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Muzaffarnagar News: सुजड़ू में सड़क पर बह रहा नाली का पानी
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मुजफ्फरनगर। सीमा विस्तार में शहर में शामिल होने के बाद भी सुजड़ू गांव सुविधाओं से वंचित है। 50 हजार आबादी होने के बावजूद भी यहां मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है।
शहर के खालापार से सटा सुजड़ू गांव सीमा विस्तार के बाद शहर का हिस्सा हो गया है। गांव मेरठ रोड पर बसा है। गांव का बाजार मुख्य मार्ग पर ही है। मुख्य मार्ग पर बना नाला यहां पूरी तरह अटा पड़ा है। दुकानदार नाले के गंदे पानी की बदबू और कूड़े से परेशान है। नाले का पानी सड़क पर भी आ जाता है।
यहां के लोगों की सबसे बड़ी समस्या नाले के पानी की निकासी नहीं होना है। सुजड़ू गांव में प्रवेश करते ही पहली सड़क जो गांव में जाती है, उस पर नाली का पानी सड़क पर बह रहा है। तालाब के निकट सड़क पर लोग कूड़ा डाल रहे हैं। यहां एक बैनर भी लगा है जिस पर लिखा है, यहां कूड़ा डालना मना है।
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गांव में सफाई व्यवस्था बहुत ही खराब है। शहर की तरह प्रतिदिन ढंग से सफाई नहीं हो रही है। बिजली की लाइन भी कई जगह जर्जर हालत में है। गांव में कई स्थानों पर सड़कें टूटी है, जिनके बनाए जाने का इंतजार है। बड़ी बात यह है कि 50 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी इंटर कॉलेज नहीं है।
वार्ड में मात्र छह कर्मचारी
फोटो
सुजड़ू के वार्ड नंबर 29 सभासद मशरूर का कहना है कि उनका वार्ड काफी बड़ा है। जो एटूजेड, आवास विकास आदि तक फैला है। इस वार्ड में मात्र छह सफाईकर्मी हैं। प्रतिदिन सभी जगह सफाई नहीं हो पाती। नालियों का चौड़ीकरण जरूरी है। गांव में 50 हजार की आबादी पर एक भी इंटर कॉलेज नहीं है। बेटियों के सामने शिक्षा की बड़ी समस्या है।
नाले के पानी की बदबू से परेशान
सुजड़ू के मुख्य मार्ग पर व्यापार करने वाले मोहम्मद फहीम का कहना है कि गांव के मुख्य नाले के पानी की निकासी नहीं होती। पानी भरा रहता है। नाली की सफाई कोई नहीं करता। बदबू में हमारा यहां दुकान पर बैठना मुश्किल है।
सफाई की व्यवस्था अच्छी नहीं
मुख्य मार्ग पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले खिलेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में सफाई की व्यवस्था अच्छी नहीं है। बड़ा गांव हैं सफाई कर्मचारी कम है। सफाई कर्मी केवल औपचारिकता पूरी करते हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
शहर में आने का कोई लाभ नहीं
दीपक शर्मा कहते हैं कि शहर में आने से हाउस टैक्स बढ़ गया। शहर का कोई लाभ यहां नहीं मिल पा रहा है। बिजली आपूर्ति यहां 24 घंटे नहीं हो रही। जर्जर तार कभी भी टूट जाते हैं, ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं।
खुद ही करनी पड़ती है नाली की सफाई
रुस्तम चौधरी का कहना है कि उनके घर के सामने नाली में पानी भरा पड़ा है। सफाई कर्मचारी आता नहीं है। खुद ही सफाई करनी पड़ती है। सड़क पर कूड़ा भरा पड़ा है।
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शहर के खालापार से सटा सुजड़ू गांव सीमा विस्तार के बाद शहर का हिस्सा हो गया है। गांव मेरठ रोड पर बसा है। गांव का बाजार मुख्य मार्ग पर ही है। मुख्य मार्ग पर बना नाला यहां पूरी तरह अटा पड़ा है। दुकानदार नाले के गंदे पानी की बदबू और कूड़े से परेशान है। नाले का पानी सड़क पर भी आ जाता है।
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यहां के लोगों की सबसे बड़ी समस्या नाले के पानी की निकासी नहीं होना है। सुजड़ू गांव में प्रवेश करते ही पहली सड़क जो गांव में जाती है, उस पर नाली का पानी सड़क पर बह रहा है। तालाब के निकट सड़क पर लोग कूड़ा डाल रहे हैं। यहां एक बैनर भी लगा है जिस पर लिखा है, यहां कूड़ा डालना मना है।
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गांव में सफाई व्यवस्था बहुत ही खराब है। शहर की तरह प्रतिदिन ढंग से सफाई नहीं हो रही है। बिजली की लाइन भी कई जगह जर्जर हालत में है। गांव में कई स्थानों पर सड़कें टूटी है, जिनके बनाए जाने का इंतजार है। बड़ी बात यह है कि 50 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी इंटर कॉलेज नहीं है।
वार्ड में मात्र छह कर्मचारी
फोटो
सुजड़ू के वार्ड नंबर 29 सभासद मशरूर का कहना है कि उनका वार्ड काफी बड़ा है। जो एटूजेड, आवास विकास आदि तक फैला है। इस वार्ड में मात्र छह सफाईकर्मी हैं। प्रतिदिन सभी जगह सफाई नहीं हो पाती। नालियों का चौड़ीकरण जरूरी है। गांव में 50 हजार की आबादी पर एक भी इंटर कॉलेज नहीं है। बेटियों के सामने शिक्षा की बड़ी समस्या है।
नाले के पानी की बदबू से परेशान
सुजड़ू के मुख्य मार्ग पर व्यापार करने वाले मोहम्मद फहीम का कहना है कि गांव के मुख्य नाले के पानी की निकासी नहीं होती। पानी भरा रहता है। नाली की सफाई कोई नहीं करता। बदबू में हमारा यहां दुकान पर बैठना मुश्किल है।
सफाई की व्यवस्था अच्छी नहीं
मुख्य मार्ग पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले खिलेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में सफाई की व्यवस्था अच्छी नहीं है। बड़ा गांव हैं सफाई कर्मचारी कम है। सफाई कर्मी केवल औपचारिकता पूरी करते हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
शहर में आने का कोई लाभ नहीं
दीपक शर्मा कहते हैं कि शहर में आने से हाउस टैक्स बढ़ गया। शहर का कोई लाभ यहां नहीं मिल पा रहा है। बिजली आपूर्ति यहां 24 घंटे नहीं हो रही। जर्जर तार कभी भी टूट जाते हैं, ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं।
खुद ही करनी पड़ती है नाली की सफाई
रुस्तम चौधरी का कहना है कि उनके घर के सामने नाली में पानी भरा पड़ा है। सफाई कर्मचारी आता नहीं है। खुद ही सफाई करनी पड़ती है। सड़क पर कूड़ा भरा पड़ा है।