फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Due to wrestling, what was found in life: Divya

‘जिंदगी में जो मिला, कुश्ती की बदौलत’

Sat, 29 Aug 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 12:12 AM IST
विज्ञापन
Due to wrestling, what was found in life: Divya
बेटी दिव्या के पदक जीतने पर खुशी मनाते पिता सूरजवीर एवं मां संयोगिता सेन। (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। जिंदगी में जो मिला, वो सब कुश्ती की बदौलत है। बाबा राजेंद्र सेन दंगलों में बड़े दांव लगाते थे। उन्होंने मेरे पिता सूरजवीर को पहलवानी के गुर सिखाए, मगर मुफलिसी और सही मार्गदर्शन न मिलने से उन्हें मुकम्मल मंजिल नहीं मिली।
विज्ञापन

देश की शीर्ष महिला मल्ल दिव्या काकरान को अपने परिवार का हर संघर्ष याद है। कहती हैं, पापा ने मेरे लिए बहुत संघर्ष किया। उन्हीं के त्याग और फर्ज की बदौलत अर्जुन अवार्ड पाने का गर्व मिल रहा है। राष्ट्रपति से मिले अलंकरण को सबसे पहले पापा के गले में ही डालूंगी। मुझे कुश्ती सीखने को पापा गांव पुरबालियान से दिल्ली आए। हम गोकलपुर में किराए के घर में रहने लगे। घर खर्च चलाने को मम्मी संयोगिता ने कपड़े के लंगोट सिलने शुरू किए, जिन्हें पापा दंगलों में बेचते थे। बड़े भाई देव को उन्होंने सबसे पहले अखाड़े में प्रशिक्षण दिलाया। मेरा मन भी पढ़ाई में नहीं लगता था। मां स्कूल छोड़ने जाती थी, मैं बीच में ही क्लास छोड़ घर लौट आती थी। एक दिन पापा मुझे दिल्ली के राजकुमार गोस्वामी के अखाड़े में ले गए। लड़कों के साथ कुश्ती खेलने का मौका दिया। जज्बा और हौसला देख वे भांप गए कि बेटी में दम है। आर्थिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने मेरी खुराक पर ध्यान दिया। सुबह चार बजे अखाड़े में ले जाते।
विज्ञापन

जैसे ये बात नाते- रिश्तेदारों को पता चली कि बेटी को पहलवानी करा रहे हैं, उन्हें नाराजगी भी झेलनी पड़ी। बाबा राजेंद्र और दादी प्रेमवती भी तब नरम पड़े, जब मुझे दंगलों में पहचान मिलने लगी। पहली कुश्ती नौ साल की उम्र में जीत पर 30 रुपया इनाम मिला था। दिव्या बताती हैं कि राष्ट्रीय कुश्ती में सफलताएं मिली, तो आत्मविश्वास बढ़ता गया। वर्ष 2018 में गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने का अनुभव कारगर साबित हुआ। बीते साल पहली बार एशियाड खेलने जकार्ता गई और कांस्य पदक जीतकर लौटी। अब ओलंपिक पर नजरें है। दिल्ली के शक्तिनगर गुरु प्रेमनाथ अखाड़े में पसीना बहाती हूं। भाई देव और दीपक सेन अभ्यास में मदद करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्कूल खेलों में नहीं मिला था इनाम तो खूब रोई थी
मुजफ्फरनगर। स्कूल के वार्षिक खेलों में कक्षा सात की पढ़ाई के दौरान दिव्या को कोई इनाम नहीं मिला तो वो खूब रोई थी। वह बताती हैं कि पापा ने कहा, कोई बात नहीं, तुम्हें आगे बड़े पदक मिलेंगे। बचपन में मैं मोटी थी। दौड़ भी नहीं सकती थी। मम्मी-पापा ने विश्वास किया और नतीजा सामने है।
म्यूजिक पर डांस पसंद तो हरियाणवी गाने भी
मुजफ्फरनगर। मुश्किलों के झंझावत को पार कर महिला कुश्ती में चमकी दिव्या बेहद खुशमिजाज हैं और बेबाक बोलती हैं। वह ग्लैमरस कपड़े पहनने, गाने और डांस की शौकीन है। फिल्मों का शौक है, तो हरियाणवी गाने भी सुनती हैं। बास्केटबॉल, फुटबाल खेलना भी पसंद है। यूट्यूब पर अपने वीडियो शेयर करती रहती हैं। फिलहाल वह शाहदरा रेलवे स्टेशन पर वरिष्ठ टिकट निरीक्षक है। उन्हें उम्मीद है कि यूपी सरकार खेल कोटे में राजपत्रित अधिकारी बनाने का वायदा पूरा करेगी। एक कंपनी उनके कपड़े स्पांसर कर रही है।
बेटी ने मस्तक ऊंचा कर दिया : सूरजवीर
मुजफ्फरनगर। पिता सूरज वीर पहलवान बताते हैं कि बेटी दिव्या शाकाहारी है। उसका डाइट चार्ट मुझे ही संभालना होता है, ताकि पहलवानी जैसे ताकतवर खेल की खुराक बेटी को मिले। जब दंगलों में ये सुनता था कि लंगोट बेचने वाले की बेटी कुश्ती जीत गई तो आंखों में आंसू आ जाते थे। अब अर्जुन पुरस्कार मिलना गौरव के पल हैं। बेटी दिव्या ने अपनी उपलब्धि से मेरे मस्तक ऊंचा कर दिया है। मम्मी संयोगिता बताती हैं कि बेटी की कुश्ती का खर्च उठाने को एक बार मंगलसूत्र सहित गहने गिरवी रख दिये थे। बेटी कुश्ती विजेता बनी तो इनाम की रकम से मुझे सोने की अंगूठियां गिफ्ट की। कॉमनवेल्थ में मेडल जीतने पर उसने दादा-दादी को हवाई जहाज में सफर कराया था।

मामा के घर भी खुशियां छाईं
मुजफ्फरनगर। दिव्या के मामा शहर के गांधीनगर में रहते है। दिव्या की कामयाबी से मामा के घर में भी उल्लास है। मामा संजय, सोनू और मामी सुमन, गीता कहते हैं कि दिव्या ने अपनी सफलता से गांव, जिले और प्रदेश से लेकर देश को गौरवांवित किया है। हमें दिव्या पर फख्र है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed