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बढ़ती महंगाई का मार से हर वर्ग के लोगों में मायूसी

Sat, 18 Sep 2021 11:38 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Sep 2021 11:38 PM IST
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Disappointment among all sections of people due to rising inflation
प्रियंका - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बढ़ती महंगाई की मार से हर वर्ग के लोगों में मायूसी
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मुजफ्फरनगर। बेलगाम हुई महंगाई के चलते हर वर्ग का बजट गड़बड़ाने गया है। आए दिन खाद्य तेल एवं चीनी के दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग खासतौर पर मायूस है। रसोई का बजट बिगड़ने से गृहिणियों का गुस्सा चरम पर है। बढ़ती महंगाई पर सरकार का नियंत्रण नहीं होने से आम वर्ग हताश और निराश है। इस मुद्दे पर व्यापारियों और गृहिणियों से बातचीत पर एक रिपोर्ट।
अनिश्चितता में खरीदारी में रहता है जोखिम
गांधी नगर निवासी किराना व्यापारी अनुज कुमार कहते हैं कि कोरोना काल के बाद घरेलू खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अनिश्चितता के कारण जोखिम बना रहता है। दुकान में सामान की ज्यादा आपूर्ति करने से पहले सोचना पड़ता है। बढ़ती कीमतों के कारण दुकानदार को नाराजगी झेलनी पड़ती है।
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खाद्य तेलों की महंगाई से बिगड़ता है बजट
मिमलाना रोड निवासी व्यापारी अरविंद गर्ग तेल चीनी और किराना के सामान के खुदरा और थोक व्यापारी हैं। कहते कि कूकड़ा मंडी में दाम कब बढ़ जाए, मालूम नहीं रहता। खाद्य तेलों पर महंगाई हर खाने के सामान को प्रभावित करती है। इसी से बजट बिगड़ता है। चीनी और तेल के दामों की छलांग बढ़ती जा रही है। पिछले एक पखवाड़े में दाम बढ़ रहे हैं। बाजार में चीनी के दाम में करीब तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ गई है।
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क्या कहती है गृहिणियां?
सरकार की रोजमर्रा की कीमतों पर नियंत्रण नहीं
- शहर की हनुमानपुरी निवासी गृहिणी प्रियंका कहती हैं कि रोजमर्रा की घरेलू खाद्य पदार्थों की कीमतों पर सरकार कर नियंत्रण नहीं है, जिससे रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है। तेल और चीनी की प्रयोग हर खाद्य वस्तुओं में होता है। महंगाई की मार से मध्यम वर्ग के सामने आए दिन दिक्कत बनी रहती है।
पटेल नगर निवासी निकिता गोयल महंगाई बढ़ने से परेशान हैं। कहती हैं कि दो साल में तेल के दामों में दोगुनी वृद्धि हो गई है। पिछले दिनों में लॉकडाउन का असर आम लोगों की जिंदगी पर हर तरीके से भारी पड़ रहा है। इस संकट में परिवार की आय कम और बढ़ती महंगाई से घर का बजट गड़बड़ हो गया है।

खर्च बढ़ने से मध्यम वर्ग झेल रहा कर्ज का बोझ
बिरालसी निवासी गृहिणी रजनी चौहान कहती हैं कि लागत के मुताबिक एक तरफ किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिलता। वहीं, घरेलू सामान की कीमतें रोज आसमान छू रही हैं। जिससे मध्यम वर्ग के लोग कर्ज के तले दब रहे हैं। एक बार जिस उत्पाद की कीमतें बढ़ जाती है, फिर घटने का नाम लेती है, जबकि महंगाई के दौर में परिवार की आय घट रही है।
नाम------भाव खुदरा (20 दिन पूर्व)--वर्तमान रेट
तेल सरसों--170 रुपये प्रति किलो--185-190
चीनी-----36-37 रुपये प्रति किलो---41-42
आटा गेहूं--195-200 (10 किलो)--220-225
दाल मसूर--95-100 प्रति किलो --120
मलका दाल--70-75 प्रति किलो---85-90 रुपये

निकिता गोयल

निकिता गोयल- फोटो : MUZAFFARNAGAR

रजनी चौहान

रजनी चौहान- फोटो : MUZAFFARNAGAR

अरविंद गर्ग

अरविंद गर्ग- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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