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Muzaffarnagar News: एकता विहार का गेट हटवाने को लेकर ईओ कार्यालय में धरना
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मुजफ्फरनगर। एकता विहार में बनवाए गए गेट को हटाने की मांग करते हुए भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट कार्यकर्ताओं ने पालिका अधिशासी अधिकारी कार्यालय में धरना दिया। आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण का आदेश होने के बावजूद गेट नहीं हटवाया जा रहा। आंदोलन की चेतावनी दी गई।
सोमवार को भाकियू तोमर गुट कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पालिका पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने ईओ कार्यालय जाकर धरना शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद एकता विहार का गेट तोड़ा नहीं जा रहा।
भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के युवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अंकित गुर्जर ने कहा कि तीन माह पूर्व नगरपालिका के वार्ड संख्या 15 के अन्तर्गत आने वाले एकता विहार कॉलोनी के मुख्य मार्ग पर प्रवेश द्वारा का निर्माण कराया गया था। सभासद के पति प्रमोद कुमार ने इस गेट का नामकरण डॉ.भीमराव आंबेडकर द्वार कर दिया था। नागरिकों की शिकायत पर
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पालिका सहायक अभियंता ने जांच की थी। जांच में गेट निर्माण अवैध पाए जाने पर उन्होंने उसे हटवाने के लिए आदेश दिये थे, लेकिन इसके बाद कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। गुर्जर ने कहा कि चार दिन पहले स्थानीय अभिसूचना इकाई को जानकारी दे दी गई थी। उसके बावजूद अधिशासी अधिकारी अपने कार्यालय में नहीं मिली।
वहां धरना देते हुए किसानों ने जोरदार नारेबाजी की। चेतावनी दी कि यदि गेट नहीं तोड़ा गया तो आंदोलन होगा। महक सिंह, अबरार, नरेश, सरताज, सुरेन्द्र आदि शामिल रहे।
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सोमवार को भाकियू तोमर गुट कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पालिका पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने ईओ कार्यालय जाकर धरना शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद एकता विहार का गेट तोड़ा नहीं जा रहा।
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भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के युवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अंकित गुर्जर ने कहा कि तीन माह पूर्व नगरपालिका के वार्ड संख्या 15 के अन्तर्गत आने वाले एकता विहार कॉलोनी के मुख्य मार्ग पर प्रवेश द्वारा का निर्माण कराया गया था। सभासद के पति प्रमोद कुमार ने इस गेट का नामकरण डॉ.भीमराव आंबेडकर द्वार कर दिया था। नागरिकों की शिकायत पर
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पालिका सहायक अभियंता ने जांच की थी। जांच में गेट निर्माण अवैध पाए जाने पर उन्होंने उसे हटवाने के लिए आदेश दिये थे, लेकिन इसके बाद कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। गुर्जर ने कहा कि चार दिन पहले स्थानीय अभिसूचना इकाई को जानकारी दे दी गई थी। उसके बावजूद अधिशासी अधिकारी अपने कार्यालय में नहीं मिली।
वहां धरना देते हुए किसानों ने जोरदार नारेबाजी की। चेतावनी दी कि यदि गेट नहीं तोड़ा गया तो आंदोलन होगा। महक सिंह, अबरार, नरेश, सरताज, सुरेन्द्र आदि शामिल रहे।