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दोना फैक्टरी मामला: 16 साल पहले दादा की हत्या के बाद शुरू हुआ था दबंगई का दौर, घेर में चली फैक्टरी, फैलाई दहशत

Thu, 25 Jun 2026 07:18 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 25 Jun 2026 07:18 PM IST
सार

Muzaffarnagar News:  मुजफ्फरनगर के तितावी स्थित फैक्टरी में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराया गया, यातनाएं दी गईं। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक मजदूर यहां से भागकर थाने पहुंच गया। इस केस का मुख्य आरोपी अंकित बालियान फरार है। 

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Dona Factory Case: A reign of intimidation began 16 years ago following the grandfather's murder
मजदूरों को यातनाएं दी गईं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तितावी के मांडी की दोना फैक्टरी के संचालक अंकित बालियान के दादा राजबीर सिंह की गांव की रंजिश में करीब 16 साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चाचा विपिन पर जानलेवा हमला किया गया। यही नहीं दूसरे पक्ष पर हमले में चाचा के नाम भी प्राथमिकी दर्ज हुई। रंजिश में हथियार उठाए गए। बाद में पंचायतों ने समझौते कराए। आरोपियों ने घेर को फैक्टरी में बदला और पिटबुल बांधकर दहशत फैला दी। ग्रामीणों ने घेर की तरफ आवाजाही सीमित कर दी। खुलासे से गांव हैरान रह गया।
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Dona Factory Case: A reign of intimidation began 16 years ago following the grandfather's murder
मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी मामला। छुड़ाए गए मजदूर। - फोटो : अमर उजाला
मुख्य आरेापी अंकित बालियान की दादी सुदेश बाला साल 2010 में प्रधान रहीं। इसके बाद अब तक हुए दो चुनाव में परिवार को एक बार भी जीत नसीब नहीं हुई। चौथी बार चुनाव लड़ने के लिए गांव में प्रचार सामग्री भी चस्पा करानी शुरू कर दी गई। परिवार के हिस्से में करीब 90 बीघा जमीन है। गांव के बाहर घेर को डेढ़ साल पहले फैक्टरी में बदला गया। तय किया गया कि दोना फैक्टरी का संचालन किया जाएगा। यहां से दोने देहरादून सप्लाई किए जा रहे थे।
मुख्य रूप से फैक्टरी की देखरेख अंकित बालियान करता था। परिवार के लोगों की भी यहां आवाजाही रहती थी। सुपरवाइजर शिवा त्यागी को साथ मिलाकर मजदूरों का उत्पीड़न शुरू किया गया। पंचायतों में हुए समझौतों के बाद रंजिश के फैसले हो गए।
 
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तितावी थाने में अंकित की खूब रही आवाजाही
मुख्य आरोपी अंकित बालियान की तितावी थाने में खूब आवाजाही रही। गांव के लोगों के अलावा वह क्षेत्र के लोगों के साथ थानों के प्रकरणों में पहुंचता था। इसके अलावा उसके चाचा विपिन कुमार भी लोगों की पैरवी करने के लिए थाने में जाते रहे।

मांडी हैरान, ग्रामीण बोले- यह उम्मीद नहीं थी
खुलासे के बाद मांडी गांव के लोग हैरान है। कहते हैं कि उन्हें इस तरह की उम्मीद नहीं थी। पुलिस जांच में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगी। ग्रामीण बिजेंद्र और गौरव कहते हैं कि किसी पर इस तरह का अत्याचार नहीं किया जाना चाहिए था।
 
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कोर्ट में बयान दर्ज
तितावी क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित दोना फैक्टरी में कथित बंधुआ मजदूरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने मुक्त कराए गए मजदूरों में से चार के न्यायालय में बयान दर्ज कराए हैं। मुजफ्फरनगर के मांडी गांव स्थित दोना फैक्टरी में बंधुआ मजदूरी के मामले में मजदूरों के बयान कोर्ट में दर्ज हुए हैं। पीड़ितों का आरोप है कि 10 से 12 हजार रुपये वेतन का झांसा देकर उन्हें बंधक बनाया गया और डेढ़ साल तक अमानवीय यातनाएं दी गईं।
पीड़ित मजदूरों के अनुसार उन्हें भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर विभिन्न राज्यों से लाया गया था, लेकिन यहां लाकर बंधक बना लिया गया। डेढ़ साल तक उनसे जबरन काम कराया गया और विरोध करने पर अमानवीय यातनाएं दी गईं। कोड़े से मारा गया, कुत्ते से कटवाया गया, चोकर की सूखी रोटियां खिलाईं गईं।
मामले में फरार चल रहे फैक्टरी मालिक अंकित बालियान और उसके एक सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
 

ऐसे हुआ खुलासा
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब राजस्थान निवासी मजदूर विक्रम किसी तरह फैक्टरी से भाग निकलने में सफल हो गया। मजदूरों ने बताया कि फैक्टरी का सुपरवाइजर शिवा शराब पीने गया हुआ था और मालिक भी मौके पर नहीं था। इसी दौरान मालिक के पिता के फैक्टरी से निकलने के बाद साथियों ने विक्रम को तिरपाल में छिपाकर बाहर निकाला और फिर उसे दीवार फांदकर भगा दिया।

गन्ने के खेत में छिपा
मजदूरों के अनुसार तीन लोगों ने उसका पीछा भी किया, लेकिन वह गन्ने के खेत में छिप गया और किसी तरह तितावी थाने पहुंचकर पूरी जानकारी पुलिस को दी। बाद में जब सुपरवाइजर को विक्रम के भागने का पता चला तो उसने फैक्टरी में मौजूद अन्य मजदूरों की पिटाई की।
 

कुत्तों के कारण आवाजाही थी कम
मजदूरों ने बताया कि फैक्टरी का मुख्य गेट हमेशा बंद रखा जाता था। केवल सामान आने-जाने या संचालकों के आने पर ही उसे खोला जाता था। गेट पर 'कुत्तों से सावधान' का बोर्ड लगा था, जिससे बाहरी लोगों का वहां आना-जाना भी कम रहता था।
पीड़ितों का कहना है कि कई मजदूरों को महीनों तक यह भी पता नहीं था कि उन्हें किस गांव और किस इलाके में रखा गया है। एक मजदूर ने पुलिस को बताया कि वह आठ महीने से वहां काम कर रहा था, लेकिन उसे अपने ठिकाने का नाम तक नहीं मालूम था।
 

इनके बयान दर्ज कराए
पुलिस ने मजदूर रंजीत, साहिल, विक्रम और जगदीश के बयान न्यायालय में दर्ज कराए हैं। बिहार निवासी संतोष और उज्ज्वल को भी बयान के लिए ले जाया गया था, लेकिन समयाभाव के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। अन्य मजदूरों के बयान भी दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया जारी है। इस बीच बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से मजदूरों के परिजन तितावी थाने पहुंचने लगे हैं। पुलिस ने सभी मजदूरों के घरवालों को सूचना दे दी है और उन्हें सुरक्षित घर भेजने की तैयारी की जा रही है।

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