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सेवा में त्रुटि के लिए डिश टीवी इंडिया पर लगाया जुर्माना
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सेवा में त्रुटि के लिए डिश टीवी इंडिया पर लगाया जुर्माना
मुजफ्फरनगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता को सेवा में त्रुटि पाए जाने पर डिश टीवी इंडिया पर जुर्माने सहित 4850 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश पारित किया है। आयोग ने कंपनी द्वारा परिवाद के क्षेत्राधिकारी को दिल्ली के होने की दलील खारिज कर दी।
शहर के दक्षिणी सिविल लाइंस निवासी नीरज कुमार अधिवक्ता हैं। उन्होंने अक्तूबर 2016 मेें डिश टीवी इंडिया लि0 से एचडी टीवी के लिए 5200 रुपये भुगतान कर कनेक्शन लिया था। कंपनी ने उपभोक्ता को एक वर्ष के लिए किसी भी परेशानी आने पर दिक्कत हल कराने का भरोसा दिया। आरोप है समयावधि के भीतर कनेक्शन में अनेक बार समस्याएं आनी शुरू हो गई। नीरज ने कंपनी को कई बार मौखिक और कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद समाधान नहीं हुआ और कंपनी का टेक्निशयन उपकरण मरम्मत के नाम पर 250 रुपये वसूल कर चला गया। नीरज ने जून 2017 में उपभोक्ता आयोग के समक्ष सेवा में त्रुटि प्रदाता कंपनी के खिलाफ 30 हजार रुपये हर्जे सहित वाद दर्ज कराया। आयोग के समक्ष विपक्षी कंपनी के अधिवक्ता ने परिवाद को क्षेत्राधिकार दिल्ली को बताते हुए वहीं सुनवाई का तर्क रखा। इस पर आयोग ने कहा कि मामले की ग्रेविटी को देखते हुए मामूली मामले में उपभोक्ता को दिल्ली केस लड़ने के लिए मजबूर करना न्यायोचित नहीं लगता और यह दलील अस्वीकार कर दी। आयोग के चेयरमैन अनिल कुमार गुप्ता, सदस्य नैय्यर मजीद फारूखी एवं मनीष कुमार ने परिवाद को आंशिक स्वीकार करते हुए कनेक्शन चार्ज की आधी रकम 2600 रुपये, टेक्निशयन द्वारा चार्ज किए 250 रुपये एवं अधिवक्ता फीस और मानसिक पीड़ा के लिए एक-एक हजार रुपये परिवादी को भुगतान करने के आदेश दिए। परिवादी कंपनी से वाद योजित करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
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मुजफ्फरनगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता को सेवा में त्रुटि पाए जाने पर डिश टीवी इंडिया पर जुर्माने सहित 4850 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश पारित किया है। आयोग ने कंपनी द्वारा परिवाद के क्षेत्राधिकारी को दिल्ली के होने की दलील खारिज कर दी।
शहर के दक्षिणी सिविल लाइंस निवासी नीरज कुमार अधिवक्ता हैं। उन्होंने अक्तूबर 2016 मेें डिश टीवी इंडिया लि0 से एचडी टीवी के लिए 5200 रुपये भुगतान कर कनेक्शन लिया था। कंपनी ने उपभोक्ता को एक वर्ष के लिए किसी भी परेशानी आने पर दिक्कत हल कराने का भरोसा दिया। आरोप है समयावधि के भीतर कनेक्शन में अनेक बार समस्याएं आनी शुरू हो गई। नीरज ने कंपनी को कई बार मौखिक और कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद समाधान नहीं हुआ और कंपनी का टेक्निशयन उपकरण मरम्मत के नाम पर 250 रुपये वसूल कर चला गया। नीरज ने जून 2017 में उपभोक्ता आयोग के समक्ष सेवा में त्रुटि प्रदाता कंपनी के खिलाफ 30 हजार रुपये हर्जे सहित वाद दर्ज कराया। आयोग के समक्ष विपक्षी कंपनी के अधिवक्ता ने परिवाद को क्षेत्राधिकार दिल्ली को बताते हुए वहीं सुनवाई का तर्क रखा। इस पर आयोग ने कहा कि मामले की ग्रेविटी को देखते हुए मामूली मामले में उपभोक्ता को दिल्ली केस लड़ने के लिए मजबूर करना न्यायोचित नहीं लगता और यह दलील अस्वीकार कर दी। आयोग के चेयरमैन अनिल कुमार गुप्ता, सदस्य नैय्यर मजीद फारूखी एवं मनीष कुमार ने परिवाद को आंशिक स्वीकार करते हुए कनेक्शन चार्ज की आधी रकम 2600 रुपये, टेक्निशयन द्वारा चार्ज किए 250 रुपये एवं अधिवक्ता फीस और मानसिक पीड़ा के लिए एक-एक हजार रुपये परिवादी को भुगतान करने के आदेश दिए। परिवादी कंपनी से वाद योजित करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
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