स्कूल में बच्चे भी हैं और शिक्षक भी हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं है। 90 बच्चों के मुकाबले केवल 50 का ही फर्नीचर है। बाकी को नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार सुबह 8.35 बजे जब स्कूल पहुंची, तो आधे बच्चे मेज और आधे नीचे टाट पर बैठकर पढ़ते मिले।
बिजली के बिना बच्चे उमस भरी गर्मी में पसीने से तरबतर थे। जानकारी करने पर प्रधानाध्यापिका दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि विद्यालय में बिजली का कनेक्शन है, लेकिन बिल 11 हजार रुपया हो चुका है। विभाग ने पैसा जमा नहीं किया है, तो कनेक्शन कट गया है।
पेयजल के नाम पर यहां मात्र एक हैंडपंप मिला। जूनियर हाईस्कूल के बच्चे भी इसी हैंडपंप से पानी पीते हैं। शहर के बीच में होने के बाद भी पानी की टंकी की अलग से व्यवस्था नगर पालिका और प्रशासन ने नहीं की है। बाहर स्कूल की चहारदीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी अंदर कूद कर चला आता है।
अच्छा ग्राउंड होने के बाद भी सुंदर नहीं है। विद्यालय में एंट्री गेट टूटा है, ऐसे में चोरी का खतरा भी बना रहता है। बरसात में बच्चों के सामने समस्या आ जाती है। बारिश के बाद स्कूल के गेट पर पानी भर जाता है। स्कूल के बच्चे मंतव्य, सालिम, सुनील ने बताया कि उन्हेें पानी के बीच से ही आना-जाना पड़ता है।
पब्लिक स्कूलों से आ रहे बच्चे
मुजफ्फरनगर। मॉडल स्कूल में इस बार 20 नए बच्चे आए हैं। इनमें सूजडू, इंद्रा कालोनी, तेल गोदाम और केशवपुरी के बच्चे हैं। ये बच्चे पब्लिक स्कूलों से नाम कटवाकर यहां आए हैं। स्कूली बच्चे तालिब, सलीम, मरियम आदि का कहना है कि पढ़ाई तो अच्छी हो रही है, लेकिन नीचे बैठना पड़ रहा है।
शराब की बोतलें और बीड़ी, सिगरेट पड़ी हुई मिलती है
मुजफ्फरनगर। प्रधानाध्यापक दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि शिक्षक काफी योग्य हैं। प्रशासन सुविधाएं मुहैया करा दे तो हम पब्लिक स्कूलों को पछाड़ देंगे। विद्यालय की सुरक्षा के लिए चारों तरफ की दीवार बड़ी होना जरूरी है। यहां छुट्टी के बाद कुछ लोग अंदर कूद आते हैं। सुबह को स्कूल खोलते समय शराब की बोतलें, बीड़ी, सिगरेट पड़ी हुई मिलती है।
जिले में 50 मॉडल स्कूल संचालित
मुजफ्फरनगर। शासन ने जिले में प्रारंभ में 65 स्कूलों को मॉडल स्कूल के लिए चयनित किया था, लेकिन बाद में 50 स्कूलों में ही व्यवस्था लागू हो पाई। जो मॉडल स्कूल चयनित किए गए उनमें सदर ब्लाक में 11, खतौली में चार, बुढ़ाना में सात, शाहपुर में छह, बघरा में नौ, पुरकाजी में पांच, जानसठ में नौ, मोरना में पांच, चरथावल में सात, मुजफ्फरनगर शहर में एक विद्यालय चयनित हुआ।
हम लगातार कर रहे डिमांड
मुजफ्फरनगर। नगर शिक्षा अधिकारी सविता डबराल का कहना है कि शहर के मॉडल स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ रही है। सुविधाओं की कमी के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म पर डिमांड की गई है। फर्नीचर और पेयजल की समस्या को लेकर विभाग गंभीर है। बिजली का कनेक्शन जुड़वाया जाएगा। विद्यालय में सुविधाएं देकर इस विद्यालय को पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर बेहतर बनाया जाएगा - रणवीर सैनी, जगेंद्र उज्ज्वल
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प्रदेश सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा में सुधार लाने के लिए प्रत्येक जिले में मॉडल स्कूल स्थापित किए हैं। इन स्कूलों को इंग्लिश मीडियम बनाया गया है। परीक्षा के बाद इन विद्यालयों में अलग से शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। स्कूलों को शिक्षा का माहौल देने का प्रयास किया गया है।
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शहर में महावीर चौक स्थित जिला परिषद मार्केट के मध्य स्थित परिषदीय स्कूल को मॉडल स्कूल घोषित किया गया है। प्रधानाध्यापक सहित पांच टीचर की व्यवस्था यहां की गई है। मॉडल स्कूल बनने के बाद यहां बच्चों की संख्या बढ़ी है। पिछले वर्ष इस स्कूल में 60 बच्चे थे। इस बार अब तक संख्या 90 पर पहुंच गई है।
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स्कूल में बच्चे भी हैं और शिक्षक भी हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं है। 90 बच्चों के मुकाबले केवल 50 का ही फर्नीचर है। बाकी को नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार सुबह 8.35 बजे जब स्कूल पहुंची, तो आधे बच्चे मेज और आधे नीचे टाट पर बैठकर पढ़ते मिले।
बिजली के बिना बच्चे उमस भरी गर्मी में पसीने से तरबतर थे। जानकारी करने पर प्रधानाध्यापिका दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि विद्यालय में बिजली का कनेक्शन है, लेकिन बिल 11 हजार रुपया हो चुका है। विभाग ने पैसा जमा नहीं किया है, तो कनेक्शन कट गया है।
पेयजल के नाम पर यहां मात्र एक हैंडपंप मिला। जूनियर हाईस्कूल के बच्चे भी इसी हैंडपंप से पानी पीते हैं। शहर के बीच में होने के बाद भी पानी की टंकी की अलग से व्यवस्था नगर पालिका और प्रशासन ने नहीं की है। बाहर स्कूल की चहारदीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी अंदर कूद कर चला आता है।
अच्छा ग्राउंड होने के बाद भी सुंदर नहीं है। विद्यालय में एंट्री गेट टूटा है, ऐसे में चोरी का खतरा भी बना रहता है। बरसात में बच्चों के सामने समस्या आ जाती है। बारिश के बाद स्कूल के गेट पर पानी भर जाता है। स्कूल के बच्चे मंतव्य, सालिम, सुनील ने बताया कि उन्हेें पानी के बीच से ही आना-जाना पड़ता है।
पब्लिक स्कूलों से आ रहे बच्चे
मुजफ्फरनगर। मॉडल स्कूल में इस बार 20 नए बच्चे आए हैं। इनमें सूजडू, इंद्रा कालोनी, तेल गोदाम और केशवपुरी के बच्चे हैं। ये बच्चे पब्लिक स्कूलों से नाम कटवाकर यहां आए हैं। स्कूली बच्चे तालिब, सलीम, मरियम आदि का कहना है कि पढ़ाई तो अच्छी हो रही है, लेकिन नीचे बैठना पड़ रहा है।
शराब की बोतलें और बीड़ी, सिगरेट पड़ी हुई मिलती है
मुजफ्फरनगर। प्रधानाध्यापक दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि शिक्षक काफी योग्य हैं। प्रशासन सुविधाएं मुहैया करा दे तो हम पब्लिक स्कूलों को पछाड़ देंगे। विद्यालय की सुरक्षा के लिए चारों तरफ की दीवार बड़ी होना जरूरी है। यहां छुट्टी के बाद कुछ लोग अंदर कूद आते हैं। सुबह को स्कूल खोलते समय शराब की बोतलें, बीड़ी, सिगरेट पड़ी हुई मिलती है।
जिले में 50 मॉडल स्कूल संचालित
मुजफ्फरनगर। शासन ने जिले में प्रारंभ में 65 स्कूलों को मॉडल स्कूल के लिए चयनित किया था, लेकिन बाद में 50 स्कूलों में ही व्यवस्था लागू हो पाई। जो मॉडल स्कूल चयनित किए गए उनमें सदर ब्लाक में 11, खतौली में चार, बुढ़ाना में सात, शाहपुर में छह, बघरा में नौ, पुरकाजी में पांच, जानसठ में नौ, मोरना में पांच, चरथावल में सात, मुजफ्फरनगर शहर में एक विद्यालय चयनित हुआ।
हम लगातार कर रहे डिमांड
मुजफ्फरनगर। नगर शिक्षा अधिकारी सविता डबराल का कहना है कि शहर के मॉडल स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ रही है। सुविधाओं की कमी के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म पर डिमांड की गई है। फर्नीचर और पेयजल की समस्या को लेकर विभाग गंभीर है। बिजली का कनेक्शन जुड़वाया जाएगा। विद्यालय में सुविधाएं देकर इस विद्यालय को पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर बेहतर बनाया जाएगा - रणवीर सैनी, जगेंद्र उज्ज्वल