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व्यक्ति के जीवन को नष्ट करता है अहंकार : शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। कथा व्यास धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने कहा कि अहंकार व्यक्ति के जीवन को नष्ट करने का साधन है। भगवान भाव के भूखे हैं, अपितु किसी वस्तु के नहीं।
कस्बे में बुढ़ाना रोड पर एक बैंक्वेट हाॅल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने कहा कि प्रभु की सेवा के लिए दुर्योधन ने 56 व्यंजन बनवाएं। मगर, दुर्योधन में भाव का अभाव होने के कारण प्रभु ने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन दो ही प्रकार के अच्छे लगते हैं, यदि पेट में भूख हो या खिलाने वाले के भाव अच्छे हो। इसलिए जीवन में अच्छे भाव की प्रधानता है। अहंकार वह बीमारी है जो जीवन को खोखला बना देती है। हरिमोहन सिंघल, राजकुमार गर्ग, मनोज सिंघल, रजत गर्ग, रवि गर्ग, पंकज गोयल व टिंकू मित्तल मौजूद रहे।
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शाहपुर। कथा व्यास धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने कहा कि अहंकार व्यक्ति के जीवन को नष्ट करने का साधन है। भगवान भाव के भूखे हैं, अपितु किसी वस्तु के नहीं।
कस्बे में बुढ़ाना रोड पर एक बैंक्वेट हाॅल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने कहा कि प्रभु की सेवा के लिए दुर्योधन ने 56 व्यंजन बनवाएं। मगर, दुर्योधन में भाव का अभाव होने के कारण प्रभु ने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन दो ही प्रकार के अच्छे लगते हैं, यदि पेट में भूख हो या खिलाने वाले के भाव अच्छे हो। इसलिए जीवन में अच्छे भाव की प्रधानता है। अहंकार वह बीमारी है जो जीवन को खोखला बना देती है। हरिमोहन सिंघल, राजकुमार गर्ग, मनोज सिंघल, रजत गर्ग, रवि गर्ग, पंकज गोयल व टिंकू मित्तल मौजूद रहे।
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