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मित्र सुदामा से मिलने नंगे पांव दौड़ पड़े द्वाराधीश : सरस्वती
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देवबंद में चल रही श्रीमद्भावत कथा में भजनों पर झूमते श्रद्धालु
- फोटो : DEVBAND
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मित्र सुदामा से मिलने नंगे पांव दौड़ पड़े द्वारकाधीश : सरस्वती
देवबंद (सहारनपुर)। साध्वी रक्षा सरस्वती ने बताया कि हम परमात्मा को जिस रूप में पूजते हैं, वह उसी रूप में हमें नजर आते हैं। कोई उन्हें कृष्ण, कोई श्री राम, कोई दुर्गा तो कोई शंकर के रूप में। लेकिन सब में परमात्मा एक ही है। एक शक्ति है सिर्फ रूप अनेक हैं।
श्री गीता जयंती के उपलक्ष्य में श्री गीता भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सातवें दिन कथा व्यास साध्वी रक्षा सरस्वती ने कृष्ण सुदामा की मित्रता का सजीव वर्णन किया। बताया कि सुदामा एक महाज्ञानी, विद्वान व महा ब्राह्मण थे। वह गरीब जरूर थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। सुदामा की पत्नी सुशीला भी सद्मार्ग पर चलने वाले अपने पतिव्रत धर्म का पूर्णतया पालन करती थी। आज के युग में कृष्ण सुदामा जैसी मित्रता अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलती है। जब सुदामा द्वारकाधीश से मिलने उनके पास आए तो कृष्ण नाम सुनते ही अपनी सुधबुध खोकर नंगे पांव उनसे मिलने दौड़ पड़े। सुदामा को देखते ही उन्हें गले लगा लिया और अपने आंसुओं से सुदामा के पैरों को धो डाला। सुदामा को दो लोक का राज्य भी दे दिया। साध्वी ने बताया कि हमारे द्वार पर यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति आए तो उसे दुत्कारना नहीं चाहिए। जितना संभव हो सके उसकी मदद करें। कथा के यजमान आदेश गर्ग व मीनू गर्ग रहे। इस मौके पर गोपाल अरोड़ा, प्रमोद बंसल, राजकुमार गर्ग, भुवन किशोर, रितेश बंसल, ममता रस्तौगी, अखिल शर्मा, डा. आर्यव्रत शर्मा, छवि बंसल, मंजू शर्मा व पल्लवी वर्मा आदि रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। साध्वी रक्षा सरस्वती ने बताया कि हम परमात्मा को जिस रूप में पूजते हैं, वह उसी रूप में हमें नजर आते हैं। कोई उन्हें कृष्ण, कोई श्री राम, कोई दुर्गा तो कोई शंकर के रूप में। लेकिन सब में परमात्मा एक ही है। एक शक्ति है सिर्फ रूप अनेक हैं।
श्री गीता जयंती के उपलक्ष्य में श्री गीता भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सातवें दिन कथा व्यास साध्वी रक्षा सरस्वती ने कृष्ण सुदामा की मित्रता का सजीव वर्णन किया। बताया कि सुदामा एक महाज्ञानी, विद्वान व महा ब्राह्मण थे। वह गरीब जरूर थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। सुदामा की पत्नी सुशीला भी सद्मार्ग पर चलने वाले अपने पतिव्रत धर्म का पूर्णतया पालन करती थी। आज के युग में कृष्ण सुदामा जैसी मित्रता अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलती है। जब सुदामा द्वारकाधीश से मिलने उनके पास आए तो कृष्ण नाम सुनते ही अपनी सुधबुध खोकर नंगे पांव उनसे मिलने दौड़ पड़े। सुदामा को देखते ही उन्हें गले लगा लिया और अपने आंसुओं से सुदामा के पैरों को धो डाला। सुदामा को दो लोक का राज्य भी दे दिया। साध्वी ने बताया कि हमारे द्वार पर यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति आए तो उसे दुत्कारना नहीं चाहिए। जितना संभव हो सके उसकी मदद करें। कथा के यजमान आदेश गर्ग व मीनू गर्ग रहे। इस मौके पर गोपाल अरोड़ा, प्रमोद बंसल, राजकुमार गर्ग, भुवन किशोर, रितेश बंसल, ममता रस्तौगी, अखिल शर्मा, डा. आर्यव्रत शर्मा, छवि बंसल, मंजू शर्मा व पल्लवी वर्मा आदि रहे।
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