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राज्य सरकारों से एनपीआर प्रक्रिया निलंबित करने की मांग
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दिल्ली में जमीयत उलमा-ए-हिंद के मुख्यालय पर होती बैठक
- फोटो : 22dbn20.jpg
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देवबंद(सहारनपुर)। सीएए, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के मुख्यालय पर ‘जागरूक भारतीय नागरिकों के बीच चर्चा’ शीर्षक से बैठक का आयोजन हुआ। जिसमें सभी धर्मों से संबंधित देश के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, दलित नेताओं और मुस्लिम संगठनों के लोग शामिल हुए।
शनिवार को दिल्ली स्थित मुख्यालय पर जमीयत अध्यक्ष मौलाना कारी सैय्यद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लगभग चार घंटे की लंबी चर्चा और विभिन्न कानूनी मामलों पर विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक घोषणा पत्र पारित किया गया। जिसे दिल्ली घोषणा पत्र नाम दिया गया। जमीयत के सचिव नियाज अहमद फारुकी के मुताबिक घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से जल्द होने वाले एनपीआर को अस्वीकार करने के लिए घोषणा की गई, साथ ही जनता से कहा गया कि एनपीआर एक अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक होगा। डेटा एकत्रित करने वाले घर घर जाएंगे, हमें विनम्रता के साथ उनसे सहयोग करने से इनकार करना चाहिए और उन्हें किसी तरह की जानकारी प्रदान नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बैठक में सात सूत्रीय घोषणा पत्र भी पारित किया गया। जिसमें सभी राज्य सरकारों से एनपीआर प्रक्रिया को तत्काल बंद करने, कानून-व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों से भारतीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करने, उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग की निंदा करते हुए यूपी को शांतिपूर्ण असहमति को सरकारी तंत्र द्वारा दमन किए जाने की प्रयोगशाला करार देनेे, देशभर के कई शाहीन बागों में चलने वाले महिलाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सराहना करने, देशद्रोह और ऐसे दूसरे काले कानूनों के तहत लोगों की पक्षपातपूर्ण की गई गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई व उनके विरुद्ध लगाए गए सभी तरह के आरोपों को खारिज करने सहित अन्य प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक में यह लोग रहे मौजूद
देवबंद। जमीयत के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी, कमाल फारूकी, अबू सालेह, अबुबकर सब्बाक, अंबरीश राय, अमरीक सिंह बंगर, एमएम अंसारी, आसिफ अंजर नदवी, नायक तेजावथ, दिलीप निम, मावल्ली शंकर, जॉन दयाल, के. रहमान खान, सुल्तान खान, एमजे खान, मीनाक्षी सखी, मुजतबा फारूक, शब्बीर नदवी, नरेंद्र कुमार शर्मा, पीएमए सलाम, एसक्यूआर इलियास, सामी सलमानी, रंजीत सिंह, तेज सिंह, साजिद, इम्तियाज पीरजादा आदि लोग मौजूद रहे।
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शनिवार को दिल्ली स्थित मुख्यालय पर जमीयत अध्यक्ष मौलाना कारी सैय्यद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लगभग चार घंटे की लंबी चर्चा और विभिन्न कानूनी मामलों पर विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक घोषणा पत्र पारित किया गया। जिसे दिल्ली घोषणा पत्र नाम दिया गया। जमीयत के सचिव नियाज अहमद फारुकी के मुताबिक घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से जल्द होने वाले एनपीआर को अस्वीकार करने के लिए घोषणा की गई, साथ ही जनता से कहा गया कि एनपीआर एक अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक होगा। डेटा एकत्रित करने वाले घर घर जाएंगे, हमें विनम्रता के साथ उनसे सहयोग करने से इनकार करना चाहिए और उन्हें किसी तरह की जानकारी प्रदान नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बैठक में सात सूत्रीय घोषणा पत्र भी पारित किया गया। जिसमें सभी राज्य सरकारों से एनपीआर प्रक्रिया को तत्काल बंद करने, कानून-व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों से भारतीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करने, उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग की निंदा करते हुए यूपी को शांतिपूर्ण असहमति को सरकारी तंत्र द्वारा दमन किए जाने की प्रयोगशाला करार देनेे, देशभर के कई शाहीन बागों में चलने वाले महिलाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सराहना करने, देशद्रोह और ऐसे दूसरे काले कानूनों के तहत लोगों की पक्षपातपूर्ण की गई गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई व उनके विरुद्ध लगाए गए सभी तरह के आरोपों को खारिज करने सहित अन्य प्रस्ताव पारित किए गए।
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बैठक में यह लोग रहे मौजूद
देवबंद। जमीयत के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी, कमाल फारूकी, अबू सालेह, अबुबकर सब्बाक, अंबरीश राय, अमरीक सिंह बंगर, एमएम अंसारी, आसिफ अंजर नदवी, नायक तेजावथ, दिलीप निम, मावल्ली शंकर, जॉन दयाल, के. रहमान खान, सुल्तान खान, एमजे खान, मीनाक्षी सखी, मुजतबा फारूक, शब्बीर नदवी, नरेंद्र कुमार शर्मा, पीएमए सलाम, एसक्यूआर इलियास, सामी सलमानी, रंजीत सिंह, तेज सिंह, साजिद, इम्तियाज पीरजादा आदि लोग मौजूद रहे।
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