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आठ साल के मासूम को मां के साथ नहीं जाने दिया
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देवबंद। नगर में मतदान केंद्र के बाहर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी इतना क्रूर भी हो सकता है। इसकी एक बानगी इस्लामिया डिग्री कॉलेज में बने मतदान केंद्र पर देखने को मिली। मां के साथ मतदान केंद्र पहुंचे महज आठ साल के बच्चे को पुलिसकर्मी ने भीतर ही नहीं जाने दिया। मजबूरी के चलते मां को अपने बच्चे को भीड़ में अकेला छोड़कर जाना पड़ा। डरा, सहमा बच्चा भीड़ में सड़क के एक किनारे पर खड़ा रहा। महिला असगरी का कहना था कि घर पर कोई नहीं था। जिसके चलते वह बच्चे को साथ लेकर आ गई। ड्यूटी पर खड़े एक दरोगा ने मान मनौव्वल के बाद भी बच्चे के साथ भीतर नहीं जाने दिया। जिसके चलते उसे मासूम को अल्लाह के सहारे छोड़कर जाना पड़ा। उसने बताया कि बच्चे के चक्कर में उसे यह भी ध्यान नहीं कि उसने किसको वोट डाला है।
मीडियाकर्मियों को रोकते रहे पुलिसकर्मी
देवबंद। इस बार लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व की कवरेज करना मीडिया कर्मियों के लिए टेड़ी खीर रहा। मतदान केंद्रों के बाहर खड़े पुलिसकर्मी मोबाइल और कैमरों के साथ मीडियाकर्मियों को भीतर ही नहीं जाने दे रहे थे। एक मतदान केंद्र पर मीडियाकर्मी ने वहां पहुंचे इंस्पेक्टर प्रभाकर कैंतुरा से इसकी शिकायत की तो उन्होंने पहले तो यह कहकर मीडियाकर्मी को भीतर जाने दिया कि उन्हें मोबाइल व कैमरा ले जाने की अनुमति है। बाद में एक अन्य अधिकारी के कहने पर उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया। जिसके चलते कुछ केंद्रों पर मीडियाकर्मियों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
सरकार चुनने के लिए महिलाओं में दिखा खासा उत्साह
देवबंद। अपनी पसंद की सरकार चुनने के लिए महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। मतदान शुरू होने से समाप्त होने तक लगभग सभी मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें लगी दिखाई दीं, जबकि इसमें पुरुषों की संख्या कम रही। दोपहर बाद पुरुष मतदान केंद्रों पर वोट डालने पहुंचे।
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बिना नाश्ते बैठे हैं तेजी कहां से लाएं
देवबंद। इस्लामिया डिग्री कॉलेज में एक बूथ में ड्यूटी कर रहे पीठासीन अधिकारी बहुत से धीमी गति से कार्य कर रहे थे। जिसके चलते मतदाताओं को वोट डालने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। जब इस सुस्ती के बारे में पीठासीन अधिकारी से पूछा गया तो कहा जब बिना नाश्ते के बैठे हैं तो काम में तेजी कहां से आएगी। बोले, सुबह से किसी ने पानी तक नहीं पूछा है।
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मीडियाकर्मियों को रोकते रहे पुलिसकर्मी
देवबंद। इस बार लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व की कवरेज करना मीडिया कर्मियों के लिए टेड़ी खीर रहा। मतदान केंद्रों के बाहर खड़े पुलिसकर्मी मोबाइल और कैमरों के साथ मीडियाकर्मियों को भीतर ही नहीं जाने दे रहे थे। एक मतदान केंद्र पर मीडियाकर्मी ने वहां पहुंचे इंस्पेक्टर प्रभाकर कैंतुरा से इसकी शिकायत की तो उन्होंने पहले तो यह कहकर मीडियाकर्मी को भीतर जाने दिया कि उन्हें मोबाइल व कैमरा ले जाने की अनुमति है। बाद में एक अन्य अधिकारी के कहने पर उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया। जिसके चलते कुछ केंद्रों पर मीडियाकर्मियों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
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सरकार चुनने के लिए महिलाओं में दिखा खासा उत्साह
देवबंद। अपनी पसंद की सरकार चुनने के लिए महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। मतदान शुरू होने से समाप्त होने तक लगभग सभी मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें लगी दिखाई दीं, जबकि इसमें पुरुषों की संख्या कम रही। दोपहर बाद पुरुष मतदान केंद्रों पर वोट डालने पहुंचे।
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बिना नाश्ते बैठे हैं तेजी कहां से लाएं
देवबंद। इस्लामिया डिग्री कॉलेज में एक बूथ में ड्यूटी कर रहे पीठासीन अधिकारी बहुत से धीमी गति से कार्य कर रहे थे। जिसके चलते मतदाताओं को वोट डालने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। जब इस सुस्ती के बारे में पीठासीन अधिकारी से पूछा गया तो कहा जब बिना नाश्ते के बैठे हैं तो काम में तेजी कहां से आएगी। बोले, सुबह से किसी ने पानी तक नहीं पूछा है।