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श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है दूधली का दुर्गा मंदिर

Thu, 15 Apr 2021 12:13 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Apr 2021 12:13 AM IST
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Durga Temple of Dudhli is the center of faith of devotees
दूधली में स्थित दुर्गा मंदिर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
चरथावल। अटूट श्रद्धा और आस्था का केंद्र दूधली के दुर्गा मंदिर अतीत अभिभूत करने वाला है। ग्रामीणों की मान्यता है आदिशक्ति मां दुर्गा के मंदिर में भक्तों द्वारा सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है। चैत्र नवरात्रों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
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चरथावल विकास खंड क्षेत्र का गांव दूधली स्वतंत्रता सेनानियों की धरती लिए जाना जाता है। बिरालसी मार्ग से गांव प्रवेश करने पर बस स्टैंड स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर दर्शन का केंद्र है। करीब तीन दशक पहले सेना से रिटायर इंद्र सिंह फौजी ने मंदिर का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग से कराया था। ओमवीर सिंह ने जमीन दी और परिसर का सुंदरीकरण कराकर यहां भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई।
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मंदिर कमेटी के अध्यक्ष संजय राणा ने बताया कि उस समय प्राण प्रतिष्ठा के लिए कोलकाता मां काली मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, चंडी देवी हरिद्वार और मां शाकंभरी देवी से पावन ज्योति लाकर दीप प्रज्वलित किया गया था। मंदिर प्रांगण में रोजाना कमेटी के लोग नियमानुसार पूजा अर्चना करते है। मीटिंग हॉल में विभिन्न महापुरुषों के चित्र लगाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया है।
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- मंदिर की महत्ता से कई संस्मरण जुड़े हैं। एक बार उनके 12 बीघा के खेत में सांपों के झुंड ने परेशान कर दिया। हजारों सर्प निकलने से परिजन परेशान हो गए। उसी वक्त पिता इंद्र सिंह ने तमाम कामकाज छोड़कर मंदिर निर्माण पूरा कराया और रोजाना नियमित देखरेख का जिम्मा लंबा समय तक निभाया। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद किसी भी व्यक्ति को गांव में भूतप्रेत का साया नहीं आया। - उदय पुंडीर, संघ कार्यकर्ता

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17 सदस्यों की कमेटी है गठित
मंदिर की भव्यता बरकरार रखने के लिए 17 युवाओं की कमेटी गठित की गई है। कमेटी से जुड़े लोग रोजाना मंदिर में साफ सफाई के बाद मां की आराधना आरती आदि करते हैं। दीपावली पर्व पर मंदिर से युवाओं की टोली गुग्गल और लोबान से मिश्रित ज्योति लेकर पूरे गांव में घर-घर घुमाती है। यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
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