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Muzaffarnagar News: यूएसए से आए डॉ. ऑगस्टिन एनटेमाफैक ने एंटी इबोला दवा खोज पर की चर्चा
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बिजनौर। भगवंत ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों, कंपनियों के सीईओ, अन्य विशेषज्ञ पहुंचे। कार्यक्रम में डॉ. ऑगस्टिन एनटेमाफैक (अनुसंधान वैज्ञानिक, इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन, यूएसए) ने एंटी-इबोला दवा खोज पर चर्चा की।
उन्होंने इबोला वायरस से निपटने के लिए की जा रही नई अनुसंधान गतिविधियों और प्रभावी उपचार विकसित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डाला। इंस्टीट्यूट फाॅर बायोमेडिकल एंड गलोबकोमिसक, गिरीफिथ यूनिवर्सिटी क्विंसलेंड आस्ट्रेलिया के प्रोफेसर डॉ. माइकल गुड ने फार्मा सेक्टर में एआई के लाभ एवं हानि पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर दीप्ति एवं प्रोफेसर शैलेंद्र ने फार्मेसी क्षेत्र में उद्योग और अकादमिक जगत के बीच समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया। योगेश शाह ने एथिकल और जेनेरिक दवाइयां के बीच अंतर को समझाया। भगवंत ग्रुप के चेयरमैन डॉ. अनिल सिंह ने कहा कि उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के बीच तभी अच्छा समन्वय रहेगा। यदि शिक्षा संस्थानों से एक वर्ष के लिए शिक्षकों को उद्योगों में डेपुटेशन पर भेजा जाए। एक पॉलिसी बनाकर सरकार इसका खर्च वहन करें। कार्यक्रम में अनेक प्रांतों एवं विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने अपना नवीनतम शोध प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुराग विजय अग्रवाल, डॉ अजय गुप्ता, फार्मेसी के प्रधानाचार्य डॉ. सचिन सिंघल, सहनिदेशक डॉ. पुष्पनील वर्मा, डॉ. शीतल राजपूत, डीन डॉ. अजय सिंह, जीएम दुष्यंत कुमार, विशाल कुमार आदि का सहयोग रहा।
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उन्होंने इबोला वायरस से निपटने के लिए की जा रही नई अनुसंधान गतिविधियों और प्रभावी उपचार विकसित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डाला। इंस्टीट्यूट फाॅर बायोमेडिकल एंड गलोबकोमिसक, गिरीफिथ यूनिवर्सिटी क्विंसलेंड आस्ट्रेलिया के प्रोफेसर डॉ. माइकल गुड ने फार्मा सेक्टर में एआई के लाभ एवं हानि पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर दीप्ति एवं प्रोफेसर शैलेंद्र ने फार्मेसी क्षेत्र में उद्योग और अकादमिक जगत के बीच समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया। योगेश शाह ने एथिकल और जेनेरिक दवाइयां के बीच अंतर को समझाया। भगवंत ग्रुप के चेयरमैन डॉ. अनिल सिंह ने कहा कि उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के बीच तभी अच्छा समन्वय रहेगा। यदि शिक्षा संस्थानों से एक वर्ष के लिए शिक्षकों को उद्योगों में डेपुटेशन पर भेजा जाए। एक पॉलिसी बनाकर सरकार इसका खर्च वहन करें। कार्यक्रम में अनेक प्रांतों एवं विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने अपना नवीनतम शोध प्रस्तुत किए।
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इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुराग विजय अग्रवाल, डॉ अजय गुप्ता, फार्मेसी के प्रधानाचार्य डॉ. सचिन सिंघल, सहनिदेशक डॉ. पुष्पनील वर्मा, डॉ. शीतल राजपूत, डीन डॉ. अजय सिंह, जीएम दुष्यंत कुमार, विशाल कुमार आदि का सहयोग रहा।
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